113 साल पुराना, 672 टन का चर्च पहुंचा 5 किमी दूर, ऐसे हुआ नामुमकिन काम मुमकिन – AajTak

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सोचिए, अगर आपके शहर की शान, कोई ऐतिहासिक इमारत या, मंदिर, चर्च अचानक खतरे में पड़ जाए तो? कुछ ऐसा ही हुआ है उत्तरी स्वीडन के किरणा शहर में. यहां 113 साल पुराना मशहूर किरुना चर्च और उसका घंटाघर अब विशाल ट्रेलरों पर चढ़ाकर 5 किलोमीटर दूर नई जगह शिफ्ट किया गया. वजह है दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड आयरन ओरे (लौह अयस्क) खदान का विस्तार होना.
भारत में भी जब खनन परियोजनाओं का दायरा बढ़ता है तो आस-पास की बस्तियां उजड़ जाती हैं. ठीक वैसे ही यहां भी हुआ. खदान के नीचे की जमीन धंसने लगी, घरों और सड़कों में दरारें पड़ गईं. अब पूरे शहर को धीरे-धीरे नई जगह शिफ्ट किया जा रहा है, ताकि खदान 1,365 मीटर गहराई तक खनन कर सके और शहर सुरक्षित रहे.
जनता की धड़कन बना चर्च
किरुना चर्च को साल 2001 में स्वीडन की जनता ने 1950 से पहले बनी सबसे बेहतरीन इमारत चुना था. इसे सामी (स्थानीय आदिवासी समुदाय) की शैली में बनाया गया था, ताकि यहां के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान महसूस कर सकें. भारत में जैसे किसी किले, मंदिर या गुरुद्वारे की ऐतिहासिक अहमियत होती है, वैसे ही यह चर्च वहां के लोगों की आस्था और विरासत का प्रतीक है.
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दो दिन तक चलाचर्च का सफर
672 टन वजनी और 40 मीटर चौड़ा यह चर्च साधारण इमारत नहीं है. इसे शिफ्ट करने के लिए सड़कों को चौड़ा करना पड़ा, एक वायाडक्ट तोड़ना पड़ा और खास ट्रेलर बनाए गए. दो दिन तक यह चर्च ट्रेलरों पर सवार होकर धीरे-धीरे 0.5 से 1.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नई जगह पहुंचा.
भव्य आयोजन और लाइव प्रसारण
इस चर्च को शिफ्ट करने का काम सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय आयोजन बना दिया गया. स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ खुद मौजूद रहे. देश की यूरोविजन टीम ने संगीत प्रस्तुति दी और राष्ट्रीय टीवी चैनल ने इसे ‘द ग्रेट चर्च वॉक’ नाम से लाइव दिखाया.
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