ऑनलाइन गेमिंग बैन से हिला 10,000 करोड़ का विज्ञापन कारोबार | News Track in Hindi – Newstrack

Gaming Ban Hits Ads: भारत सरकार ने हाल ही में असली पैसे से खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स और उनके विज्ञापनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। पूरा विज्ञापन बाजार इस एक निर्णय से हिला हुआ है। अब सवाल यह है कि इन गेमिंग कंपनियों से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का विज्ञापन कहाँ जाएगा? भारत का विज्ञापन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और 2025 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है। ऐसे में अचानक आया यह झटका कई कंपनियों और ब्रांड्स के लिए चिंता का कारण बन गया है।
2024 में, भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग 31,938 करोड़ रुपये का था। सिर्फ RMG इसका 85% हिस्सा था। इसका मतलब यह हुआ कि यह उद्योग ही पूरे गेमिंग कारोबार को चला रहा था। ड्रीम11, My11 Circle और मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL) जैसी कंपनियां लोगों को बहुत पसंद थीं। इनका नाम और विज्ञापन, खासकर आईपीएल जैसे बड़े खेलों में, हर जगह दिखाई देते थे। इनके विज्ञापन टीवी, OTT और मोबाइल ऐप्स पर भारी मात्रा में दिखाई देते थे। 70,000 करोड़ रुपये के डिजिटल विज्ञापन बाजार में अकेले RMG ब्रांड्स ने 8,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया था।
अब जब इन गेम्स और उनके विज्ञापनों पर रोक लगाई गई है, डिजिटल विज्ञापनों का सबसे बड़ा प्रभाव होने वाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेल और मनोरंजन से जुड़े प्रीमियम स्लॉट की मांग कम हो जाएगी। इससे बड़े कार्यक्रमों, जैसे आईपीएल और बड़े OTT शो, पर विज्ञापन की लागत कम हो सकती है। पहले जहा RMG ब्रांड्स भारी रकम लगाकर स्लॉट खरीद लेते थे, अब उस तरह की प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी। इससे बाकी कंपनियों के लिए मौके जरूर बढ़ेंगे, लेकिन कुल निवेश पर फर्क पड़ेगा।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्तमान में विज्ञापन की लागत थोड़ी कम हो सकती है। जैसे OTT प्लेटफॉर्म या कनेक्टेड टीवी पर विज्ञापन लगाने का खर्च कुछ घट सकता है। इसका कारण यह है कि RMG कंपनियां इन विज्ञापनों को पहले अधिक बोली लगाकर खरीदती थीं। ऐसा अब नहीं होगा। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि कंपनियां अपने विज्ञापन बजट को ई-कॉमर्स, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और सोशल मीडिया में खर्च करेंगे।
ड्रीम11 पहले प्रभावित हुआ है, जो RMG से अपनी लगभग 90% कमाई करता है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की टाइटल स्पॉन्सरशिप छोड़ दी है। My11 Circle का भी आईपीएल से जुड़ा 625 करोड़ रुपये का पांच साल का करार अब संकट में आ सकता है। दोनों कंपनियां मिलकर भारतीय क्रिकेट को हर साल 1,000 करोड़ रुपये देती थीं। क्रिकेट जैसे खेलों की कमाई पर इनका हटना स्पष्ट रूप से असर डालेगा।
लेकिन इसका असर सिर्फ भारत में नहीं है। ड्रीम11 भी कैरेबियन प्रीमियर लीग और ऑस्ट्रेलियन बिग बैश लीग का पार्टनर है। यह भी भारत में कबड्डी और फुटबॉल लीग्स का स्पॉन्सर करता था। अब यह कंपनियां मजबूरी में नए रास्ते ढूंढेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कंपनियां बिना धन के गेम्स या सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर बढ़ सकती हैं।
इस रोक से भी कुछ नए अवसर खुले हैं। खेलों की स्पॉन्सरशिप अब तक RMG कंपनियों के पास थी। उन्हें भारी विज्ञापन खर्च करने के कारण छोटे और नए ब्रांड्स को जगह नहीं मिली। D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) कंपनियों, फिनटेक, OTT और टेक्नोलॉजी कंपनियों को अब यह ब्रांड्स हटने से मौका मिलेगा। इससे बाजार में ज्यादा संतुलन आएगा और कई नए खिलाड़ी खेल आयोजनों के स्पॉन्सर बन सकेंगे।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव लंबे समय में विज्ञापन उद्योग के लिए अच्छा साबित हो सकता है। क्रिकेट और अन्य खेलों को नए स्पॉन्सर खोजने की जरूरत होगी, वहीं छोटे ब्रांड्स को बड़े कार्यक्रमों में भाग लेने का मौका मिलेगा। इससे विज्ञापन क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा होगी और उपभोक्ताओं को अधिक तरह-तरह के ब्रांडों का पता चलेगा।

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