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वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे दिमाग की एक्टिविटी को टैटू बताएगा. ये टैटू आपके सिर के स्कैल्प यानी स्किन पर बनाया जाएगा. यह इलेक्ट्रॉनिक टैटू है. वैसे यह टैटू अस्थाई होगा. यह टैटू EEG यानी इलेक्ट्रोइन्सैफ्लोग्राम की तरह काम करेगा.
इससे दिमाग को स्कैन करना आसान हो जाएगा. इसकी मदद से न्यूरोलॉजिकल कंडिशंस जैसे- सीजर्स, एपिलेप्सी, ब्रेन ट्यूमर्स की जांच की जा सकेगी. आमतौर पर EEG टेस्ट के दौरान स्केल और पेंसिल से इंसान के सिर पर मार्किंग करते हैं. इसके बाद उसके ऊपर इलेक्ट्रोड्स चिपकाते हैं. फिर इलेक्ट्रोड्स को तारों से जोड़ा जाता है.
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ये तार EEG मशीन से जुड़े होते हैं. इसके बाद वो दिमाग की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते हैं. या फिर इलेक्ट्रोड्स की एक टोपी इंसान के सिर पर सीधे पहना दी जाती है. यह एक समय लेने वाली और बेहद असहज प्रक्रिया होती है. इसलिए नई तकनीक बनाई गई. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के इंजीनियरिंग प्रोफेसर नांशू लू ने इसे विकसित किया है.
ऐसे काम करेगा इलेक्ट्रॉनिक टैटू
इस तकनीक से इंसान के सिर पर एक रोबोट टैटू बनाएगा. ये टैटू जिस मटेरियल से तैयार किया जाएगा वह एक कंडक्टिव मटेरियल है. यानी दिमाग की इलेक्ट्रॉनिक तरंगों को पकड़ने वाला. इसके बाद उसे तारों से जोड़ दिया जाएगा. जिसके जरिए EEG इंसान के दिमाग की स्टडी करेगा. इस काम में मात्र 20 मिनट लगेंगे. ये टैटू कुछ ही देर में सूख जाएगा. यह टैटू करीब 300 मिलिमीटर मोटा होगा. यह सामान्य इलेक्ट्रोड्स की तरह की काम करेगा.
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शैंपू से धोकर साफ किया जा सकता है
इस तकनीक के बारे में नई रिपोर्ट 2 दिसंबर 2024 को सेल बायोमटेरियल्स जर्नल में छपी है. जिसमें कम बाल वाले पांच लोगों के ऊपर यह तकनीक अपना कर देखी गई. ये टैटू दिमाग की तरंगों को पकड़ने में सामान्य इलेक्ट्रोड्स की तरह ही बेहतर हैं. जब दिमाग की स्कैनिंग हो जाए उसके बाद इन्हें पोछकर हटाया जा सकता है. या फिर शैंपू से धोया जा सकता है. जबकि सामान्य इलेक्ट्रोड्स में लगने वाला ग्लू आसानी से सिर से नहीं निकलता.
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