अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) ने प्रशांत महासागर का तापमान 2 डिग्री बढ़ने पर 'सुपर अल नीनो' का गंभीर अलर्ट जारी किया है, जिसके 1950 के बाद सबसे शक्तिशाली होने की 69% संभावना है।
सुपर ‘अल नीनो’ का खतरा (एआई से बनाई गई तस्वीर)
प्रशांत महासागर का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा, ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा।
यह 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बन सकता है।
भारत पर अल नीनो का असर मानसून की विदाई के बाद दिखेगा।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) ने पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा और गंभीर अलर्ट जारी किया है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ चुका है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल के अंत तक यह 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बन सकता है। इसके पिछले 75 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ने की 69% संभावना है, जिससे पूरी दुनिया में भीषण गर्मी और सूखे का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
गौर करने वाली बात यह है कि, जहां एक तरफ दुनिया भर में इस खबर से चिंता का माहौल है, लेकिन भारत के लिए फिलहाल थोड़ी राहत की खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान प्रशांत महासागर में होने वाले इन बदलावों और तापीय तरंगों को भारत तक पहुंचने में 40 से 45 दिन का समय लगता है।
ऐसे में इस देरी के कारण, जब तक अल नीनो का असर भारत पहुंचेगा, तब तक देश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी होगी। इसके अलावा, हिंद महासागर के ‘पॉजिटिव IOD’ (इंडियन ओशन डायपोल) के सक्रिय रहने से भी भारत को बड़े नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है।
बता दें कि 1 जून से 13 अगस्त के बीच देश में सामान्य से 12% कम बारिश दर्ज की गई है। जून के महीने में बारिश में 35.4% की भारी कमी आई थी, हालांकि जुलाई में स्थिति में सुधार हुआ और बारिश सामान्य के करीब रही।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त और सितंबर के महीनों में भी सामान्य से कम बारिश हो सकती है। भले ही मानसून के समय बड़ा खतरा टल जाए, लेकिन अल नीनो के प्रभाव से आने वाले समय में सर्दियों की बारिश में कमी जरूर आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कृषि और जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ‘सुपर अल नीनो’ न सिर्फ मौसम का मिजाज बिगाड़ेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाम ऑयल और चावल के उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है, जिससे पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजें और खाद्य तेल रिकॉर्ड स्तर पर महंगे हो सकते हैं।
अल नीनो का सबसे पहला असर प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से पर पड़ता है। अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई मौसम विभागों ने चेतावनी दी है कि इंडोनेशिया, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया में बारिश में भारी गिरावट आएगी, जिससे वहां भीषण सूखा पड़ेगा और जंगलों में भयंकर आग लगने का खतरा बढ़ जाएगा।
अल नीनो वाले साल वैसे भी दुनिया के सबसे गर्म साल माने जाते हैं। 2026-27 के दौरान महासागरों से निकलने वाली भारी-भरकम ऊर्जा के कारण ग्लोबल वार्मिंग और गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं।