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उत्तर प्रदेश के आगरा में धोखाधड़ी के एक मामले में करीब 13 साल बाद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जिस आरोपी को दस्तावेजों में मृत दर्शाकर उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई खत्म करा दी गई थी, वही आरोपी सड़क पर स्कूटर चलाते हुए मिल गया. वादी पक्ष ने उसे पहचान लिया और उसका फोटो खींच लिया. बाद में आरोपी के जिंदा होने के साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए. अब अदालत ने आरोपी को जेल भेज दिया है. मामला नगला बैनी प्रसाद, गांधी नगर निवासी ताराचंद शर्मा से जुड़ा है. सोमवार को ताराचंद शर्मा ने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवा नंद गुप्ता की अदालत में आत्मसमर्पण किया. उसने अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया. अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए.
वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता समीर भटनागर के मुताबिक, ताराचंद शर्मा को एक सितंबर 1999 को धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने तलब किया था. आरोप है कि उसने फर्जी वसीयत तैयार की थी. इस मामले में आरोपी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी. इसके बाद मामला अदालत में चलता रहा. अधिवक्ता के अनुसार, आरोपित पक्ष ने कथित तौर पर वर्ष 2019 में ताराचंद शर्मा को मृत दर्शाने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और मृत्यु आख्या कोर्ट में पेश की. आरोप है कि तत्कालीन थाना न्यू आगरा के थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से यह पूरा षड्यंत्र रचा गया. जब ये दस्तावेज अदालत में पेश किए गए तो ताराचंद के खिलाफ चल रही कार्रवाई निरस्त हो गई.
मामले में करीब 13 साल बाद उस समय नया मोड़ आया, जब वादी राजकुमार वर्मा ने छह फरवरी 2026 को ताराचंद शर्मा को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाते हुए देख लिया. राजकुमार वर्मा ने उसे पहचान लिया और उसका फोटो खींच लिया. इसके बाद यही फोटो इस मामले में अहम साक्ष्य बन गया. आरोपी को सड़क पर जिंदा देखने के बाद वादी पक्ष ने उसके जीवित होने से जुड़े साक्ष्य जुटाए. इसके बाद ये साक्ष्य अदालत में पेश किए गए. वादी पक्ष ने 20 मार्च 2026 के न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया. इसी आदेश के आधार पर ताराचंद शर्मा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे.
वादी ने जिंदा आरोपी का फोटो खींचकर कोर्ट में किया पेश
अधिवक्ता समीर भटनागर के मुताबिक, राजकुमार वर्मा की ओर से ताराचंद शर्मा, गिरीश चंद शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा, संबंधित पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया था. इस प्रार्थना पत्र के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई हुई. कोर्ट के आदेश पर नौ मार्च 2026 को तत्कालीन थानाध्यक्ष और आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. इसके बाद मामले की कार्रवाई आगे बढ़ी. इस बीच अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट के बाद सोमवार को ताराचंद शर्मा ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया.
सोमवार को अदालत में आत्मसमर्पण के बाद ताराचंद शर्मा की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. वादी पक्ष की ओर से आरोपी के जीवित होने के साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए. इनमें वह फोटो भी शामिल था, जिसमें ताराचंद शर्मा को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटर चलाते हुए देखा गया था. अदालत ने मामले की परिस्थितियों और वादी पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए ताराचंद शर्मा की जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया. इसके बाद अदालत ने आरोपी को जेल भेजने के आदेश दिए. इस तरह जिस आरोपी को दस्तावेजों में मृत दर्शाए जाने के कारण पहले कार्रवाई से राहत मिल गई थी, वह अब अदालत के आदेश पर जेल पहुंच गया.
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ छह फरवरी 2026 को आया था. उस दिन राजकुमार वर्मा ने ताराचंद शर्मा को गांधी नगर में स्कूटर चलाते हुए देखा था. वादी ने उसका फोटो खींच लिया. यही तस्वीर बाद में अदालत के सामने आरोपी के जीवित होने के साक्ष्य के तौर पर पेश की गई. मामला मूल रूप से वर्ष 1999 में शुरू हुआ था. ताराचंद शर्मा को एक सितंबर 1999 को धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने तलब किया था. उस पर फर्जी वसीयत तैयार करने का आरोप था. हाईकोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली थी. इसके बाद कथित तौर पर वर्ष 2019 में उसे मृत दर्शाने वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए.
जमानत अर्जी खारिज, अदालत ने ताराचंद शर्मा को भेजा जेल
आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और मृत्यु आख्या के जरिए ताराचंद को मृत साबित किया गया. इसके चलते उसके खिलाफ चल रही कार्रवाई निरस्त हो गई. वादी पक्ष ने बाद में जब उसे जीवित देखा तो इस पूरे मामले का खुलासा हुआ. अब अदालत ने सोमवार को ताराचंद शर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर उसे जेल भेज दिया है. साथ ही उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे और मामले से जुड़े अन्य आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी खुला हुआ है. इस पूरे मामले ने उस पुराने धोखाधड़ी के मुकदमे को एक बार फिर अदालत के सामने ला दिया है.
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