5000 किमी की मिसाइल भी बेअसर! भारत ने तैयार किया लंबी दूरी का काल; पाकिस्तान का निकला दम – Live Hindustan

भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को 24 घंटे के भीतर लगातार तीन मिसाइलों का सफल उड़ान परीक्षण किया है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) हमलों से बचाव की अत्याधुनिक क्षमता है। इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) और एंटी-शिप मिसाइल से जुड़ी प्रमुख तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया गया।

परीक्षण के दौरान DRDO के मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, DRDO ने दो इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण किया है। ये मिसाइलें 2,000 किलोमीटर से 5,000 किलोमीटर की रेंज वाली दुश्मन की इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBM) को बेअसर करने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

ये इंटरसेप्टर मिसाइलें एक्सो-एटमॉस्फेरिक (वायुमंडल के बाहर) और एंडो-एटमॉस्फेरिक (वायुमंडल के भीतर) दोनों स्तरों पर मार कर सकती हैं। बताया गया है कि इन टेस्ट ट्रायल्स के बाद जल्द ही इन्हें यूजर ट्रायल्स के लिए भेजा जाएगा।

DRDO द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को इतनी उच्च प्राथमिकता देने के पीछे एक बड़ी वजह पड़ोसी देश पाकिस्तान है।

दरअसल, पाकिस्तान इन दिनों लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है। इनमें ‘फतह-I’, ‘फतह-II’ और चीन मूल की ‘P282’ मिसाइलें शामिल हैं।

भारत के इस सफल परीक्षण से पाकिस्तान की इन मिसाइलों का पुख्ता तोड़ मिल गया है और देश की रक्षा प्राचीर पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।

बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के साथ-साथ समंदर में भी भारत ने अपनी मारक क्षमता का दायरा बढ़ाया है। DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का अपना पहला उड़ान परीक्षण (मेडेन फ्लाइट टेस्ट) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

इस परीक्षण ने मध्यम दूरी पर समंदर में दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता को साबित किया है, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों को समुद्री स्ट्राइक के बेहतरीन विकल्प मिलेंगे।

24 घंटे के भीतर हुए इन बेहद जटिल परीक्षणों के दौरान DRDO और भारतीय सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की निगरानी में इन मिशनों को अंजाम दिया गया। उन्होंने DRDO के वैज्ञानिकों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और सशस्त्र बलों के शानदार तालमेल की जमकर तारीफ की। वहीं, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस ऐतिहासिक कामयाबी पर DRDO को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हवाई और समुद्री खतरों के एक बड़े दायरे से निपटने में भारत की रक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूती देगी।

भारत का BMD कार्यक्रम 1999 में शुरू हुआ था, जब पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे और चीन की मिसाइल क्षमताएं बढ़ रही थीं। इसका उद्देश्य देश की प्रमुख शहरों और रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा करना है। फेज-1 मुख्य रूप से दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों की सुरक्षा के लिए विकसित किया गया, जिसमें Prithvi Defence Vehicle (PDV) और Advanced Air Defence (AAD) इंटरसेप्टर शामिल हैं। ये क्रमशः 100 किमी और 25 किमी की ऊंचाई पर इंटरसेप्शन कर सकते हैं। 2019 में फेज-1 पूरा हो चुका था। फेज-2 अब IRBM और ICBM-क्लास खतरे को टारगेट करता है। परीक्षणों में लंबी दूरी के ट्रैकिंग रडार, लॉन्च वाहन, मिशन कंट्रोल सेंटर और सुरक्षित संचार नेटवर्क का पूरा इंटीग्रेशन दिखाया गया। शुरू में इजरायल से Swordfish रडार लिया गया था, लेकिन अब DRDO ने स्वदेशी रडार विकसित कर लिए हैं जिनकी रेंज 1,500 किमी से अधिक है।

अब भारत के पास एक विश्वसनीय मिसाइल शील्ड है जो दुश्मन की पहली हमले की क्षमता को सीमित कर देगी। इससे ‘सेकंड स्ट्राइक’ की विश्वसनीयता बढ़ेगी और परमाणु या पारंपरिक युद्ध में संतुलन बनेगा। पाकिस्तान की MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) क्षमताओं और चीन की लंबी दूरी की मिसाइलों के सामने यह सुरक्षा कवच महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, अमेरिका, रूस, इजरायल और चीन जैसे देशों के साथ भारत अब ICBM-स्तरीय BMD रखने वाले देशों में शामिल हो गया है। इससे भारत की वैश्विक रक्षा छवि मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

ये सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, लागत बचत होगी और प्रौद्योगिकी निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी। DRDO के वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के समन्वय ने 24 घंटे के अंदर कई जटिल परीक्षण सफल किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर Mission Sudarshan Chakra की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य 2035 तक एक बहु-स्तरीय, AI-सक्षम एयर और मिसाइल डिफेंस शील्ड बनाना है। यह न केवल डिफेंसिव ‘कवच’ बल्कि ऑफेंसिव ‘तलवार’ भी होगा। फेज-3 में हाइपरसोनिक हथियारों, ग्लाइड व्हीकल्स और MIRV को रोकने वाले इंटरसेप्टर विकसित किए जाएंगे।

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों और पाकिस्तान की मिसाइल विकास के बीच यह परीक्षण समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत करता है। NASM-MR जैसे सिस्टम नौसेना को दुश्मन के बेड़े को दूर से निशाना बनाने की क्षमता देंगे।

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