आईबीएम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा लीक की औसत लागत बढ़कर 25.50 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल से 15.9% अधिक है। एआई-आधारित हमलों में वृद्ध …और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आईबीएम की ‘2026 कॉस्ट ऑफ ए डेटा ब्रीच’ रिपोर्ट के अनुसार- भारत में डाटा लीक की औसत लागत अब तक के उच्चतम स्तर 25.50 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष के 22 करोड़ रुपये से 15.9% की वृद्धि है।
लीक की घटनाएं भी बढ़ रही हैं और अब प्रत्येक घटना में 39,500 रिकॉर्ड लीक हो रहे हैं, जो 2025 में 38,200 थे। भारत में डाटा लीक की औसत लागत में पिछले वर्ष के मुकाबले 15.9% की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि भारतीय साइबर सुरक्षा के लिए एआई एक दोधारी तलवार बन गया है। भारत में हुए दुर्भावनापूर्ण हमलों में से 26% एआई द्वारा किए गए थे।
हालांकि, यही तकनीक उपलब्ध सबसे मजबूत सुरक्षा उपायों में से एक साबित हो रही है, क्योंकि एआई और सुरक्षा स्वचालन को व्यापक रूप से लागू करने वाली कंपनियों को लाभ हुआ है।
32% कंपनियां ही एआई और सिक्योरिटी ऑटोमेशन का उपयोग रही हैं। 36% कंपनियों ने सीमित उपयोग की जानकारी दी 32% कंपनियां एआई व सिक्योरिटी ऑटोमेशन का बिल्कुल उपयोग नहीं कर रही हैं।
भारत में एआई को तेजी से अपनाने से नवाचार के अपार अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन इससे साइबर खतरे भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। निष्कर्ष बताते हैं कि एआई और मजबूत शासन व्यवस्था का उपयोग करने वाले संगठन साइबर हमलों से बचाव के लिए बेहतर स्थिति में थे।
– गौरव अग्रवाल, आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष
जिन कंपनियों में एआई या सिक्योरिटी ऑटोमेशन का उपयोग नहीं होता है, उन्हें औसतन प्रति लीक 31.5 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता है। यह एआई और सिक्योरिटी ऑटोमेशन का उपयोग करने वाली कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भुगतान 21.3 करोड़ रुपये से लगभग 50% अधिक है।
डाटा लीक में सबसे अधिक नुकसान वित्तीय सेवाओं को उठाना पड़ता है। प्रति लीक 40.9 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ वित्तीय सेवा संगठन सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। वहीं प्रौद्योगिकी कंपनियों को 35.7 करोड़ रुपये और संचार सेवाओं को 34.5 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ता है।
साइबर अटैक के लिए फिशिंग का उपयोग सबसे अधिक होता है। प्रारंभिक अटैक के तरीकों में इसकी हिस्सेदारी 19% है और इससे वायस और एसएमएस फिशिंग की हिस्सेदारी शामिल है। यह ड्राइव – बाय काम्प्रोमाइज (गुप्त साइबर हमला) 16% और सप्लाई चेन काम्प्रोमाइज (थर्ड पार्टी की कमजोरी का फायदा उठाकर किए जाने वाला साइबर हमला) 15% से ज्यादा है।
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