रांची, वरीय संवाददाता। सावन महीना में देवाधिदेव महादेव को अर्पित रुद्राभिषेक अनुष्ठान का विशेष महत्व है। यह काफी पुण्यदायी के साथ सर्वपाप से छुटकारा दिलाने का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। मनवांछित फल देने वाला यह अनुष्ठान अब मंदिरों के साथ साथ निजी रूप से घरों में भी कराने का प्रचलन बढ़ रहा है। श्रद्धालु अपने घर में पुरोहित बुलाकर सभी जरूरी पूजा सामग्रियों के साथ अनुष्ठान कर महादेव का अभिषेक कर रहे हैं। वहीं, पहाड़ी मंदिर के साथ-साथ राजधानी के सभी शिवालयों में भी रुद्राभिषेक कराने की व्यवस्था है, जहां निर्धारित दक्षिणा देकर इस अनुष्ठान को कराया जाता है। पहाड़ी मंदिर, सुरेश्वर महादेव मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, हिनू शिवालय समेत शहर के सभी शिवालयों में ये अनुष्ठान होते हैं। जिन मंदिरों में शिवलिंग की स्थापना है, वहां भी यह अनुष्ठान किया जाता है।
मंदिरों में बाबा की शृंगार पूजा के लिए 601 रुपए, रुद्राभिषेक 601 रुपए, सोमवार को शृंगार के लिए 1101 रुपए, सोमवार को रुद्राभिषेक के लिए 1101 रुपए निर्धारित है। अलग-अलग मंदिरों में पूजा की व्यवस्था है। वहीं घरों में इस अनुष्ठान को कराना अपेक्षाकृत महंगा है। इसमें पूजा सामग्रियां, फल, नैवेद्य और अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, मधु, फलों का रस, गंगाजल आदि की व्यवस्था की जाती है। इसमें पूरे विधान के साथ पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर रुद्राभिषेक का संपूर्ण अनुष्ठान किया जाता है। इसमें आठ से दस हजार रुपए तक खर्च अनुमानित है।
रुद्राभिषेक का अनुष्ठान मुख्य रूप से विशेष तिथि शिववास के साथ नागपंचमी के दिन करने का विधान है। इसके साथ ही इसमें सर्वार्थ सिद्धि, अमृतयोग और सिद्धियोग आदि का मुहूर्त भी महत्वपूर्ण होता है। आचार्य पंडित रामदेव पाण्डेय ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में रुद्राभिषेक का अनुष्ठान बहुत ही महत्वपूर्ण है। सभी वांछित मनोकामना पूर्ण करने वाले रुद्राभिषेक अनुष्ठान में पहले शिव परिवार की पूजा की जाती है। सबसे पहले गणपति, माता गौरा, भगवान कार्तिकेय और सबसे अंत में नंदी की पूजा की जाती है। इसमें भांग और धतूरा केवल भगवान शिव को अर्पित करने का विधान है। फिर 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण कर मंत्रोच्चारण के बीच जल, दूध, घी, शहद, फलों के रस, मिश्री, दही, गंगाजल से बारी-बारी अभिषेक किया जाता है। हर अभिषेक के बाद जल से भी अभिषेक किया जाता है।
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