सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई की है और आरोप लगाया है कि कंपनी ने फर्जी तरीके से 15.15 लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट दिखाया है. साथ ही सेबी ने इसके प्रमोटर, चेयरमैन को शेयर बाजार से बैन कर दिया है. इतना ही नहीं कंपनी के अंदर कई अनियमितताओं की भी जानकारी दी है.
सेबी के इस खबर के आने के बाद राजेश एक्सपोर्ट के शेयरों में 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया और इसके शेयर 104.65 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गए. हालांकि, अब कंपनी का बयान जारी हुआ है. कंपनी ने सेबी के आरोपों पर 5 सूत्रीय स्पष्टीकरण जारी किया है और सभी आरोपों का खंड़न किया है.
कंपनी ने कहा कि वह SEBI के अंतरिम आदेश के संबंध में मीडिया में आ रही सभी खबरों को खारिज करती है. राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि कंपनी जल्द ही एक अन्य स्पष्टीकरण भी जारी करेगी जो मीडिया में चल रही अनावश्यक अटकलों को स्पष्ट और समाप्त कर देगा. हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने एसईबीआई से 3 जून, 2026 की तारीख का अंतरिम आदेश स्वीकार कर लिया.
राजेश एक्सपोर्ट ने आरोपों पर क्या कहा?
एक अंतरिम आदेश में सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता को अपनी जांच पूरी होने तक शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है. इस अपडेट के बाद गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट के शेयर 5 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपये पर आ गए, जिससे कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 3,100 करोड़ रुपये से नीचे आ गया. दिसंबर 2025 में बने अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर से शेयर 56 फीसदी नीचे है.
सेबी का क्या है आरोप?
सेबी ने आरोप लगाया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के फाइनेंशियल डिटेल को लगातार सार्वजनिक न करके अपनी वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से पेश किया है. इन सहायक कंपनियों से कंपनी के कंसोलिडेट रेवेन्यू का लगभग 97-99 प्रतिशत हिस्सा आता है. नियामक ने कहा कि स्विट्जरलैंड बेस्ड वैलकैम्बी एसए को समूह की प्रमुख ऑपरेशन यूनिट के तौर पर दिखाया गया था, जबकि उसके ऑडिट किए गए फाइनेंशियल डिटेल में कोई रेवेन्यू नहीं दिखाया गया.
सेबी के अनुसार, इसके चलते वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2025 के बीच सहायक कंपनी के राजस्व का लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये, यानी 99.80 प्रतिशत, का कथित रूप से गलत विवरण दिया गया. सेबी ने एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 11,487 करोड़ रुपये की कथित बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद का भी जिक्र किया, जिसे कंपनी ने कथित तौर पर नकार दिया था.
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