सिटी रिपोर्टर | दरभंगा
गांधी जयंती एवं हिंदी पखवाड़ा समापन के अवसर पर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय असराहा में राष्ट्रीय हिंदी विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। “समकालीन भारत में हिंदी : संभावनाएं, चुनौतियां और भविष्य” विषय पर आयोजित गोष्ठी में शिक्षाविदों, हिंदी साहित्य के अध्येताओं और शिक्षकों ने हिंदी की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार रखे। लनामिविवि के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. उमेश कुमार उत्पल ने हिंदी की बदलती स्थिति और स्वरूप पर गंभीर अध्ययन की आवश्यकता बताई। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मिथिला पेंटिंग, सिक्की और गोदना कला जैसी स्थानीय कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार ने किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता जेएन कॉलेज, नेहरा के सहायक प्राध्यापक डॉ. विक्रम कुमार ने आदिकाल से वर्तमान तक हिंदी की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। केएस कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक विषयों की पुस्तकों के हिंदी में प्रकाशन की आवश्यकता बताई। पीजीटी रसायन विज्ञान डॉ. मनोरंजन कुमार ने कहा कि हिंदी का विकास केवल हिंदी शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी हिंदीभाषियों का दायित्व है। रेखा कुमारी ने अतिथियों एवं वक्ताओं के प्रति आभार जताया। धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य डॉ. मोहम्मद वलीउल्लाह ने किया।
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