Published By: Tanuja Joshi | Updated: Jul 15, 2026, 11:24 AM
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री व्यापार पर दिखाई दे रहा है. होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में तेल और गैस से भरे जहाज गुजरते हैं. इन जहाजों पर हजारों विदेशी नाविकों के साथ बड़ी संख्या में भारतीय भी काम करते हैं. हाल के हमलों में भारतीय नाविकों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद भारत सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लिया. लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिम को देखते हुए केंद्र ने सभी संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ बैठक कर नई रणनीति तैयार की. सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है.
सरकार ने फैसला किया है कि होर्मुज, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में मौजूद हर भारतीय नाविक की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी. इसके लिए एक स्पेशल डिजिटल ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें हर जहाज की लोकेशन, उसका मार्ग, चालक दल की संख्या, जहाज का मालिक, सुरक्षा स्तर और अगले गंतव्य जैसी जानकारी लगातार अपडेट होती रहेगी. इस व्यवस्था का मकसद किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत जानकारी जुटाना और राहत अभियान शुरू करना है. अधिकारियों का कहना है कि ये सिस्टम केवल भारतीय जहाजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी विदेशी जहाजों पर भी लागू होगा, जहां भारतीय नाविक काम कर रहे हैं. इससे सरकार हर समय अपने नागरिकों की स्थिति पर नजर रख सकेगी.
सरकार ने संकट के समय परिवारों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. अब अगर कोई भारतीय नाविक घायल होता है, लापता होता है या उसकी मौत हो जाती है, तो उसके परिवार के लिए एक विशेष संपर्क अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. यही अधिकारी परिवार और सरकार के बीच सीधा संवाद बनाए रखेगा. वो मेडिकल जानकारी, अस्पताल से जुड़े अपडेट, यात्रा दस्तावेज, स्वदेश वापसी, मुआवजा, बीमा, बकाया वेतन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में परिवार की मदद करेगा. इससे अलग-अलग कार्यालयों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिल सकेगी. सरकार का मकसद है कि संकट की घड़ी में कोई भी परिवार खुद को अकेला महसूस न करे.
नई सुरक्षा योजना के तहत केवल शिपिंग मंत्रालय ही नहीं, बल्कि विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, महानिदेशक शिपिंग, पेट्रोलियम मंत्रालय और पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय दूतावास भी मिलकर काम करेंगे. इन सभी एजेंसियों के बीच लगातार जानकारी साझा की जाएगी ताकि किसी भी जहाज पर खतरा बढ़ने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. दूतावास स्थानीय प्रशासन और बंदरगाह अधिकारियों से संपर्क बनाए रखेंगे, जबकि भारतीय नौसेना समुद्री गतिविधियों पर नजर रखेगी. इस संयुक्त व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में निर्णय लेने में देरी न होने देना है. सरकार का मानना है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से भारतीय नाविकों की सुरक्षा और ज्यादा मजबूत होगी.
सरकार ने निर्देश दिया है कि अब संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में जाने वाले हर जहाज का पहले सुरक्षा मूल्यांकन किया जाएगा. जहाज के कप्तान, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ और संबंधित प्राधिकरण मिलकर ये तय करेंगे कि मौजूदा परिस्थितियों में यात्रा सुरक्षित है या नहीं. अगर किसी मार्ग पर हमले या संघर्ष का खतरा ज्यादा होगा, तो जहाज को वैकल्पिक रास्ता अपनाने या यात्रा टालने की सलाह दी जा सकती है. इसके अलावा जहाजों को जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने और लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार चाहती है कि किसी भी भारतीय नाविक को अनावश्यक जोखिम में न डाला जाए और हर यात्रा पूरी तैयारी के बाद ही शुरू हो.
सरकार ने जहाज मालिकों, शिपिंग कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली एजेंसियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं. उनसे कहा गया है कि किसी भी भारतीय नाविक को खतरे वाले समुद्री क्षेत्र में भेजने से पहले पूरी सुरक्षा जानकारी दी जाए. नाविकों को संभावित जोखिम, आपातकालीन प्रक्रियाओं और उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों के बारे में साफ जानकारी मिलनी चाहिए. कंपनियों को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि जहाज पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, संचार व्यवस्था और मेडिकल सुविधाएं मौजूद हों. सरकार ने सभी कंपनियों से सुरक्षा नियमों के पालन की रिपोर्ट भी मांगी है. अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
भारत ने व्यापारी जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और अन्य वैश्विक मंचों पर उठाया है. सरकार का कहना है कि निहत्थे व्यापारी जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और सुरक्षित नौवहन के सिद्धांतों का उल्लंघन है. भारत ने संबंधित देशों और ध्वज प्रशासन से भी इस मुद्दे पर बातचीत की है। सरकार चाहती है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाएं. भारत का मानना है कि समुद्री व्यापार पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और किसी भी तरह का हमला केवल एक देश नहीं बल्कि पूरे वैश्विक व्यापार को प्रभावित करता है.
सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा संकट में उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके परिवारों की मदद है. हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जाएगी. अगर क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है, तो जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि किसी भी भारतीय नाविक को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और जरूरी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाएगी. 24X7 निगरानी, परिवारों के लिए विषेश अधिकारी, मंत्रालयों के बीच समन्वय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय पहल जैसे कदम इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जा सके.
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