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मेवाड़ के आस्था केंद्र और श्रीकृष्ण धाम के रूप में विख्यात श्री सांवलिया सेठ मंदिर ने एक बार फिर श्रद्धा और विश्वास का ऐसा इतिहास रचा है, जिसने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. इस बार मंदिर में मात्र एक महीने में 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए का अभूतपूर्व चढ़ावा प्राप्त हुआ है.
इस चढ़ावे में सिर्फ नकद राशि ही नहीं, बल्कि आस्था की चमक भी झलकती है. भक्तों ने अपने आराध्य ठाकुरजी को करीब 1 करोड़ रुपए मूल्य का 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और लगभग 2 करोड़ रुपए मूल्य की 84 किलो 620 ग्राम चांदी अर्पित की है. यह केवल भौतिक दान नहीं है, बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रतीक है.
यदि दान राशि के स्रोतों की बात करें तो 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपए मंदिर के दान पात्रों से प्राप्त हुए हैं. जबकि 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार 30 रुपए भेंट कक्ष और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आए हैं. इसके अलावा, विदेशी करेंसी और चेक के रूप में भी बड़ी मात्रा में भेंट प्राप्त हुई है, जो इस मंदिर की राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ती आस्था को दर्शाता है.
पिछले रिकॉर्ड्स से तुलना करें तो यह उपलब्धि और भी बड़ी प्रतीत होती है. पिछले वर्ष अप्रैल महीने में एक महीने के भीतर अधिकतम 25 करोड़ रुपए का चढ़ावा आया था. जबकि दो महीनों में 51 करोड़ 27 लाख 30 हजार 112 रुपए मिले थे. तब डेढ़ महीने में 46 करोड़ 58 लाख 32 हजार 924 रुपए प्राप्त हुए थे. लेकिन इस बार मात्र एक महीने में ही 41 करोड़ से अधिक का आंकड़ा पार करना अपने आप में ऐतिहासिक है.
इस विशाल राशि की गणना भी अपने आप में एक लंबी और सुसंगठित प्रक्रिया रही है. 16 अप्रैल को चतुर्दशी के पावन दिन से शुरू हुई यह गणना प्रक्रिया अमावस्या और रविवार को छोड़कर लगातार सात चरणों में संपन्न हुई. कैमरों की निगरानी में मंदिर मंडल समिति के पदाधिकारी, कर्मचारी और बैंक कर्मियों की टीम ने जुटकर शुक्रवार को इस गणना को पूरा किया, जिसके बाद आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए गए.
मेवाड़ में भगवान श्रीकृष्ण के इस स्वरूप सांवलिया सेठ को केवल आराध्य ही नहीं, बल्कि ‘व्यापार के संरक्षक’ के रूप में भी पूजा जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त अपने व्यवसाय में सांवलिया सेठ को साझेदार बनाता है, उसे कभी घाटा नहीं होता है. यही वजह है कि किसान से लेकर बड़े उद्योगपति तक अपने व्यापार में मुनाफे का कुछ हिस्सा भगवान को अर्पित करते हैं.
यही अनोखी आस्था इस मंदिर को विशिष्ट बनाती है. यहां भक्त केवल धन ही नहीं, बल्कि अपनी मन्नतों के अनुरूप अद्भुत और प्रतीकात्मक भेंट भी चढ़ाते हैं. अच्छी फसल होने पर किसान गेहूं की बालियां, लहसुन-प्याज की चांदी की प्रतिकृतियां अर्पित करते हैं. तो अफीम किसान चांदी के डोडे चढ़ाते हैं. वहीं झूठे मुकदमों से राहत मिलने पर भक्त चांदी की हथकड़ियां और बंदूकें भी चढ़ाते हैं. जो न्याय और मुक्ति के प्रतीक बन जाते हैं.
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