राजस्थान एटीएस ने लंबे समय से फरार चल रही 25 हज़ार की ईनामी महिला अपराधी संगीता कड़वासरा को गिरफ्तार कर फर्जी डिग्री रैकेट में बड़ी सफलता हासिल की है। यह वही रैकेट है, जिसके माध्यम से OPJS यूनिवर्सिटी, राजगढ़, चुरु से हजारों फर्जी डिग्रियाँ पीछे की तारीखों में प्रिंट कर मोटी रकम लेकर बेच दी गई थीं।
संगीता कड़वासरा उर्फ भूमि मूल रूप से चुरु जिले के नेशल छोटी गांव की रहने वाली है। वह इंटरनेशनल वॉलीबॉल प्लेयर रह चुकी है और इसी आधार पर रेलवे में खेल कोटे से नौकरी भी मिली थी। लेकिन पति से तलाक और नौकरी छोड़ने के बाद उसने अपनी बहन के माध्यम से ओके इंडिया न्यूज़ चैनल, रोहतक में काम किया। बाद में उसका संपर्क OPJS यूनिवर्सिटी से हुआ और वहीं से उसके आपराधिक सफर की पटकथा शुरू हुई।
OPJS यूनिवर्सिटी में बतौर ऑब्जर्वर काम करते हुए संगीता का संपर्क यूनिवर्सिटी मालिक जोगेंद्र सिंह से हुआ। धीरे-धीरे दोनों ने मिलकर दलालों के माध्यम से फर्जी डिग्रियों का खेल शुरू कर दिया। विभिन्न कोर्सों की हजारों डिग्रियाँ बनाई गईं और उन्हें पीछे की तारीखों में प्रिंट कर मोटी रकम वसूली गई। बेरोजगारी और पैसों की लालच ने संगीता को अपराध की राह पर धकेल दिया।
संगीता लंबे समय से फरार थी और दिल्ली के कंझावला इलाके में रुपाली एन्क्लेव स्थित फ्लैट में छिपकर रह रही थी। वह इतनी सतर्क थी कि बाहर निकलते समय दरवाजे पर ताला लगा देती थी, ताकि लगे कि घर खाली है। पड़ोसियों और आसपास के लोगों से उसका कोई मेलजोल नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक, एटीएस टीम पिछले सात दिनों से इलाके में निगरानी कर रही थी। संगीता केवल सुबह-सुबह अपने विश्वासपात्र लोगों से मिलने पास के शिव मंदिर जाती थी। इसी सुराग ने पुलिस को उसकी गतिविधियों तक पहुँचाया।
टीम को पता चला कि फ्लैट उसके भतीजे के नाम पर लिया गया है और वही बाहर निकलता है। संगीता अंदर से छुपकर रहती थी और बाहर से ताला लगाती थी। एटीएस ने योजना बनाकर फ्लैट की बिजली कटवाई और केयरटेकर को इसकी जानकारी दी। जब भतीजे ने केयरटेकर से बिजली की शिकायत की, तभी टीम ने मौके का फायदा उठाया।
केयरटेकर के जरिए ताला खुलवाया गया और जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर संगीता कड़वासरा बैठी मिली। गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने उसे दस्तयाब कर लिया।
यह पूरा मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन हज़ारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है जिन्हें इस फर्जी डिग्री रैकेट ने ठगा। OPJS यूनिवर्सिटी के नाम पर जारी की गई नकली डिग्रियाँ कई बेरोजगार युवाओं को नौकरी और करियर से वंचित कर गईं।
संगीता की कहानी यह भी दर्शाती है कि किस तरह एक राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी, जिसने देश का नाम रोशन किया था, अपराध की दलदल में फंसकर शिक्षा माफिया का हिस्सा बन गई। लालच, बेरोजगारी और गलत संगत ने उसके जीवन की दिशा बदल दी।
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