बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान, रामभद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज विवाद पर बोले – News24 Hindi

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Bageshwar Baba Statement: संतों पर टिप्पणी करना सनातन धर्म के लिए हानिकारक है। कुछ लोगों का काम ही आग में घी डालना है। 2 साधु-संतों की आपसी चर्चा में कुछ लोग आनंद ले रहे हैं। वह वीडियो देखा और मुझे बहुत बुरा लगा यह जानकर कि लोग कितना गलत फैला रहे हैं? यह कहना है कि बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान जगतगुरु रामभद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आजकल महाराष्ट्र की यात्रा पर हैं। इस दौरान मुंबई के भिवंडी में स्थित बागेश्वर सनातन मठ में गुरु दीक्षा के दौरान इंटरव्यू में उन्होंने विवाद पर बात की। उन्होंने कहा कि अपने भजनों के माध्यम से प्रेमानंद महाराज ने और विद्युत्ता के माध्यम से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लोगों को एक किया। रामभद्राचार्य महाराज मन में कुछ रखते नहीं हैं, बोल देते हैं। उनके मन में कुछ भी गलत नहीं है, वह हम सभी लोगों से, अपने भक्तों से बहुत प्रेम करते हैं।
बाबा बागेश्वर ने कहा कि दोनों ही संत वंदनीय हैं। एक महापुरुष प्रेमानंद महाराज ने भागती, दौड़ती जिंदगी में अपनों से बिछड़ती पीढ़ी को भजनों के जरिए जोड़ा। वहीं जगद्गुरु श्री तुलसीपीठाधीश्वर रामभद्राचार्य गुरुदेव भगवान ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर रामलला के पक्ष में बयान देकर राम मंदिर मामले में विजय दिलाई। हमारे गुरु तो कई बार हमसे भी कह देते हैं कि हम इस चमत्कार-वमतकार के चक्कर में नहीं पड़ते, हम तो बजरंगबली और राम जी के चक्कर में पड़ते हैं।
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बाबा बागेश्वर ने कहा कि उनके मन में भी किसी के लिए ईर्ष्या नहीं है। हां, बेबाक हैं, जो मन में आता है, कह देते हैं, लेकिन जो लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बयानबाजी कराकर 2 महान संतों को लड़ाना चाह रहे हैं। वह वीडियो देखा है, जिसमें जगद्गुरु श्री तुलसीपीठाधीश्वर रामभद्राचार्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि प्रेमानंद महाराज के प्रति मन में ईर्ष्या नहीं है, वो हमारे बालक हैं, वो जब भी आएंगे, हम उन्हें गले लगाएंगे। कुछ बीच वाले लोग इनकों लड़वाकर सनातन की धज्जियां उड़वा रहे हैं।
चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बयान दिया कि वे प्रेमानंद महाराज को न तो विद्वान मानते हैं और न ही चमत्कारी संत मानते हैं। वे उनके लिए बालक के समान हैं। अगर प्रेमानंद महाराज वाकई चमत्कारी संत हैं तो वे सामने आएं और संस्कृत का एक अक्षर बोलें या किसी श्लोक का अर्थ समझाएं। प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता अस्थायी है। असली संत शास्त्रीय ज्ञान देने वाला और श्लोकों का अर्थ को समझाने की क्षमता रखने वाला है, न कि सिर्फ भजन सुनाने या प्रवचन करने में है। प्रेमानंद महाराज भक्ति में महान हो सकते हैं, लेकिन शास्त्रीय ज्ञान और चर्चा करने में वे योग्य नहीं हैं।
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बता दें कि वृंदावन स्थित श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट के संस्थापक प्रेमानंद महाराज ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य विवाद पर कोई सीधे बयान नहीं दिया है।
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