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केंद्र सरकार ने मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में तीन बिल पेश किए हैं ताकि अगर कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर बैठा हो और एक महीने तक जेल में रहता है तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना होगा. एनडीए ने इस बिल का स्वागत किया है तो विपक्ष इसका विरोध कर रही है.
2014 से अब तक विपक्ष के 30 मंत्री जेल जा चुके हैं, इनमें से ज्यादातर लंबे समय तक हिरासत में रहे. अगर केंद्र द्वारा हाल में ही पेश किया गया ‘भ्रष्ट नेता हटाओ बिल’ पास होता तो ये सभी को अपनी कुर्सी गंवानी होती. दो को छोड़कर इन मंत्रियों पर कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियां ने की थी. इस समय काल में बीजेपी या एनडीए के किसी भी मंत्री को गिरफ्तार नहीं किया गया.
आलोचकों का कहना है ये बिल इसलिए लाया गया है ताकि विपक्षी दलों के नेताओं को टार्गेट किया जाए, जो ज्यादातर बीजेपी पर केंद्रीय एजेंसियां का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हैं.
12 मंत्री जेल गए
इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) टीम के अनुसार, मई 2014 से अब तक एनडीए के सत्ता में आने के बाद 12 मौजूदा मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से ज्यादातर गिरफ्तारी केंद्रीय एजेंसी सीबीआई और ईडी ने की है.
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 8 मंत्रियों ने 30 दिनों से ज्यादा दिन जेल में बिताए. यानि अगर बिल पास हुआ रहता तो इन सभी को अपने पद से इस्तीफा देने पड़ता.
इन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे आरोप लगे हैं. इनमें दिल्ली की कथित शराब नीति घोटाला, पश्चिम बंगाल का सारदा चिट फंड और शिक्षक भर्ती घोटाला जैसे मामले शामिल हैं.
सबसे ज्यादा टीएमसी के 5 मंत्री जेल गए, फिर आम आदमी पार्टी के चार और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक-एक सदस्य शामिल हैं.
एआईएडीएमके की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता को भी सितंबर 2014 में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर जेल जाना पड़ा था. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़ारिज कर दिया था.
बीजेपी मंत्री नहीं गिरफ्तार हुए
इस अवधि में बीजेपी या उसके सहयोगी दलों के किसी मंत्री की गिरफ्तारी नहीं हुई. उत्तर प्रदेश के मंत्री राकेश सचान को एक पुराने मामले में एक साल की सजा जरूर हुई, लेकिन उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा. वे अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं.
मुख्यमंत्री भी शामिल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अकेले ऐसे नेता हैं जिन्हें मुख्यमंत्री रहते हुए गिरफ्तार किया गया. झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन ने ईडी की गिरफ्तारी से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
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