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जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक, बिहार से राजस्थान तक अगस्त का महीना बाढ़ का कहर लेकर आया है. कहीं लोगों की ज़िंदगी पटरी से उतर गई, तो कहीं घर बह गए और हजारों लोग बेघर हो गए.
जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी उफान पर है, जिसका असर पुलवामा और अनंतनाग जिलों पर सबसे ज्यादा पड़ा. उत्तराखंड में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड से कई हाईवे बंद हो गए. बिहार में गंगा बेल्ट के ज़िलों में हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ ने तबाही मचाई है. वहीं, राजस्थान जैसे सूखे माने जाने वाले राज्य में भी फ्लैश फ्लड देखने को मिले.
सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) की फ्लड फोरकास्ट पोर्टल के मुताबिक, फिलहाल 22 वाटर मॉनिटरिंग स्टेशन खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं, 66 चेतावनी स्तर पार कर चुके हैं और दो स्टेशन बिहार के पटना जिले का मसौढ़ी (धर्धा नदी) और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रुशमी (झेलम नदी) अत्यधिक बाढ़ स्तर पर हैं. ज़्यादातर हाई फ्लड लेवल गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों में दर्ज किए गए हैं.
सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक के निचले इलाकों में भी बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं. कर्नाटक के बीजापुर और उत्तर कन्नड़ जिले के तालिकोट और संतेगुली स्टेशन पर पानी चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किया गया.
CWC के ऑवरली हाइड्रोग्राफ डेटा से पता चलता है कि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा है. जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में झेलम नदी 24 अगस्त शाम 4 बजे तक चेतावनी स्तर (1,591 मी.) से करीब 1 मीटर नीचे थी. लेकिन सिर्फ एक घंटे में ही पानी का स्तर 2 मीटर बढ़ा और 26 अगस्त तक हाई फ्लड लेवल (1,594.5 मी.) पर पहुंच गया. ऐसा ही ट्रेंड ओडिशा के सरदपुट स्टेशन (सबरी नदी) में देखने को मिला, जहां 12 घंटे में जलस्तर 8 मीटर ऊपर चला गया और खतरे के निशान को पार कर गया.
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