Feedback
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली. मरने वालों में भारतीयों के साथ विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो इलाज के लिए दिल्ली आए थे. वे सभी होटल में ठहरे हुए थे. बुधवार सुबह जब होटल से धुएं का काला गुबार उठा, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर में यह मौत के जाल में बदल जाएगा.
खिड़कियों से लटकते लोग, पाइप पकड़कर नीचे उतरने की कोशिश करती महिलाएं, तीसरी मंजिल से बच्चे को सीने से लगाकर छलांग लगाती मां, गली में बिछाए गए गद्दे और चारों तरफ मची चीख-पुकार ने पूरे इलाके को दहला दिया. आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग धुएं के कारण बेहोश हो गए और कुछ को यह तक नहीं पता था कि बाहर निकलने का रास्ता कहां है.
इस मामले की जांच के लिए कई एजेंसियों को लगाया गया है. दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम भी इस मामले की जांच कर रही है. इस भयावह घटना के बाद फरार चल रहे होटल मालिक लवकेश बजाज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. उससे पूछताछ की जा रही है. इससे पहले पुलिस ने लवकेश और उसकी पत्नी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया था. उसकी तलाश में लगातार दबिश जारी थी.
इस हादसे के कई घंटे बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यालय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया गया, जिसमें जांच और कार्यवाही की बात कही गई. इसमें लिखा गया, ”मालवीय नगर में लगी आग में हुई गलतियों की पूरी गंभीरता से जांच की जाएगी. जो भी जिम्मेदार होगा, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. प्रॉपर्टी के मालिक के खिलाफ मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं.”
The lapses that culminated in the tragic fire at a guest house in Malviya Nagar will be examined with utmost seriousness, and accountability will be fixed wherever it lies.
A Magisterial Inquiry has been ordered and an FIR has been registered against the owner of the property.…
इसके साथ ही दिल्ली में गैर-कानूनी प्रॉपर्टी, बिना इजाजत वाले गेस्ट हाउस, फायर सेफ्टी नियमों और बिल्डिंग बाय-लॉज का उल्लंघन करके चल रही जगहों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है. ऐसी जगहों को सील करके मुकदमा चलाया जाएगा. इसके साथ ही दिल्ली के LG ने सभी होटलों, नर्सिंग होम में फायर सेफ्टी नियमों की जांच के लिए महीने भर चलने वाली ड्राइव का आदेश दिया है.
लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधू ने संबंधित विभागों के साथ एक मीटिंग की है. उनको 4 जून से फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन करने की जांच के लिए ड्राइव शुरू करने का निर्देश दिया है. एक अधिकारी ने कहा, “सभी होटल, लॉज, सराय, नर्सिंग होम, कोचिंग इंस्टीट्यूट, रेस्टोरेंट और दूसरी कमजोर कमर्शियल जगहों को कवर किया जाएगा. जहां भी खामी मिलेगी, उसे बंद कर दिया जाएगा.”
बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह को घटनास्थल पर भेजा. विदेश राज्य मंत्री ने पीड़ितों से मुलाकात की है. इसके साथ ही सुनिश्चित किया है कि उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. उन्होंने घायलों की विशेष मेडिकल जरूरतों को लेकर भी चिंता जताई है.
सतीश उपाध्याय ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिकों के पार्थिव शरीरों को उनके देशों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है. इसके अलावा, लेबनान, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल सहित संबंधित देशों के दूतावासों से आवश्यक जानकारी एकत्र किए गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय इस पूरे मामले को पूरी संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और गंभीरता के साथ संभाल रहा है.
हादसे की वजह: चिंगारी बनी मौत का शोला
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग इमारत के बेसमेंट में संचालित बीएनबी रेस्टोरेंट से शुरू हुई. कुछ ही मिनटों में आग ने ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, होटल के भीतर धुएं का घनत्व इतना ज्यादा था कि लोग रास्ता नहीं खोज पा रहे थे. जांच के दायरे में यह भी है कि बेसमेंट में चल रहा रेस्टोरेंट वैध था या नहीं. उसे फायर सेफ्टी मंजूरी मिली थी या नहीं.
स्थानीय लोगों का दावा है कि रेस्टोरेंट बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रहा था. आरोप है कि बेसमेंट में मौजूद चैनल गेट बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था. फायर ब्रिगेड को लोगों तक पहुंचने के लिए कटर मंगाकर गेट काटना पड़ा. होटल में सबसे बड़ी समस्या निकास व्यवस्था को लेकर सामने आई. आने-जाने के लिए केवल एक रास्ता था. कोई वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट नहीं था.
हादसे के जिम्मेदार: जांच के घेरे में कौन-कौन?
इस मामले में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बिल्डिंग मालिक लवकेश बजाज, बीएनबी लाइसेंसधारी जय मिश्रा, एमसीडी के संबंधित अधिकारी, स्थानीय प्रशासन और निगरानी एजेंसियों की भूमिका जांच के दायरे में है. दस्तावेजों के अनुसार बेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस केवल छह कमरों और 18 लोगों के लिए था. लेकिन 25 कमरे संचालित थे.
आरोप है कि बिल्डिंग का निर्माण भी नियमों के अनुरूप नहीं था और वर्षों से विभिन्न विभागों की आंखों के सामने गतिविधियां चलती रहीं. इस हादसे के बाद दिल्ली पर्यटन विभाग, एमसीडी, फायर डिपार्टमेंट, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि छह कमरों के लाइसेंस पर 25 से अधिक कमरे कैसे संचालित हो रहे थे.
कहां हुई लापरवाही: कई स्तरों पर उठे सवाल
यदि बेसमेंट में रेस्टोरेंट अवैध था तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. यदि भवन में फायर सेफ्टी इंतजाम नहीं थे तो निरीक्षण के दौरान यह खामी क्यों नहीं पकड़ी गई. हादसे के दौरान यह भी सामने आया कि संकरी गलियों और बिजली के लटकते तारों ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और मुश्किल बना दिया. इतनी घनी आबादी वाले इलाके में इस प्रकार का व्यावसायिक संचालन अपने आप में जोखिम भरा था.
जब आग लगी तो सबसे पहले स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे. हौज रानी गांव और आसपास के युवकों ने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के लोगों की जान बचाने के लिए होटल में प्रवेश किया. कई युवकों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर लोगों को बाहर निकालने में मदद की. फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाने के साथ-साथ करीब 40 लोगों का रेस्क्यू किया. बेसमेंट में फंसे लोगों को निकाला.
राहत-बचाव में किसने क्या भूमिका अदा की है
दिल्ली पुलिस के कई जवान भी लगातार धुएं से भरे कमरों में जाकर लोगों को बाहर निकालते रहे. इस दौरान करीब 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए. कुछ पुलिसकर्मियों को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. दिल्ली की आपातकालीन चिकित्सा सेवा CATS 102 की टीम ने घायलों को विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाया. मैक्स समेत कई अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कराया गया.
घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि अगर स्थानीय लोग शुरुआती समय में आगे नहीं आते तो मृतकों की संख्या और बढ़ सकती थी. हादसे की कवरेज के दौरान आजतक संवाददाता लगातार ग्राउंड से रिपोर्टिंग कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस और मीडिया के बीच कवरेज को लेकर बहस भी देखने को मिली. लगातार सवाल उठाए गए कि आखिर इतने बड़े स्तर की अनियमितताएं कैसे चलती रही.
सिर्फ जांच नहीं, सिस्टम में बदलाव जरूरी
मालवीय नगर अग्निकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या व्यावसायिक भवन में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, इमरजेंसी एग्जिट, फायर ऑडिट और नियमित निरीक्षण केवल औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि जीवन रक्षक व्यवस्थाएं हैं. सभी होटल और गेस्ट हाउस का स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए. बेसमेंट में चल रही गतिविधियों की नियमित जांच होनी चाहिए.
क्षमता से अधिक कमरों के संचालन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही आपातकालीन निकास मार्ग को हर व्यावसायिक भवन में अनिवार्य बनाया जाना चाहिए. मालवीय नगर का यह अग्निकांड सिर्फ 21 मौतों की कहानी नहीं है. यह उस व्यवस्था का आईना है जिसमें हादसे के बाद कार्रवाई होती है, लेकिन हादसे को रोकने वाली निगरानी अक्सर नदारद रहती है. लापरवाही ने 21 जिंदगियों को राख कर दिया.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू