कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अगले महीने 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान शुरू करेगी, जिसके तहत आम लोगों से सीधा संवाद किया जाएगा। संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस …और पढ़ें
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके (File Photo)
सीजेपी अगले महीने ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करेगी।
अभिजीत दीपके ने सीजेपी को प्रेशर ग्रुप बताया, चुनाव में नहीं।
संगठन में आंतरिक मतभेद, दीपके पर पद बांटने के आरोप।
राज्य ब्यूरो, मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि उनका संगठन अगले महीने देशव्यापी ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करेगा।
इसके जरिये सीजेपी देश के विभिन्न राज्यों में जाकर आम लोगों से सीधे संवाद करेगी और उनकी जमीनी समस्याओं को समझने का प्रयास करेगी। दीपके ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सीजेपी को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराने या चुनावी राजनीति में उतरने की कोई योजना नहीं है।
बुधवार को छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दीपके ने कहा कि सीजेपी एक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करती रहेगी। उनका कहना था कि संगठन का उद्देश्य जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना और सरकारों तथा संस्थाओं को जवाबदेह बनाना है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था, मीडिया, न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी प्रमुख संस्थाओं पर लोगों का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। उनके अनुसार लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब सभी संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्ष और जवाबदेह ढंग से काम करें।
निर्वाचन आयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लोगों में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, लेकिन अब ऐसी स्थिति बन रही है कि सरकार ही यह तय करने लगी है कि मतदान कौन करेगा। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी।
सीजेपी संस्थापक ने हाल के छात्र आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के आंदोलन और जनता के बढ़ते दबाव के कारण ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों ने आम लोगों के भीतर व्याप्त भय का माहौल तोड़ा है और नागरिक अब अपने अधिकारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए खुलकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के दौरान सीजेपी देशभर में लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को एकत्र करेगी। इसके आधार पर संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।
हालांकि दूसरी ओर सीजेपी के भीतर दरारें पड़नी भी शुरू हो गई हैं। दीपके के घर पर सीजेपी की बैठक के दौरान ही सीजेपी के स्वयंसेवकों ने उनके घर के ठीक बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठियों का सामना हमें करना पड़ा, जबकि दीपके ने सीजेपी में सभी पद अपने दोस्तों को सौंप दिए हैं। वे मांग कर रहे हैं कि अभिजीत दिपके पहले अपने मित्रों को प्रवक्ता पदों से हटाएं , उसके बाद ही कोई बैठक होनी चाहिए।
प्रेट्र के अनुसार, सीजेपी ने गुरुवार को अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन किया। इसमें संस्थापक अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया गया। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका इस संगठन के सह-संयोजक होंगे। सीजेपी ने अजीत शिंदे को संगठन का राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया जबकि दीपक बालियान को सह-प्रभारी बनाया गया।
इसके अलावा आफरीन नवाज को राष्ट्रीय सचिव, विजय रेड्डी मल्लंगी को मीडिया प्रमुख, रत्ना सिंह को कानूनी मामलों की प्रमुख, वैष्णवी गौर को अनुसंधान और नीति प्रमुख, रोहन देशपांडे को प्रौद्योगिकी प्रमुख और योगेश इंगले को वित्त प्रमुख बनाया गया।