सोनौली (महराजगंज), हिन्दुस्तान संवाद। नेपाल में आई भीषण बाढ़ व भूस्खलन के बाद सड़क व पुलों के क्षतिग्रस्त होने से भारत-नेपाल सीमा पर वाहनों की आवाजाही का रुख बदल गया है। सोनौली सीमा से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों के वाहनों में करीब 80 फीसद की कमी आई है, जबकि जरूरी सामान की बढ़ती मांग के कारण मालवाहक वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। पिछले पांच दिनों से रोज करीब 300 मालवाहक वाहन नेपाल में प्रवेश कर रहे हैं। जलप्रलय से पहले सोनौली सीमा से प्रतिदिन करीब 200 छोटी कारें व 50 से 60 बसें भारतीय पर्यटकों को लेकर नेपाल जाती थीं। आपदा के बाद पर्यटकों के वाहनों की संख्या घटकर करीब 20 फीसद रह गई है। इससे सोनौली से लेकर नेपाल के पर्यटन कारोबार तक असर पड़ रहा है。
बाढ़ व भूस्खलन से नेपाल के प्रमुख मार्गों व पुलों को नुकसान पहुंचने से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। चीन से आने वाले सामान की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ काठमांडू से तराई क्षेत्र में भी पर्याप्त सामान नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में नेपाल के तराई क्षेत्रों में भारत से आने वाले जरूरी सामानों की मांग बढ़ गई है। पेट्रोल-डीजल, एलपीजी गैस, चावल, गेहूं व अन्य खाद्य सामग्री, दवाइयां, वाहन व ऑटो पार्ट्स, लोहा-स्टील, सीमेंट, मशीनरी, बिजली उपकरण व कृषि संबंधी सामानों की मांग बढ़ी है। इसका असर सोनौली सीमा पर मालवाहक वाहनों की बढ़ती आवाजाही के रूप में दिखाई दे रहा है।
मुख्य राजमार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण नेपाल में वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी मालवाहक गाड़ियों के जरिए तराई क्षेत्र से जरूरी सामान काठमांडू व आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन्हीं वैकल्पिक मार्गों से यात्रियों की आवाजाही भी हो रही है।
कस्टम प्रमुख, बेलहिया, नेपाल हरिहर पौडेल का कहना है कि पिछले पांच दिन से करीब 300 मालवाहक वाहन प्रतिदिन नेपाल में प्रवेश कर रहे हैं। इनमें कुछ खाली ट्रक भी शामिल हैं, जो नेपाल से माल लेकर भारत लौटते हैं। जलप्रलय के बाद भारतीय पर्यटकों के वाहनों की संख्या में करीब 80 फीसद की कमी आई है।
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