2 तिहाई बहुमत के बाद भी जा सकती है सांसदी? बागियों पर फैसला लेने वाले हैं स्पीकर ओम बिरला – Live Hindustan

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जल्द ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों के दल-बदल मामले में अपना फैसला सुना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले स्पीकर इस पर कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। स्पीकर ने दोनों मूल पार्टियों और उनके बागी गुटों के प्रतिनिधिमंडलों से पहले ही मुलाकात कर ली है।

संसद से जुड़े कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लिया गया निर्णय कानूनी रूप से पूरी तरह सही हो, दल-बदल विरोधी कानून से जुड़े पुराने मामलों और मिसालों की भी समीक्षा की जा रही है।

2024 के आम चुनाव में टीएमसी ने लोकसभा की 29 सीटें जीती थीं। एक सांसद के निधन के बाद फिलहाल एक सीट खाली है। पार्टी के 20 सांसदों ने बगावत करते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) का दामन थाम लिया है।

इन बागियों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था मांगी है। इसके साथ ही इन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन जताते हुए एनडीए में शामिल होने की इच्छा भी जाहिर की है।

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के बागी गुट के साथ स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। बनर्जी ने इन 20 बागियों को अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर को अलग-अलग याचिकाएं भी सौंपी हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर 9 सांसद चुने गए थे, जिनमें से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) के नेता अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और संविधान के प्रावधानों को बनाए रखने की अपील की।

उद्धव गुट के नेताओं ने स्पीकर से शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 बागी सांसदों द्वारा दिए गए किसी भी लिखित ज्ञापन की कॉपी मांगी। इस पर स्पीकर ने उन्हें बताया कि बागी सांसदों की तरफ से अभी तक उन्हें लिखित में कुछ भी नहीं मिला है।

टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने स्पीकर से दल-बदल विरोधी कानून के तहत अपने बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। दोनों पार्टियों का तर्क है कि दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से संरक्षण केवल तब मिलता है, जब पूरी राजनीतिक पार्टी के कम से कम दो-तिहाई हिस्से का किसी दूसरी पार्टी में विलय हो।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि केवल विधायकों या सांसदों के एक समूह के विलय को कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती। वहीं अनिल देसाई ने भी जोर देकर कहा कि 10वीं अनुसूची बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी विधायक दल का कोई समूह अपने आप किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता, भले ही उनके पास दो-तिहाई बहुमत ही क्यों ना हो।

लोकसभा सचिवालय आगामी मानसून सत्र के लिए सांसदों के बैठने की नई व्यवस्थाओं का आकलन कर रहा है। टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बागी गुटों के अलावा, डीएमके (DMK) ने भी संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है। दरअसल, डीएमके ने कांग्रेस के साथ अपना पुराना गठबंधन खत्म कर लिया है और अब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) के साथ गठबंधन कर लिया है।

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे ‘क्यों’ और ‘कैसे’ को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव ‘फैक्ट-चेकिंग’ और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News