हजारों करोड़ रुपये चंदा लेने वाली गुमनाम पार्टियों की जांच कौन करेगा? चुनाव आयोग के पास सीमित शक्तियां – AajTak

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गुजरात में चुनाव लड़ने में फिसड्डी लेकिन चंदा लेने में अव्वल 10 गुमनाम राजनीतिक पार्टियों को मिले सवा चार हजार करोड़ से ज्यादा के चंदे की जांच से निर्वाचन आयोग ने हाथ खड़े कर दिए हैं. आयोग में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक निर्वाचन आयोग के पास किसी राजनीतिक दल को प्राप्त चंदे के स्रोत या मात्रा की जांच करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. फिर चाहे वह मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय, क्षेत्रीय या राज्य स्तरीय दल हो या पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल यानी आरयूपीपी.
आमदनी की जांच का अधिकार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पास
 
भारतीय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29 सी के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल को वार्षिक आधार पर चुनाव आयोग के पास चंदे और अन्य संसाधनों से हुई आमदनी की रिपोर्ट दाखिल करनी होती है. उसमें एकमुश्त 20,000 रुपये से अधिक के सभी तरह के चंदा, अनुदान, दान आदि की घोषणा करनी होती है.
राजनीतिक पार्टी को अंशदान रिपोर्ट दाखिल करने के बाद संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एक पावती जारी करते हैं. लेकिन उस चंदा आमदनी रिपोर्ट की जांच का कानूनी अधिकार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को है. 
चुनाव आयोग के पास क्या शक्तियां?
लिहाजा राजनीतिक दलों को प्राप्त और घोषित अंशदान के स्रोत और सीमा की जांच करने के लिए रिपोर्ट को वहीं भेजा जाता है. सूत्रों के मुताबिक निर्वाचन आयोग बस रजिस्टर्ड लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों यानी आरयूपीपी को सूची से आर्थिक हेराफेरी के आरोपी दल को हटा सकता है. हटाए जाने वाले दलों में वो भी आते हैं जिसने लगातार छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ा है या आयोग को अंशदान और अन्य स्रोतों से हुई आमदनी की रिपोर्ट दाखिल नहीं की है.
राहुल गांधी ने लगाए आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के गृह राज्य गुजरात में 10 ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं जो सिर्फ आयोग से रजिस्टर्ड हैं लेकिन गैर मान्यता प्राप्त हैं. उनको पिछले पांच वर्षों में 4,300 करोड़ रुपये बतौर चंदा मिले हैं. 
इन राजनीतिक दलों ने 2019 से 2024 के बीच पिछले दो लोकसभा और एक विधान सभा चुनाव में 43 उम्मीदवार उतारे थे. सभी चुनावों को मिलाकर उनको 54 हजार वोट मिले. लेकिन उन्होंने 39 लाख रुपये खर्चा दिखाया. हालांकि उनकी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में 3,500 करोड़ रुपये खर्च बताया गया है क्योंकि उन सभी पार्टियों की चंदे से ही कुल आमदनी 4,300 करोड़ रुपये हुई.
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