Hormuz Oil losses: ईरान-अमेरिका और इजरायल युद्ध, होर्मुज ब्लाकेज के चलते दुनिया को बड़ा झटका लगा है. पिछले चार महीनों में महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (जहां से दुनिया की 20 फीसदी तेल की सप्लाई होती है) से न के बराबर तेल गुजरा है. इससे दुनिया का ऑयल रिजर्व संकटग्रस्त हो चुका है. अब एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि युद्ध के दौरान दुनिया में कुल मिलाकर 1.15 अरब बैरल तेल की सप्लाई कम हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षति को पूरा करने में कम से कम एक साल का वक्त लगेगा. आइये जानते हैं इसके 3 बड़े कारण.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) ने ये रिपोर्ट जारी की है. इसमें बताया गया है कि करीब चार महीनों से मध्य पूर्व से तेल नहीं आ रहा है. होर्मुज खुलने के बाद भी तेल बाजार मुश्किल हालात में है. तेजी से ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है जहां सब कुछ चरमरा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पहला कारण यह है कि जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटानी होंगी. दूसरा कारण, खाली टैंकरों को उस इलाके यानी होर्मुज में वापस लाना होगा. तीसका कारण, उत्पादन फिर से युद्ध से पहले के स्तर पर शुरू करना होगा, जिसमें वक्त लगेगा क्योंकि ईरान से लेकर कुवैत और यूएआई तक की ऑयल रिफाइनरियों को युद्ध में काफी नुकसान पहुंचा है.
जैसा कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का अनुमान है, ग्लोबल ऑयल मार्केट ग्राहकों की मांग से लगभग 5 मिलियन बैरल ज़्यादा तेल का उत्पादन शुरू कर दे तो भी खोई हुई 1.15 बिलियन बैरल सप्लाई को वापस पाने में लगभग एक साल लग जाएगा.
तेल रिजर्व, बाजार को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए धीमी यात्रा शुरू करनी होगी. इनमें से कोई भी काम जल्दी नहीं होगा. तेल उद्योग का मानना है कि तेल की सप्लाई को “सामान्य” स्थिति के करीब लाने में महीनों लग सकते हैं. जब तक तेल बाज़ार पूरी तरह से सामान्य स्थिति के करीब नहीं पहुंच जाता, तब तक सिस्टम उन्हीं जमा किए गए स्टॉक पर निर्भर रहेगा.
इंटरनेशनल एनर्जी एडमिनिस्ट्रेशन का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व 1990 के बाद से सबसे निचले स्तर पर है. अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है. कमर्शियल स्टॉक भी ऑपरेशनल तनाव वाले स्तर पर हैं.
वर्साय में G7 समिट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, क्या आप अफरा-तफरी देखना चाहते हैं? हमारे रिजर्व लगभग चार हफ़्तों में खत्म हो जाएंगे.
तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं. इस कारण यह है कि इस हफ्ते जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से शायद फारस की खाड़ी से इतनी तेज़ी से तेल न निकल पाए कि कच्चे तेल का स्टॉक पूरी तरह खत्म होने से बच सके.
तेल बाज़ार का मानना है कि ट्रंप का युद्धविराम की घोषणा का समय एकदम सही था. अप्रैल के मध्य में के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरनी शुरू हुईं. हाल के दिनों में फिर कीमतें तेज़ी से गिरी हैं क्योंकि ईरान के साथ समझौता आकार ले रहा था और लागू हो रहा था. युद्ध के समय की सबसे ज़्यादा कीमत 126.41 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर आज 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं
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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं … और पढ़ें
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