कहीं तेल का खेल, कहीं पावरगेम… वेनेजुएला ही नहीं, 10 से ज्यादा देशों में US ने खोल रखा है मोर्चा – AajTak

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने दुनिया भर में कई मोर्चे खोल दिए हैं. यह सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक दबाव और संसाधनों पर कब्जे की लड़ाई है. मुख्य लक्ष्य रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों को कमजोर करना है. 
ट्रंप पुरानी विश्व व्यवस्था को बदलकर एक नई व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जहां अमेरिका सबसे मजबूत हो. उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा है कि वे अमेरिका को ‘फिर से महान’ बनाकर इतिहास में जगह बनाएं. इन चालों से ट्रंप आर्थिक फायदा, सैन्य ताकत में नंबर एक और वैश्विक प्रभुत्व हासिल करना चाहते हैं.
आइए विस्तार से जाने कि अमेरिका किन महाद्वीपों और देशों में मोर्चा खोल रहा है. संसाधनों की खोज कहां हो रही है. इससे क्या फायदा उनको मिलने वाला है. 
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अमेरिका ने किन महाद्वीपों और देशों में मोर्चा खोला है?
ट्रंप प्रशासन ने 2025-2026 में कई जगहों पर टकराव बढ़ाया. यह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) 2025 के आधार पर है, जहां रूस-चीन-ईरान-उत्तर कोरिया को संशोधनवादी ताकतें कहा गया है. मुख्य मोर्चे…
दक्षिणी अमेरिका
वेनेजुएला: सबसे बड़ा मोर्चा. 3 जनवरी 2026 को मादुरो को पकड़ा. अमेरिका ने नार्को-ट्रैफिकिंग का बहाना बनाया, लेकिन असल में तेल पर कब्जा करना चाहता है. रूस-चीन के सहयोगी को कमजोर कर उनके लिए भी मुश्किलें खड़ी करना चाहते हैं.
क्यूबा और निकारागुआ: प्रतिबंध बढ़ाए हैं. रूस के सैन्य बेस को रोकने की कोशिश की गई.
यूरोप
रूस-यूक्रेन: यूक्रेन को हथियार देना और रूस पर प्रतिबंध जारी है. ट्रंप ने यूरोपीय देशों (जर्मनी, फ्रांस) से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहा और साथ ही धमकी दी कि अगर नहीं बढ़ाया तो अमेरिकी सेनाएं हटा ली जाएंगी.  
पोलैंड और बाल्टिक देश: नाटो सेनाओं की तैनाती बढ़ाई है. रूस को घेरने के लिए कहा है. 
तुर्की: S-400 खरीद पर टकराव है. 
US global fronts
एशिया
चीन: दक्षिण चीन सागर में सैन्य अभ्यास. ताइवान को हथियार दे रहा है. व्यापार युद्ध तेज – चीनी सामान पर टैरिफ लगा रखा है. 
उत्तर कोरिया: मिसाइल टेस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है. ट्रंप ने किम जोंग उन से डील की कोशिश की लेकिन मोर्चा अभी खुला है.
फिलीपींस, वियतनाम, जापान: क्वाड गठबंधन से चीन को घेर रखा है. 
भारत: हिंद-प्रशांत में साझेदारी, लेकिन व्यापार पर टकराव है. 
मध्य पूर्व
ईरान: न्यूक्लियर डील तोड़ी, प्रतिबंध लगाए. इजरायल को समर्थन दिया गया. 
इजराइल-गाजा: गाजा युद्ध में इजरायल की मदद की. हमास को रोकने का बहाना.
सीरिया और इराक: ISIS के नाम पर सेनाएं तैनात की. रूस-ईरान को चुनौती दी. 
सऊदी अरब: तेल डील मजबूत लेकिन यमन युद्ध पर दबाव बनाया. 
अफ्रीका
सोमालिया: अल-शबाब पर ड्रोन हमले किए गए. 
इथियोपिया: नील नदी बांध पर मिस्र के साथ साझेदारी.
नाइजीरिया-कांगो: देश के अंदर चल रहे गृहयुद्ध में हस्तक्षेप. चीन के निवेश को रोकने की कोशिश की.
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उत्तरी अमेरिका और अन्य
मैक्सिको: प्रवास पर टकराव, दीवार बनाने की योजना.
ओशिनिया: चीन को घेरने के लिए ऑस्ट्रेलिया से ऑकस गठबंधन. 
आर्कटिक: रूस-चीन के साथ संसाधनों पर विवाद. ग्रीनलैंड खरीदने की पुरानी योजना.
ये मोर्चे अमेरिका को वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं।
अमेरिका कहां तेल, सोना और खनिज खोज रहा है?
ट्रंप की एनर्जी डॉमिनेंस नीति संसाधनों पर फोकस है. इससे अमेरिका आयात कम करेगा. दुश्मनों की कमाई रोकेगा. 
तेल
वेनेजुएला: मुख्य लक्ष्य. 303 अरब बैरल भंडार. अमेरिकी कंपनियां (शेवरॉन) वहां लौट रही हैं.
आर्कटिक: अलास्का और कनाडा में ड्रिलिंग. रूस के साथ प्रतिस्पर्धा.
मध्य पूर्व: सऊदी अरब से डील, ईरान के तेल पर प्रतिबंध.
अफ्रीका: नाइजीरिया में निवेश.
सोना
अफ्रीका: कांगो और घाना में अमेरिकी कंपनियां (न्यूमॉन्ट) खनन कर रही हैं.
दक्षिण अमेरिका: ब्राजील और पेरू में. अमेजन में विवादास्पद खनन.
उत्तरी अमेरिका: अलास्का (पेबल माइन) में सोना और कॉपर.
एशिया: इंडोनेशिया में फ्रीपोर्ट कंपनी.
खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट)
अफ्रीका: कांगो में कोबाल्ट (इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी के लिए). अमेरिका चीन की मोनोपॉली तोड़ना चाहता है.
दक्षिणी अमेरिका: चिली और बोलीविया में लिथियम.
उत्तरी अमेरिका: कनाडा में निकेल और लिथियम.
महासागर: प्रशांत महासागर में गहरे समुद्र खनन.
ऑस्ट्रेलिया: दुर्लभ पृथ्वी तत्व.
ये खोज अमेरिका को आत्मनिर्भर बनाती हैं. दुश्मनों की अर्थव्यवस्था कमजोर करती हैं.
US global fronts
इससे अमेरिका रूस-चीन-उत्तर कोरिया को कैसे रोकना चाहता है?
ट्रंप की रणनीति ग्रेट पावर कॉम्पिटिशन है. रूस-चीन-उत्तर कोरिया को ‘एक्सिस ऑफ एविल’ की तरह देखा जाता है.
रूस: यूक्रेन में हथियार देकर कमजोर करना. आर्कटिक संसाधनों पर कब्जा. वेनेजुएला से रूसी प्रभाव हटाना.
चीन: व्यापार प्रतिबंध से अर्थव्यवस्था दबाव. ताइवान में सैन्य मदद. अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में चीनी निवेश रोकना. CIPS जैसे सिस्टम को चुनौती.
उत्तर कोरिया: मिसाइल कार्यक्रम पर प्रतिबंध. दक्षिण कोरिया-जापान से गठबंधन. संसाधनों से उत्तर कोरिया की मदद करने वाले चीन को रोकना.
ये मोर्चे इन देशों को अलग-थलग करते हैं. अमेरिका की सैन्य-अर्थव्यवस्था मजबूत करते हैं.
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ट्रंप इससे विश्व व्यवस्था कैसे बदलना चाहते हैं?
ट्रंप पुरानी रूल्स-बेस्ड ऑर्डर को खत्म करना चाहते हैं, जो अमेरिका के हित में नहीं है. वे ट्रांजैक्शनल डिप्लोमेसी लाना चाहते हैं – जहां हर डील अमेरिका को फायदा दे. वेनेजुएला जैसी कार्रवाई से स्फीयर ऑफ इंफ्लुएंस बनाना. ब्रिक्स को कमजोर कर डॉलर की सत्ता बचाना. नई व्यवस्था में अमेरिका पावर ब्रोकर बनेगा, जहां सहयोगी पैसे दें और दुश्मन दबे रहें.
ट्रंप की राजनीतिक महत्वकांक्षा क्या है?
ट्रंप की महत्वकांक्षा है कि वे अमेरिका को फिर से महान बनाकर इतिहास में जगह बनाएं. 2026 मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन को जीत दिलाना. वे खुद को पीसमेकर दिखाना चाहते हैं, लेकिन मजबूत नेता के रूप में. माइग्रेशन रोकना, अर्थव्यवस्था मजबूत करना और दुश्मनों को हराना उनकी विरासत होगी.
ट्रंप इन चालों से क्या हासिल करना चाहते हैं?
ट्रंप राजनीतिक जीत चाहते हैं – जैसे वेनेजुएला से सस्ता तेल मिलने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था बूस्ट मिलेगा. कूटनीति से यूरोप से रक्षा पैसा वसूलना. रणनीतिक चालों से सैन्य श्रेष्ठता. कुल मिलाकर, ट्रंप अमेरिका को वैश्विक नेता बनाए रखना चाहते हैं, जहां दुनिया अमेरिका के नियमों से चले. लेकिन इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है. ब्रिक्स जैसे ग्रुप मजबूत हो सकते हैं. ट्रंप की ये चालें उनके अमेरिका फर्स्ट विजन को पूरा करती हैं.
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