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बिहार के मोकामा में जन सुराज के समर्थक दुलारचंद यादव की मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले से पर्दा उठा दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत फेफड़ा फटने (लंग रप्चर) और सीने की कई पसलियां टूटने (रिब फ्रैक्चर) के कारण हुई. ये चोटें इतनी गंभीर थीं कि इंटर्नल ब्लीडिंग हुई, जिससे मौत हो गई. दुलारचंद यादव के सीने पर जोरदार प्रहार या भारी दबाव पड़ा, जिससे उनकी पसलियां टूट गईं और फेफड़े में गंभीर चोट पहुंची.
मोकामा में चुनावी रंजिश से शुरू हुआ विवाद बड़े घटनाक्रम में बदल चुका है. दुलारचंद यादव की हत्या और उनकी शव यात्रा के दौरान भड़की हिंसा के बाद एफआईआर पंडारक थाने में दर्ज की गई. यह शिकायत आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी के समर्थकों ने दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि शव यात्रा के दौरान पंडारक इलाके में उनके काफिले पर हमला किया गया और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. इस मामले में सुमित, सोनू और गोलू को आरोपी बनाया गया है.
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जब दुलारचंद यादव की शव यात्रा गांव से निकल रही थी, तभी पंडारक बाजार के पास माहौल अचानक बिगड़ गया. भीड़ में पत्थरबाज़ी, गाड़ियों में तोड़फोड़ और मारपीट की स्थिति बन गई. इसी दौरान वीणा देवी के समर्थकों का काफिला निशाना बना, जिसके चलते स्थिति पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कंट्रोल से बाहर हो गई.
मोकामा हत्याकांड को लेकर तीन एफआईआर भदौर थाने में दर्ज हो चुकी हैं. पहली एफआईआर में मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने दर्ज कराते हुए अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर और कर्मवीर, साथ ही छोटन सिंह और कंजय सिंह को नामजद किया.
वहीं दूसरी एफआईआर अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार ने दर्ज कराई, जिसमें जन सुराज प्रत्याशी प्रियदर्शी पियूष, लखन महतो, बाजो महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो और अजय महतो को आरोपी बनाया गया. तीसरी एफआईआर पुलिस की ओर से दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप में स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई. अब चौथी एफआईआर पंडारक थाने में दर्ज है, जो वीणा देवी के काफिले पर हमले से जुड़ी है.
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