50 फीसदी टैरिफ के बाद भी ट्रंप की मांगों पर समझौता नहीं करेगा भारत, ट्रेड डील पर आगे क्या? – Hindustan

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर तनाव गहराने के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) बातचीत जारी है। हालांकि इस बीच भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत टैरिफ के दबावों में नहीं झुकेगा और अपनी सीमाओं के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को कहा है कि दोनों देशों के बीच जारी बातचीत इस पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं और सीमाओं का किस तरह ध्यान रखते हैं।
सूत्रों ने बताया, “अंत में कुछ सीमाएं हैं जिनसे हम समझौता नहीं कर सकते हैं। समझौता इस पर निर्भर करेगा कि दोनों पक्ष इन सीमाओं से किस तरह निपटते हैं। हमारी तरफ से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसानों, मछुआरों और छोटे उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।” इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर कहा है कि भारत किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच इस व्यापार समझौते को लेकर मार्च 2025 से ही बातचीत का दौर चल रहा है और अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। छठे दौर की बातचीत 25 अगस्त से ही शुरू होने वाली थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने इसके लिए भारत की अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। प्रस्तावित BTA के तहत अमेरिका भारत से मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम और एथेनॉल पर आयात शुल्क कम करने के साथ डेयरी उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है। हालांकि भारत अमेरिका की इन मांगों का जोरदार विरोध कर रहा है क्योंकि ये देश के लघु और छोटे किसानों की आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं।
अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों के आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव भी बढ़ा है। अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद का हवाला देते हुए भारत पर पहले 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। बाद में ट्रंप ने भारत पर जुर्माने के रूप में 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है। बुधवार से लागू इस शुल्क से वस्त्र, रत्न एवं आभूषण और चमड़ा जैसे क्षेत्रों से अरबों डॉलर का निर्यात प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकारी सूत्रों ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संवाद जारी रहने और दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को देखते हुए समस्या समय के साथ सुलझ जाने की उम्मीद जताई है। सूत्रों ने कहा, “निर्यातकों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय निर्यात की विविधता इस बढ़े हुए शुल्क के प्रभाव को कम कर सकती है।”
सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत ने अब तक किसी भी व्यापारिक साझेदार को कृषि और डेयरी उत्पादों में इस तरह की शुल्क रियायत नहीं दी है, जिनसे घरेलू कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। प्रस्तावित व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है, जो वर्तमान में लगभग 191 अरब डॉलर है। बता दें कि भारत और अमेरिका ने इस साल अक्टूबर तक व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की योजना की घोषणा की है।
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