Bihar Final Voter List: बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. चुनाव आयोग (ECI) ने अंतिम मतदाता सूची (फाइनल इलेक्टोरल रोल) जारी कर दी, जिसके अनुसार इस बार कुल 7.41 करोड़ लोग मतदान करने के पात्र होंगे. चुनाव आयोग के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ से घटकर 7.41 करोड़ रह गई. इस तरह 69 लाख से ज्यादा वोटर्स मतदाता सूची से बाहर हुए हैं. इसके अलावा 21 लाख नए नाम को लिस्ट में एड किया गया है. इस तरह कुल मिलाकर 48 मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं. बता दें कि बिहार में आने वाले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान होने की संभावना है.
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इसमें तीन करोड़ 92 लाख सात हजार पुरुष और तीन करोड़ 49 लाख 82 हजार 828 महिलाएं हैं. इसके अलावा राज्यभर में 1725 थर्ड जेंडर के मतदाता हैं. विशेष श्रेणी में 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या चार लाख तीन हजार 985 है. अंतिम सूची में पहली बार 18-19 वर्ष के नए 14 लाख एक हजार 150 मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. दिव्यांग मतदाताओं की संख्या सात लाख 20 हजार 709 है. चुनाव आयोग ने बताया कि 24 जून को एसआइआर के समय से लेकर अंतिम मतदाता सूची तक कुल 69 लाख 30 हजार 817 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए. इसमें एसआइआर और दावा-आपत्ति के माध्यम दोनों आंकड़े शामिल हैं. एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची में कुल 21 लाख 53 हजार 343 नए मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए हैं. एसआइआर शुरू होने से पहले मतदाता सूची में कुल सात करोड़ 89 लाख 69 हजार 844 मतदाताओं के नाम शामिल थे.
एसआइआर के दौरान 22 लाख 34 हजार 136 मतदाता मृत पाए गए, जबकि छह लाख 85 हजार मतदाताओं के नाम को दोहरी प्रविष्टि पाई गई थी. एसआइआर में कुल 36 लाख 44 हजार 939 मतदाता स्थायी रूप से ट्रांसफर पाए गए. इस प्रकार एसआइआर में कुल 65 लाख 64 हजार 75 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए. एसआइआर आरंभ होने के समय मतदाताओं की संख्या से अंतिम सूची के मतदाताओं की संख्या में कुल 47 लाख 77 हजार 487 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है.
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही चुनावी तैयारी तेज हो गई है. निर्वाचन आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम 5-6 अक्टूबर को बिहार दौरे पर आ सकती है. इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की जाएगी. विश्लेषकों का कहना है कि मतदाता सूची का विवाद इस चुनाव में मुख्य राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इससे जातीय समीकरण और चुनावी रणनीतियों पर सीधा असर पड़ेगा.