श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की राष्ट्रभाषा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम के प्रचारमंत्री हरेराम वाजपेयी ने विश्व हिंदी दिवस की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया।
कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा की महत्ता को रेखांकित किया। अरविंद जोशी ने विज्ञापनों में हिंदी के गलत प्रयोग पर व्यंग्य किया, जबकि प्रदीप नवीन ने अंग्रेजी के प्रति लोगों के मोह पर कटाक्ष किया। सुषमा शुक्ला और सुनीता अग्रवाल ने हिंदी की महिमा पर रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में डॉ. वसुधा गाडगिल, अंतरा करवड़े, संतोष मोहंती, माधवी तारे, डॉ. दीप्ति गुप्ता समेत कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने हिंदी भाषा पर अपने विचार रखे। सुरेखा सिसौदिया की कविता ‘हिंदी विश्व का गहना’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री घनश्याम यादव की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें 20 प्रतिशत की विशेष छूट दी गई। कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ कवि सदाशिव कौतुक के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
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