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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने अपने 12 वर्षों का कार्यकाल पूरा कर लिया है. इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, मैं अभिभूत हूं कृतज्ञ हूं. चरैवेति-चरैवेति के मंत्र का जाप करते हुए इस राजनीतिक यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखते हुए, एक दिन यह पड़ाव भी आएगा मैंने कभी सोचा नहीं था. निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सबसे लंबी अवधि तक सेवा करने का अवसर, इसे मैं अपना परम सौभाग्य मानता हूं.
आपने इस अवसर पर मुझे सम्मानित किया, इतना मान दिया, इसके लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत आभारी हूं. साथियों, इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा का सौभाग्य मिलना, ये ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव हो सकता है और मेरे लिए तो जनता जनार्दन ही ईश्वर का रूप है.
इसलिए मैंने इस सेवा कार्य को हमेशा एक साधना के रूप में ही देखा है और यह साधना भी एकाकी नहीं रही है, एक सामूहिक यज्ञ है जिसमें आप सबने और अनेकों साथियों ने कर्तव्य भाव से अपना योगदान दिया है. मैं आज इस यात्रा के ऐसे सभी साथियों के प्रति भी अपना आभार प्रकट करता हूं.
इस अवसर पर एनडीए (NDA) परिवार के सदस्यों ने एक रेजोल्यूशन भी पेश किया है, यह आप सबकी आत्मीयता और उदारता है क्योंकि मैं इस यात्रा को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता हूं. यह हर दृष्टिकोण से हम सबकी सामूहिक उपलब्धि है. यह एनडीए के हर घटक दल की एक समान उपलब्धि है. इसलिए मैं इस प्रस्ताव को आप सभी को, भाजपा समेत हमारे एनडीए परिवार के सभी कार्यकर्ताओं को समर्पित करता हूं.
भारत की जनता का नीर-क्षीर विवेक हमेशा अद्भुत रहा है. देश की जनता ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्थिरता का महत्व समझा है. यह जनता जनार्दन की परिपक्वता ही है कि उसने लंबे समय तक मुझे इस तरह जनता की सेवा का अवसर दिया. 2014 के पहले के कई दशक बहुत अस्थिरता और उथल-पुथल से भरे हुए थे, इसका देश को बहुत नुकसान भी उठाना पड़ा. लेकिन अब देश की जनता एक स्थिर सरकार का काम भी देख रही है और उसकी निर्णायक क्षमताओं की प्रशंसक भी है. मैं आज देश की महान जनता को भी नमन करता हूं, जनता जनार्दन का आभार व्यक्त करता हूं.
साल 2014 में जब एनडीए की जीत हुई थी तब मैंने कहा था कि आज देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ है. इस आशा का, इस उम्मीद का संरक्षण हम सभी का बहुत बड़ा दायित्व था. देश के लोगों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद अपना भरोसा हमें सौंपा था. मुझे आज संतोष है, गर्व है कि एनडीए परिवार के तौर पर हमने देश के विश्वास को हमेशा और मजबूत किया है.
2014 में आशा का उदय होता सूरज, आज नए आत्मविश्वास के प्रकाश पुंज में बदल गया है. भारत के लोगों ने पहली बार ये देखा है कि जब सही नियत से सरकार चलती है तो तेज गति से विकास भी होता है. एनडीए सरकार के इन 12 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों का गरीबी से बाहर निकलना यह दिखाता है कि हमारी नीतियां सही हैं, हमारी दिशा सही है.
यह सफलता आज देश के हर उस व्यक्ति को एक भरोसा देती है कि एक न एक दिन उसका संघर्ष भी खत्म होगा, एक दिन उसके सपने भी पूरे होंगे. और मैं मानता हूं, कल जो गरीब था, आज जो नियो-मिडिल क्लास (Neo-Middle Class) बना है, उसे अब हमें पीछे नहीं होने देना है. इसलिए सरकार के नाते, जनप्रतिनिधि के नाते हमें दिन-रात काम करना है, परिश्रम की पराकाष्ठा करनी है, और इस संकल्प के साथ कि 140 करोड़ का यह देश हमसे जो उम्मीदें लगाए बैठा है, वो ज़रूर पूरी हों.
भारत का युवा, भारत की नारी शक्ति, भारत का मध्यम वर्ग, भारत के किसान, सबकी आकांक्षाएं हैं, उनकी एस्पिरेशंस हमें पूरी करनी हैं. आज देश का हर नागरिक विकसित भारत के सपने से भरा हुआ है. विकसित भारत का सपना अब किसी एक व्यक्ति का नहीं रहा, किसी सरकार का नहीं रहा, किसी दल का नहीं रहा, देश के जन-जन का सपना बन चुका है, संकल्प बन चुका है. और इस सपने की पूर्ति के लिए हमें अपना हर पल समर्पित करना है.
एनडीए के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता यह भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से इस धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’. यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की, लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था, ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’. इस कांग्रेस ग्रोथ रेट में ना गवर्नेंस थी, ना नीति, ना नियत और ना ही निर्णय.
आज पहली बार अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार आई, तब जाकर हमें एक झलक दिखी कि विकास में गति कैसे आती है. लेकिन दुर्भाग्य से 2004 में देश फिर से अस्थिरता के बवंडर में और कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया. विकास तो दूर की बात है, देश को कांग्रेस ने एक के बाद एक हजारों करोड़ रुपए के घोटालों में घसीट दिया.
देश का भाग्य फिर तब बदला जब 2014 में एनडीए की सरकार बनी. देश ने देखा कि जब नियत, नीति और निर्णय तीनों एक साथ काम करते हैं, तो विकास की गति कैसी होती है. देश ने देखा कि जो काम दशकों में होते थे, वह काम महीनों में होने लगे. 2014 में 74 एयरपोर्ट से 2026 में 160 से अधिक एयरपोर्ट तक, 2014 में 1,000 कि.मी. एक्सप्रेसवे से 2026 में 6,700 कि.मी. एक्सप्रेसवे तक, 2014 में सिर्फ पांच शहरों में मेट्रो से 2026 में 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो तक, 2014 में 700 करोड़ डिफेंस एक्सपोर्ट से 2026 में 23,000 करोड़ के डिफेंस एक्सपोर्ट तक देश ने बहुत लंबी यात्रा तय की है.
2014 में देश में केवल 25 करोड़ इंटरनेट यूजर थे, आज 100 करोड़ से अधिक यूजर इंटरनेट से जुड़े हैं. 2014 में डिजिटल पेमेंट्स ना के बराबर थे, आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में नंबर वन देश है. 2014 में भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर मोबाइल बाहर से मंगाता था, आज भारत 33 करोड़ से अधिक मोबाइल हैंडसेट खुद बनाता है. 2014 में सोलर क्षमता केवल ढाई गीगावाट थी, आज यह 150 गीगावाट से अधिक है.
2014 में एथेनॉल ब्लेंडिंग केवल 1.5% था, आज यह 20% तक पहुंच चुकी है. 2014 में देश की एक भी सेमीकंडक्टर यूनिट नहीं थी, आज देश में बन रही 10 से ज्यादा सेमीकंडक्टर यूनिट्स भारत को आधुनिकता की तरफ ले जा रही हैं.
हमने देश की जरूरतों को अपनी नीतियों और निर्णयों का आधार बनाया. नई सोच से नए फैसले लिए. हमने युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री बनाई, सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने के लिए अलग कोऑपरेटिव मिनिस्ट्री बनाई, हमारे मछुआरे भाई-बहनों के लिए अलग फिशरीज मिनिस्ट्री बनाई. हमारा फोकस क्लियर था, विकास की इस दौड़ में कोई पीछे ना छूटे.
हमने दिव्यांग जनों के लिए कानून बनाया, आदिवासियों के लिए जनमन जैसी योजनाएं शुरू कीं. पशुपालकों और मछुआरों को पहले किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ नहीं मिलता था, हमने उन्हें भी सुविधा से जोड़ा और इतना ही नहीं, हमारी सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी.
सवाल यह है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है, तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? यह कांग्रेस ग्रोथ रेट और एनडीए ग्रोथ रेट का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी, आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी, आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए, 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, यह उस भारत की कहानी है जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना शुरू किया है. वह भारत जो बड़े लक्ष्य तय कर रहा है और इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है.
एनडीए के 12 वर्षों की उपलब्धियों की एक और विशेषता है—हमें ये उपलब्धियां वैश्विक अस्थिरता और अशांति के दौर में हासिल हुई हैं. एक स्थिर सरकार होने का लाभ क्या होता है, यह बार-बार इस दौर ने साबित किया. कोरोना के समय को हम कभी नहीं भूल सकते जब हर तरफ हाहाकार मचा था, लेकिन भारत उस हालात का मुकाबला करते हुए भी सफलता से आगे बढ़ा.
दुनिया के बड़े-बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं, तब भी 2025-26 में भारत ने 7.7% की ग्रोथ रेट हासिल की है. और पिछला क्वार्टर तो जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8% रही है. यह सफलता इतनी आसान नहीं है दोस्तों. हम ‘फ्रेजाइल फाइव’ (Fragile Five) के कटघरे से बाहर निकलकर आज दुनिया की तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुके हैं.
कल के विकसित भारत की गारंटी है आज का आकांक्षी भारत. आकांक्षी भारत के गर्भ में विकसित भारत पल रहा है. आज के भारत की आकांक्षाएं बड़ी हैं, सपने बड़े हैं, इसलिए उसके संकल्प और लक्ष्य भी उतने ही बड़े हैं. देश की इन आकांक्षाओं का वाहक हमारा मिडिल क्लास है, नियो-मिडिल क्लास है, इसलिए हमारी सरकार मध्यम वर्ग की एस्पिरेशंस को पूरा करने में लगी है. मिडिल क्लास की ईज ऑफ लिविंग, उसकी क्वालिटी ऑफ लाइफ, उसके लिए नए अवसर और नई संभावनाएं, हमने हर फ्रंट पर काम किया है.
2014 से पहले मिडिल क्लास कानून की उलझनों का सबसे बड़ा शिकार हुआ करता था. जटिल टैक्स सिस्टम, आम आदमी के सीमित स्रोत और टैक्स का बड़ा बोझ, खराब गवर्नेंस की मार, ये सब सामान्य मानवी के लिए डेली लाइफ की चुनौती होती थी. लेकिन हमने मिडिल क्लास की परेशानियों को समझा, हमने मिडिल क्लास की आकांक्षाओं को समझा और इसलिए आज 12 लाख तक की आय पूरी तरह से टैक्स फ्री है. आज देश में सरल और फेसलेस टैक्स सिस्टम है, अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर से उनका जीवन आसान हुआ है.
बीते 12 वर्षों में मिडिल क्लास परिवार के बच्चों के लिए हर क्षेत्र में नए अवसर बने हैं. मध्यम वर्ग के घर का सपना पूरा हो सके, सरकार इसमें भी मदद कर रही है. घर में इलाज के खर्च का बोझ कम हो, इसके लिए आयुष्मान भारत योजना में बिना आय सीमा के बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है. जीएसटी रिफॉर्म का भी बहुत बड़ा लाभ देश के मध्यम वर्ग को हुआ है, उसके लिए हेल्थ इंश्योरेंस सस्ता हुआ है, उसके सपनों से जुड़ी चीजें सस्ती हुई हैं. इन प्रयासों का परिणाम है कि आज देश का मिडिल क्लास अनिश्चितताओं से मुक्त हो रहा है, वो भरपूर आत्मविश्वास के साथ देश की विकास यात्रा को गति दे रहा है.
हमारे लिए दल से हमेशा अगर बड़ा कुछ है, तो हमारा देश है ‘दल से बड़ा देश’. और जब ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First), देश प्रथम की भावना से काम होता है, तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता. इसलिए ऐसे फैसले जिन्हें पहले असंभव समझा था, जो देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे, हमने बहुत ही सधे हुए तरीके से उन फैसलों को भी लिया.
पहले सरकारें आर्टिकल 370 की बात करने से डरती थीं, हमने उसे खत्म करके पूरे देश में एक संविधान लागू किया. पहले नॉर्थ ईस्ट से बम, बंदूक और ब्लॉकेड जाने का नाम नहीं लेते थे, हमने नॉर्थ ईस्ट में शांति भी लौटाई और स्थिरता भी लेकर आए.
पहले भारत आतंक के हमलों के बाद चुपचाप दर्द सहता रहता था, हमने आतंकवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, एयर स्ट्राइक की.
ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा. पहले मान लिया गया था कि नक्सलवाद-माओवाद अब कभी नहीं खत्म होने वाले हैं, कभी खत्म हो ही नहीं सकते, हमने देश को नक्सलवाद-माओवाद के उस जहर से मुक्त करके दिखाया.
महिलाओं को आरक्षण, तीन तलाक के खिलाफ कानून, सीएए (CAA) का कानून, भारतीय न्याय संहिता, सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन, एनडीए सरकार राष्ट्रहित में कोई भी काम करने से पीछे नहीं रही और हम सभी को इस बात पर गर्व है. मैं आज देश को फिर आश्वस्त करूंगा देश हित के बड़े फैसलों का सिलसिला और भी तेज होगा, तेज गति से आगे बढ़ेगा.
बीते 12 वर्षों में देश ने जो कुछ हासिल किया वो दुनिया देख रही है, लेकिन अब हमें अपनी दृष्टि आगे की ओर रखनी है. हमें 2047 के लक्ष्य को देखते हुए, उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी स्पीड को और बढ़ानी होगी. हमारा बेंचमार्क अब यह होना चाहिए कि बीते 12 वर्षों में जो स्पीड और स्केल हमारी रही है, उसको हम और अधिक बड़ा और व्यापक कैसे बना सकें.
आज ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, इसलिए भारत को अब ग्लोबल पैरामीटर्स, ग्लोबल कॉम्पिटिशन और ग्लोबल पर्सपेक्टिव देखना है. दुनिया भारत से सॉल्यूशन चाहती है, दुनिया भारत में वैश्विक सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद पार्टनर देख रही है और हमें दुनिया की इन अपेक्षाओं पर खरा उतर कर दिखाना है. हमें यह समय गंवाना नहीं है और मैं बार-बार कहता हूं, ‘यही समय है, सही समय है.’
बस हमें फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी में खुद को श्रेष्ठ रखना है, हमें सिर्फ दुनिया जैसा नहीं करना, हमें दुनिया से एक कदम आगे रहना है. अब जैसे एनर्जी सिक्योरिटी है, बीते 12 वर्षों में हमने ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के लिए अभूतपूर्व काम किया. मैंने लाल किले से समुद्र मंथन अभियान की घोषणा की थी, यह बहुत ही महत्वाकांक्षी मिशन है. बीते दिनों में ऑयल एंड गैस के एक्सप्लोरेशन को लेकर काफी पॉजिटिव खबरें आ रही हैं, यानी आने वाला समय अनेक संभावनाओं से भरा हुआ है और हमें हर संभावना का पूरा फायदा उठाना है.
अब हमें 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के टारगेट को जल्द से जल्द पूरा करना है. सोलर एनर्जी को लेकर तो काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अब हमें न्यूक्लियर एनर्जी के लक्ष्यों को भी तेजी से हासिल करना है. अभी हमने दुनिया को दिखाया है कि भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर टेक्नोलॉजी में कितना आगे पहुंच गया है, ये टेक्नोलॉजी हमें न्यूक्लियर एनर्जी में आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाएगी. इसी तरह ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के मामले में भारत बहुत तेजी से काम कर रहा है. आने वाले समय में ये टेक्नोलॉजी भारत को ग्लोबल ग्रीन एनर्जी मैप में सबसे प्रमुख बना पाएगी और ये नाम बनना पक्का है.
आज बड़े एक्सपर्ट्स का भी अनुभव है कि जिन देशों ने मैन्युफैक्चरिंग के पूरे इकोसिस्टम पर 80-90 के दशक में काम किया, उन्हें उसका फायदा इस सदी में मिलना शुरू हुआ. भारत ने 10-12 वर्ष पहले जिस इकोसिस्टम पर काम करना शुरू किया, उसका लाभ अब देश को मिलना शुरू हो गया है. 2014, 15, 16 के कालखंड में जो नींव डाली गई, उसके फल अब दिखाई देने लगे हैं. भारत तेजी से दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस बनने की ओर आगे बढ़ रहा है.
एनर्जी मिनरल्स, चिप, बैटरी स्टोरेज, स्पेस, ड्रोन, डेटा सेंटर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस—ऐसे हर सेक्टर, हर टेक्नोलॉजी एक दूसरे से जुड़ी हुई है, ये एक दूसरे की पूरक हैं. भारत इन चीज़ों के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता क्योंकि यह भारत की आर्थिक और स्ट्रेटेजिक, हर प्रकार की सिक्योरिटी से जुड़े विषय हैं, और तभी भारत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर इतना फोकस कर रहा है, तभी क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर मिशन मोड पर काम चल रहा है.
शिपिंग सेक्टर में भारत आत्मनिर्भरता के नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है. हम एक ऐसे फ्यूचर की तरफ बढ़ रहे हैं जहां हम ‘मेड इन इंडिया’ शिप पर ट्रेड करेंगे और कंटेनर भी ‘मेड इन इंडिया’ होंगे. शिप मेंटेनेंस और रिपेयर से लेकर स्क्रैपिंग तक की सर्विसेज भी भारत देगा. यही विजन हमारे एविएशन सेक्टर के लिए है. आज हम मेड इन इंडिया ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बना रहे हैं, वो दिन दूर नहीं जब भारत मेड इन इंडिया सिविल एयरक्राफ्ट भी बनाएगा. देशवासी मेड इन इंडिया विमान में ही यात्रा करेंगे, वो दिन मैं देख रहा हूं दोस्तों.
यह सदी टेक्नोलॉजी की है, डेटा की है. आज विश्व के सबसे बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर्स भारत में बन रहे हैं, यही भारत की ग्लोबल सप्लाई और वैल्यू चेन का मजबूत पिलर बनाएगी. हमने यूपीआई (UPI) के माध्यम से दुनिया को दिखाया है कि भारत कम से कम खर्च और कम से कम समय में टेक्नोलॉजी का इतना विस्तार कर सकता है. हमने दिखाया है कि हमारे युवाओं का सामर्थ्य क्या है. अब एआई (AI), डीपटेक और एडवांस टेक्नोलॉजी में हमारे युवा नया दमखम दिखाने के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं.
आने वाले समय में दो और सेक्टर्स में भारत का सामर्थ्य पूरी दुनिया देखेगी—यह सेक्टर हैं टूरिज्म और स्पोर्ट्स. यह दोनों भारत की इकॉनमी के मजबूत पिलर बनेंगे. विशेष रूप से कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन और कॉन्सर्ट के मामले में भारत एक ग्लोबल डेस्टिनेशन बनने के लिए अब पूरी तरह सज रहा है.
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से इस सेक्टर को बहुत पुश मिलेगा और स्पोर्ट्स में तो भारत के युवा कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं और हर दिन उनकी परफॉर्मेंस निखरती जा रही है. भारत दुनिया की बिगेस्ट स्पोर्ट्स लीग की धरती बनता जा रहा है, आने वाले सालों में हमारी यह ख्याति और बुलंद होगी. ओलंपिक्स के लिए हमारी तैयारियां भी भारतीय एस्पिरेशन का ही प्रतिबिंब हैं. हमें छोटा नहीं सोचना है, हमें लक्ष्य ऊंचे रखने हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत लगा देनी है.
आज भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है. हमारे लिए रिफॉर्म कोई कंपल्शन नहीं है, रिफॉर्म हमारा कनविक्शन है और देश भी निरंतर रिफॉर्म्स को सपोर्ट कर रहा है.
देशवासियों की सहभागिता ही हमारी बहुत बड़ी शक्ति है. यह 12 वर्ष सरकार और समाज की सहभागिता का उत्सव मनाने वाले रहे हैं. बीते 12 वर्षों में मैंने जो भी सहयोग देश से मांगा, देशवासियों ने दिल खोलकर साथ दिया है. मैंने स्वच्छता का आग्रह किया तो पूरा देश निकल पड़ा, मैंने देश से डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए आह्वान किया तो भारत रियल टाइम ट्रांजैक्शन में दुनिया में सबसे आगे निकल गया, मैंने कोरोना महामारी के दौरान एकजुटता का, संयम का आग्रह किया तो देश ने एकजुट होकर उस महामारी का सामना किया. जनता ने कभी हमें निराश नहीं किया.
आने वाले समय में भी इसी जन विश्वास और जन भागीदारी के साथ हमें आगे बढ़ना है. ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’, यह हमारा मंत्र रहा है. सबका प्रयास ही विकसित भारत के निर्माण की असली ऊर्जा है. हमें हर राज्य, हर शहर, हर गांव को जोड़ना है. अब समय आ गया है कि राज्यों के बीच नई प्रकार की तंदुरुस्त स्पर्धा, स्वस्थ स्पर्धा हो. स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा राज्य सबसे तेजी से ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनता है, स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा शहर इनोवेशन का सबसे बड़ा केंद्र बनता है, स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा क्षेत्र रोजगार सृजन में सबसे आगे निकलता है. भारत की प्रगति राज्यों की ऐसी प्रगति से ही होने वाली है.
आइए, अगले दशक को उपलब्धियों के साथ-साथ श्रेष्ठता का भी दशक बनाएं. आइए, राजनीति की स्पर्धा से ऊपर उठकर विकास की स्पर्धा को राष्ट्रीय संस्कार बनाएं. 12 वर्षों की यात्रा उपलब्धियों की रही है, आने वाले वर्ष और भी नई सिद्धियों के होंगे, और भी बड़ी सिद्धियों के होंगे. इसी विश्वास के साथ आप सभी का मैं फिर से अंतःकरण पूर्वक आपके साथ, सहयोग, समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूं.
मैं सर झुका करके देश के कोटि-कोटि नागरिकों को नमन करता हूं, उनके आशीर्वाद ने हमें ऊर्जा दी है, शक्ति दी है, प्रेरणा दी है, प्रोत्साहन दिया है. ये जनता जनार्दन के चरणों में सर झुका के प्रणाम करते हुए, आइए एक नए विश्वास के साथ हर संकल्प को पूरा करने के सामर्थ्य को जुटाते हुए हम चल पड़ें. देशवासियों के सपनों को हमारे संकल्प बनाएं. हमारा पल-पल देशवासियों के संकल्पों को साकार करने की यात्रा का अहम पड़ाव बनता चले, इसी भावना के साथ देशवासियों के ऊपर पूरा भरोसा करते हुए आओ निकल पड़ें. बहुत-बहुत धन्यवाद.
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