ट्रंप के टैरिफ से मुश्किल में भारत की टॉय इंडस्ट्री, हजारों लोगों की नौकरियो – ABP News

अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर भारतीय एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को मुश्किल में डाल दिया है, जिसका एक बड़ा असर इंडियन टॉय इंडस्ट्री पर भी देखने को मिलेगा. टॉय इंडस्ट्री के लिए अमेरिका एक बड़ा एक्सपोर्ट मार्किट है, क्योंकि भारत 150 से ज़्यादा देशों में टॉय एक्सपोर्ट करता है, लेकिन सबसे अधिक कारोबार अमेरिका के साथ ही है.
इसके पीछे वजह साफ है कि अमेरिका में टॉय की डिमांड काफी अधिक है. हर साल 104 मिलियन डॉलर का निर्यात अमेरिका को भारत करता है और अब टॉय इंडस्ट्री एक्सपोर्ट पर 8-10 % की गिरावट देखने को मिलेगी.
हजारों लोगों की नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा
एबीपी के साथ बातचीत के दौरान इंडियन टॉय इंडस्ट्री की एक लीडिंग कंपनी स्मार्टिविटी के को-फाउंडर और सीईओ अश्विनी कुमार ने कहा कि टैरिफ का असर कामकाज पर तो होने ही वाला है, लेकिन सबसे दुखद है कि इसका खतरा हजारों लोगों की नौकरियों पर भी मंडरा रहा है. 
अश्विनी कुमार के मुताबिक, टॉय इंडस्ट्री में स्टफ टॉय और हेंडीक्राफ्ट टॉय को बनाने में सबसे ज़्यादा लेबर लगती है और इस दोनों कैटेगरी का बिजनेस ग्रोथ और डिमांड सबसे अधिक अमेरिका में है और जब वहां से कारोबार करने के हालात टैरिफ की वजह से बिगड़ते हुए दिख रहे हैं तो असर लॉन्ग टर्म में हजारों लोगों की नौकरियों पर होगा. 
टॉक इंडस्ट्री को इस समय सबसे ज्यादा फायदा
अश्विनी कुमार की कंपनी स्मार्टिविटी को इस टॉय इंडस्ट्री में 10 साल हो गए हैं और इनका कारोबार 35% एक्सपोर्ट का है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत सिर्फ अमेरिका में है. अमेरिका में ग्रोथ और बिजनेस के लिहाज से अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर टॉय इंडस्ट्री के लिए पीक टाइम होता है, क्योंकि क्रिसमस टाइम पर सबसे ज्यादा अमेरिका में टॉयज की बिक्री होती है. 
पीक टाइम से ठीक पहले ही टैरिफ की वजह से टॉय इंडस्ट्री को एक बड़ा झटका लगा है. अश्विनी कुमार में बताया कि, इस साल के लिए उनकी कंपनी ने अमेरिका को काफी सारा सामान पहले से भेज रखा है. कुछ रास्ते में था और कुछ अभी जाना है, जिसके लिए काम किया जा रहा है, लेकिन चैलेंज है. 
अमेरिका में बढ़ेंगे खिलौनो के रेट
उन्होंने बताया कि फिलहाल के लिए स्ट्रेटजी यह है कि आने वाले एक दो हफ्ते में हम लोग अमेरिका के अंदर अपने प्रोडक्ट की प्राइस बढ़ने वाले हैं. ओवरआल 12 से 15 प्रतिशत टॉय का प्राइस अमेरिका में ऊपर जाने वाला है. 
अश्विनी कुमार के मुताबिक, अमेरिका में टॉय की बिक्री के लिए सबसे ज्यादा पीक टाइम अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर होता है, क्योंकि यह क्रिसमस टाइम होता है और सबसे ज्यादा खिलौने की बिक्री इन्हीं महीनो में होती है. इन तीन महीनों में हमें कस्टमर का रिस्पांस पता चलेगा कि प्राइस बढ़ने परवह कैसे रिएक्ट करता है. हमारे कुछ पार्टनर अमेरिका में भी हैं, हमने जब उनसे बात की तो उनका यह कहना है कि अमेरिका में खिलौने 5 से 25 परसेंट महंगे होने वाले हैं.
चीन में 20 प्रतिशत कम टैरिफ
अमेरिका टॉय इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी एक्सपोर्ट मार्केट है, जिसमें सबसे ज्यादा बिजनेस चीन करता है, क्योंकि अमेरिका ने चीन पर 30% टैरिफ लगा रखा है, जिस वजह चीन से जो प्रोडक्ट आ रहे हैं, उन पर 30% टैरिफ है. अश्विनी कुमार के मुताबिक, चीन के ऊपर 30% टैरिफ है और हमारे ऊपर 50% है. हम लोगों के बीच में 20% का टैरिफ गैप है तो हमारे प्रोडक्ट 20% चीन से महंगे हो जाएंगे. इसका असर बहुत ज्यादा हमारे कारोबार पर पड़ने वाला है. 
अश्विनी कुमार ने समझाया की इंडियन टॉय इंडस्ट्री में कई तरह की कैटेगरी होती है. टॉय इंडस्ट्री में एक्सपोर्ट के मामले में, सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट स्टफ टॉयज का होता है, जैसे कि टेडी बीयर, हैंडीक्राफ्ट टॉयज. यह वह कैटेगरी है, जिसमें सबसे ज्यादा लेबर काम करती है और आगे आने वाले वक्त में इस पर खतरा होने वाला है. 
टॉय एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका सबसे बड़ा मार्केट
उन्होंने कहा कि अभी तक जो स्ट्रेटजी समझ आ रही है, वह यह कि हम अपना एक्सपोर्ट दूसरे कंट्री में भी डायवर्सिफाई करें, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि अमेरिका टॉय एक्सपोर्ट के लिहाज से सबसे बड़ा मार्केट है. कहीं और मूव करने के लिए भी ग्रोथ में कमी आ जाएगी. 
अश्विनी कुमार ने बताया कि उनकी कंपनी ज्यादातउन DIY ( do it yourself)  प्रोडक्ट बनाती है, जिसमें खुद से चीज बनानी होती. स्मार्टिविटी कंपनी ने पिछले साल अपने प्रोडक्ट्स के लिए अमेरिका में कई अवार्ड भी जीते हैं. 
टैरिफ की वजह से अब एक बड़ा घाटा
स्मार्टिविटी के सीईओ अश्विनी कुमार के मुताबिक, अमेरिका एक बहुत अच्छा मार्केट है. एजुकेशन से जुड़े हुए प्रोडक्ट्स और टॉय के लिए भी, जिस वजह से टॉय इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट में ग्रोथ अच्छी चल रही थी, लेकिन टैरिफ की वजह से अब एक बड़ा घाटा होने वाला है. अमेरिका में इस तरह के एजुकेशन से जुड़े हुए खिलौनों की बहुत ज्यादा डिमांड है और उसी कैटेगरी में यह कंपनी खिलौने बना रही थी और अमेरिका की टॉय इंडस्ट्री में डिमांड को टारगेट कर रही थी. 
यह कंपनी भारत में खिलौने बनाकर अमेरिका में एक्सपोर्ट कर रही थी, जिस वजह से कंपनी की ग्रोथ बहुत तेजी से बड़ी थी. अश्विनी ने बताया कि अमेरिका और यूरोप में डू इट योरसेल्फ टॉय की कैटेगरी बहुत ज्यादा डिमांड में है. लोग इस तरह के खिलौने अपने बच्चों को दिलाना पसंद करते हैं. इसलिए हमारे लिए कैटेगरी के लिहाज से अमेरिका एक बहुत बड़ा मार्केट था, लेकिन अब चैलेंज बहुत ज्यादा बढ़ गया है. जब तक टैरिफ की सिचुएशन सही नहीं हो जाती, हमें भी नहीं पता हम क्या करेंगे. 
प्रोडक्ट की प्राइस बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं
टॉय कंपनियों के लिए चलेंगे, यह भी बहुत ज्यादा है कि अमेरिका में तो प्रोडक्ट की प्राइस बढ़ानी ही पड़ेगी. इसके अलावा प्रोडक्शन कॉस्ट को कम नहीं किया जा सकता. अश्विनी कुमार के मुताबिक, खिलौने का प्राइस तो बढ़ेगा, लेकिन हम प्रोडक्शन कॉस्ट की काम नहीं कर सकते.
स्ट्रेटजी के लिहाज से एक-दो महीना अभी इंतजार करने के अलावा कोई हल नहीं है. अगर चीजें सही नहीं होती तो हम अक्टूबर या नवंबर में फिर एक बार नई स्ट्रेटजी पर काम करेंगे कि कैसे ऐसी सिचुएशन में अमेरिका के बिजनेस को ग्रो किया जाए. 
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Source: IOCL
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