केंद्र सरकार ने देश के 15 प्रमुख बैंकों को 31 मार्च 2029 तक सोना और चांदी इंपोर्ट करने की अनुमति दे दी है। इस लिस्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और HDFC बैंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
यह मंजूरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी है।
इन 15 बैंकों को सोना-चांदी के इम्पोर्ट की मंजूरी मिली
अक्षय तृतीया से पहले आई नई लिस्ट
यह फैसला 19 अप्रैल 2026 को आने वाली अक्षय तृतीया से ठीक पहले लिया गया है। भारत में अक्षय तृतीया को शादी के सीजन के अलावा सोना खरीदने का सबसे बड़ा मौका माना जाता है।
रिटेल सेल्स में इस त्योहार की हिस्सेदारी करीब 15% से 20% तक होती है। पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में आई गिरावट के कारण एनालिस्ट इसे खरीदारों के लिए अच्छा मौका मान रहे हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के बाद मची थी हलचल
इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकारी नोटिफिकेशन न होने के कारण बैंकों ने गोल्ड और सिल्वर के ऑर्डर रोक दिए थे। इसके चलते कंसाइनमेंट कस्टम पर फंस गए थे।
इस खबर के बाद शुक्रवार को ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 6% और टाइटन का शेयर 3% तक टूट गया। वहीं सरकारी ट्रेडिंग कंपनी MMTC के शेयरों में 16% की तेजी रही।
आम आदमी को 3 बड़े फायदे
ट्रेड डेफिसिट कंट्रोल करने के लिए
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में भारत में सोने की मांग गिरकर 710.9 मीट्रिक टन रही, जो 5 साल का निचला स्तर है।
ईरान संघर्ष की वजह से तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेट कर रही है।
सोना-चांदी का अवैध व्यापार रोकने में मदद मिलेगी
DGFT के इस कदम से अगले 3 साल के लिए बुलियन ट्रेड में स्पष्टता आएगी। इससे ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और इंस्टीट्यूशनल खरीदारों को सप्लाई चेन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य सोने-चांदी के आयात को रेगुलेटेड चैनलों के जरिए लाना है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अवैध व्यापार पर रोक लगे।
नोटिफिकेशन में देरी से फंसा था करोड़ों का सोना-चांदी
पिछले कुछ दिनों से देश में सोने और चांदी की नई खेप आने में दिक्कत हो रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की ओर से औपचारिक नोटिफिकेशन जारी न होने के कारण बैंकों ने नए ऑर्डर देना बंद कर दिया था। जो खेप पहले ही भारत पहुंच चुकी थी, वह भी कस्टम क्लियरेंस न मिलने की वजह से बंदरगाहों पर अटकी हुई थी।
दरअसल, पिछला आधिकारिक आदेश 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था। नई लिस्ट जारी होने में देरी से ज्वेलर्स और डीलरों को डर था कि इससे घरेलू बाजार में सप्लाई कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
नॉलेज पार्ट: DGFT क्या है?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का एक अटैच्ड ऑफिस है। इसका मुख्य काम विदेशी व्यापार से जुड़ी नीतियां बनाना और उन्हें लागू करना है, जैसे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट (EXIM) पॉलिसी।
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