भारत में बीते दो दशकों से ज्यादा वक्त से सीमा पार आतंकवाद फैलाने में जुटे जैश-ए-मोहम्मद ने अब फंडिंग जुटाने के नए तरीके खोज लिए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने उसके ठिकानों पर जमकर हमले किए थे। उसका मुख्यालय तक तबाह कर दिया था। अब यह आतंकी संगठन फिर से सिर उठा रहा है और फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स की नजर न पड़े, इसके लिए भी नए-नए पैंतरे अपना रहा है। इसी के तहत उसने अब ई-वॉलेट्स से चंदा वसूली शुरू कर दी है। ऐसा इसलिए ताकि पेमेंट्स को ट्रैक न किया जा सके। पाकिस्तान में प्रचलित ई-वॉलेट्स जैसे EasyPaisa और SadaPay के माध्यम से यह रकम मसूद अजहर के परिवार के लोगों के खाते में जुटाए जा रहे हैं।
यही नहीं ई-वॉलेट्स पर नए-नए अकाउंट बनाए जा रहे हैं ताकि किसी में भी एक साथ ज्यादा पेमेंट ना आए। इसी के तहत पाकिस्तान में आतंकवाद का नया ढांचा खड़ा हो रहा है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आतंकी समूह एक समय में 7 से 8 ई-वॉलेट्स को ऐक्टिव रखता है। इसके बाद लगभग 4 महीने में पुराने अकाउंट्स को बंद कर देता है और फिर हर महीने 30 नए खाते खोले जाते हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर इस बार 3.9 अरब रुपये जुटाने की तैयारी में है। यही नहीं इस रकम से वह पूरे पाकिस्तान में 313 सेंटर बनाने की तैयारी में है।
आतंकी संगठन जैश की तैयारी है कि एक मुख्यालय तो बनाया ही जाए, लेकिन उसके साथ तमाम सैटेलाइट सेंटर खोले जाएं। दरअसल इस बार जैश-ए-मोहम्मद भारत के हमलों से बचने के लिए एक ही बड़ा मुख्यालय बनाने की तैयारी में नहीं है। अब उसे लगता है कि नेटवर्क को थोड़ा विस्तृत बनाया जाए। इसी के तहत के कुछ काम वह अंडरग्राउंड ही करेगा। खबर है कि जुटने वाली 3.9 अरब की फंडिंग में से जैश-ए-मोहम्मद 1.23 अरब पाकिस्तानी रुपये अपने ठिकाने तैयार करने के लिए इस्तेमाल करेगा। इसके अलावा बाकी रकम को हथियारों की खरीद और अन्य ऑपरेशन्स के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
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