हिसुआ के पांचू गढ़ स्थित वार्ड संख्या-6 में रविवार को साहित्यिक संस्था “शब्द साधक” के तत्वावधान में हिंदी-मगही कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोत
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश पांडे ‘दिन बंधु’ ने की, जबकि मंच संचालन चर्चित कवि उदय भारती ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन वीणा मिश्रा, प्रोफेसर गणेश शर्मा और पेंशन समाज के ललित किशोर पांडे ने दीप प्रज्वलित कर किया।
हास्य, देशप्रेम और सामाजिक सरोकारों से सजी कविताएं
कवि सम्मेलन में कवियों ने हास्य-व्यंग्य, देशभक्ति, सामाजिक मुद्दों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। जहानाबाद से आए कवियों ने अपनी गजल और गीतों से माहौल को संगीतमय बना दिया। हास्य रचनाओं पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए, जबकि गंभीर कविताओं ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कई जिलों के कवियों ने दी प्रस्तुति
कार्यक्रम में वीणा मिश्रा, गौतम सरगम, उत्पल भारद्वाज, रितेश कपूर, सुधाकर राजेंद्र, हिमांशु शेखर, ऋचा झा, विश्वजीत अलबेला, गौतम पराशर, सनी कश्यप, शैलेंद्र शैल और अरविंद अजांश सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा।
बड़ी संख्या में जुटे साहित्य प्रेमी
कवि सम्मेलन में ओमकार कश्यप, युगल किशोर, राम दयानंद प्रसाद गुप्ता, उज्जवल भारद्वाज, कृष्ण कुमार भट्ट, श्याम सुंदर कुमार, आलोक कुमार, प्रवीण कुमार पंकज, धर्मेंद्र, अविनाश कुमार और सुजीत कुमार गौतम समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का अंगवस्त्र और पुष्प भेंट कर स्वागत किया गया।
हिंदी हमारी अस्मिता की पहचान: दिनेश पांडे
अध्यक्षीय संबोधन में दिनेश पांडे ‘दिन बंधु’ ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने हिंदी के सम्मान और उसके प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि भाषा का मान बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक एवं मंच संचालक उदय भारती ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कवि सम्मेलन देर तक साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल में संपन्न हुआ।
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.