नई दिल्ली. जमीन और आसमान में पाकिस्तान को पस्त करने के बाद अब भारतीय रक्षा मंत्रालय पानी में अपनी रणनीति को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहा है. भारत ने 44 हजार करोड़ की लागत से स्वदेशी माइन काउंटर मेजर वैसल यानी MCMV बनाने का मन बना लिया है. यह स्पेशलाइज्ड जहाज पानी के नीचे दुश्मन की बारूदी सुरंगों को खोजने और नष्ट करने में मदद करेंगे. इस परियोजना को अभी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की मंजूरी का इंतजार है.
एक MCMV जहाज करीब 60 मीटर तक लंबा होता है. इसका वजन एक हजार टन तक हो सकता है. नेवी फाइटर शिप के लिहाज से यह वजन और आकार कुछ छोटा जरूर हो सकता है लेकिन युद्ध की स्थिति में MCMV दुश्मन की रणनीति को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभा सकती है. चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए भारत को समुद्र के मोर्चे पर खुद को फुल-प्रूव बनाने पर तेजी से काम करना होगा.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक फिलहाल भारतीय नौसेना के पास एक भी माइनस्वीपर नहीं है. पुराने माइनस्वीपर जहाज कई साल पहले रिटायर हो चुके हैं. नई MCMVs समुद्र में दुश्मन की बारूदी सुरंगों को खोजने और हटाने में सक्षम होंगी. चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक ताकत भारत के लिए चुनौती है. MCMVs बारूद खोजने के लिए खास सोनार और रोबोटिक तकनीक से लैस होंगे. ये गैर-चुंबकीय मटेरियल से बनेंगे ताकि दुश्मन की सुरंगें इन्हें पहचान न सकें. ये जहाज भारत की तटरेखा और बंदरगाहों की रक्षा में मदद करेंगे.
MCMV परियोजना की शुरुआत 2005 में हुई थी, लेकिन 2017-18 में इसे रद्द कर दिया गया था. लागत और तकनीकी विवाद को इसकी वजह बताया गया. अब इस परियोजना को फिर से शुरू किया गया है. लेकिन पहले जहाज को बनने में 7-8 साल लग सकते हैं. हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपनी ताकत दिखाई. अभी देश में 60 जहाज बन रहे हैं और 31 और को मंजूरी मिल चुकी है. इन नए MCMVs से भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेंगी.