सुहागिनों ने रखा सोमवती अमावस्या का व्रत, पीपल की पूजा कर पति की दीर्घायु के लिए बांधी भंवरी – Jagran

Women Fasting Bihar: मुजफ्फरपुर के साहेबगंज में सुहागिन महिलाओं ने सोमवती अमावस्या का व्रत रखा। उन्होंने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के ल …और पढ़ें
साहेबगंज में सोमवती आमावस्या के दौरान पीपल की पूजा करतीं महिला। फोटो: जागरण
संवाद सहयोगी, साहेबगंज (मुजफ्फरपुर)। Somvati Amavasya Vrat: जिले के साहेबगंज प्रखंड और आसपास के इलाकों में सोमवार को सोमवती अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
सुहागिन महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और पति की लंबी आयु के लिए पारंपरिक सोमवती अमावस्या का व्रत रखा। इस वर्ष अमावस्या तिथि सुबह 8 बजे तक ही सीमित होने के कारण तड़के सुबह से ही पूजा स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
पारंपरिक वेशभूषा और सोलह शृंगार में सजी महिलाएं टोकरियों में फल, फूल, धूप, दीप और रक्षा सूत्र लेकर नजदीकी पीपल वृक्षों के पास पहुंचने लगी थीं।
श्रद्धालु महिलाओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पीपल वृक्ष की जड़ों में जल अर्पित किया। इसके बाद भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवाधिदेव महादेव का स्मरण करते हुए वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा (भंवरी देना) की।
महिलाओं ने पीपल देव को रक्षा सूत्र बांधकर दीप जलाए और सुखद दांपत्य जीवन की कामना की।स्थानीय व्रती महिलाओं ने बताया कि हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का अत्यधिक महत्व है।
इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार जब कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानी अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्र देव को समर्पित है, जबकि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव माने जाते हैं।
यही वजह है कि इस दिन शिव जी, माता पार्वती और पितरों की त्रिवेणी पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और विशेष रूप से पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने से जीवन के सभी कष्टों का नाश होता है।
इस बार कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या सोमवार को आने से कई दुर्लभ और अत्यंत फलदायी संयोग लेकर आई थी:
सर्वार्थ सिद्धि और सुकर्मा योग: इस बार ग्रहों की स्थिति बेहद कल्याणकारी रही। सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अनूठा मेल होने के कारण इस दिन किए गए व्रत, तर्पण और दान के फल से कभी नष्ट नहीं होता है।
महाकाल-महाकाली का दुर्लभ मेल: सोमवार शिव का दिन है और अमावस्या की रात शक्ति (काली) की मानी जाती है। यह संयोग मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
पितृ दोष से मुक्ति का महासंयोग: सूर्य और चंद्रमा के मित्र राशियों में गोचर करने के कारण, कुंडली के पितृ दोष या कालसर्प दोष के प्रभाव को शांत करने के लिए आज का दिन अचूक माना गया।
धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या का व्रत रखने और पीपल की पूजा करने से भक्तों को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं:
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: सुहागिन स्त्रियों द्वारा इस दिन पीपल (जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है) की 108 बार परिक्रमा करने से पति को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।
दरिद्रता का नाश और लक्ष्मी कृपा: इस दिन तुलसी और पीपल के समीप घी का दीपक जलाने तथा जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान करने से घर की आर्थिक तंगी दूर होती है।
मानसिक तनाव और चंद्र दोष से राहत: जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, उनके लिए इस दिन शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करना मानसिक शांति और अवसाद से मुक्ति देने वाला साबित होता है।

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News