होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान तट पर कमर्शियल जहाजों पर हुए अमेरिकी हमले ने न सिर्फ तीन भारतीयों की जान ले ली, बल्कि पूरे देश में गुस्सा और सियासी हलचल भी तेज कर दी है. इस हमले में एमटी सेटेबेलो जहाज पर सवार डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश की मौत हो गई. इन मौतों ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. कहीं रोने की आवाजें हैं, कहीं सवालों की गूंज.
देवरिया के रहने वाले शिवानंद चौरसिया ने हमले से ठीक पहले अपनी पत्नी से आखिरी बार बात की थी, लेकिन इसके बाद उनका संपर्क टूट गया और अब वह कभी वापस नहीं आएंगे. हिमाचल के हमीरपुर के 23 वर्षीय आदित्य शर्मा के घर में भी मातम पसरा है. परिवार को यकीन ही नहीं हो रहा कि इतनी कम उम्र में उनका बेटा उनसे हमेशा के लिए छिन गया. वहीं पटनाला सुरेश, जो जल्द ही अपनी शादी की 15वीं सालगिरह मनाने वाले थे, उनके सपने भी इस हमले के साथ ही खत्म हो गए.
मौत का कौन जिम्मेदार?
इन दर्दनाक घटनाओं के बीच अब सवाल उठ रहे हैं—आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या अमेरिका इस हमले की जिम्मेदारी लेगा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या एक कमर्शियल जहाज पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और इंसानियत के खिलाफ नहीं है? मृतकों के परिवार सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके प्रियजनों के शव जल्द से जल्द भारत लाए जाएं और उन्हें न्याय मिले.
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है और आरोप लगा रहा है कि सरकार अमेरिका के सामने खुलकर विरोध दर्ज नहीं करा रही. विपक्ष का कहना है कि विदेशी ताकत के हमले में भारतीयों की मौत हो गई और सरकार सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगातार हमलों में भारतीयों की मौत हो रही है, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से कोई सख्त प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
हालांकि, सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय ने इस मामले में कड़ा रुख दिखाते हुए अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मीक्स को 24 घंटे में दो बार तलब किया. भारत ने साफ कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और नाकेबंदी के नाम पर इस तरह के हमले स्वीकार्य नहीं हैं. सरकार ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
कई देशों के हितों का टकराव
इस घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिस ईरान पर अमेरिका हमले कर रहा है, उसी ईरान ने भारत के पक्ष में सहानुभूति जताई है. इससे साफ होता है कि यह मामला सिर्फ एक हमले का नहीं, बल्कि बड़े भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है, जिसमें कई देशों के हित टकरा रहे हैं.
यह घटना सिर्फ तीन भारतीयों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री सुरक्षा और भारत की कूटनीतिक ताकत की भी परीक्षा बन गई है. एक ओर जहां परिवार अपने अपनों के खोने का दुख झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की राजनीति में इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है. अब नजर इस बात पर है कि भारत सरकार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर किस तरह उठाती है और क्या दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सकेगा या नहीं.
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