हवाई जहाज से गुम हो जाए लगेज तो कितना मिलता है मुआवजा? जान लें नियम – ABP News

लखनऊ एयरपोर्ट पर यात्रियों का सामान गुम होने के मामले लगातार सामनेरहे हैं. ताजा मामला इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान से जुड़ा हुआ है, जिसमें इंडिगो एयरलाइन की उड़ान से केरल से लखनऊ पहुंचे जज सुरेश कुमार गुप्ता का सूटकेस गायब मिला. हैदराबाद होते हुए लखनऊ पहुंचे जज को एयरपोर्ट पर कन्वेयर बेल्ट पर उनका एक बैग नहीं मिला. काफी इंतजार और शिकायत के बावजूद दो दिन बाद भी उनके सामान का कोई सुराग नहीं लग सका. मामले को लेकर जज ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. इससे पहले 30 दिसंबर को मस्कट से लखनऊ पहुंचे एक अन्य यात्री का सामान भी नहीं मिल पाया था. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि हवाई जहाज से लगेज गुम हो जाए तो मुआवजा कितना मिलता है और इसे लेकर क्या नियम हैं?
फ्लाइट में लगेज गुम होने पर क्या करें?
अगर फ्लाइट से उतरने के बाद कन्वेयर बेल्ट पर आपका बैग नहीं आता है, तो तुरंत एयरलाइन के बैगेज क्लेम काउंटर पर इसकी सूचना देनी चाहिए. यहां आपको Property Irregularity Report दर्ज करानी होती है. इसके बाद एयरलाइन 21 दिनों तक आपके सामान की तलाश करती है. अगर इस दौरान बैग मिल जाता है, तो आपको सौंप दिया जाता है. लेकिन अगर 21 दिनों तक खोज के बाद भी लगेज नहीं मिलता है तो उसे ऑफिशियल तौर पर गुम मान लिया जाता है. ऐसी कंडीशन यात्री मुआवजे का दावा कर सकता है हालांकि इसके लिए बोर्डिंग पास और बैगेज टैग जैसे डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं.
लगेज गुम हो जाए तो कितना मिल सकता है मुआवजा?
भारत के अंदर उड़ान के दौरान लगेज गुम या खराब होने पर कैरिज बाय एयर एक्ट1972 के तहत कार्रवाई होती है. वहीं इंटरनेशनल फ्लाइट के मामलों में मॉन्ट्रियल कन्वेंशन लागू होता है. दोनों ही मामलों में एयरलाइंस की जिम्मेदारी तय सीमा तक ही होती है. वहीं DGCA के नियमों के अनुसार डोमेस्टिक फ्लाइट में अगर किसी यात्री का लगेज गुम हो जाता है, डिले हो जाता है या डैमेज हो जाता है, तो एयरलाइन को अधिकतम 20 हजार रुपये तक मुआवजा देना पड़ सकता है. वहीं इंटरनेशनल एयरलाइंस में सफर कर रहे भारतीय यात्री का सामान डैमेज होने पर कंपनी को 1131 SDR यानी 124,925 रुपये तक का पेमेंट करती है. SDR का मतलब स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स होता है, जिसे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने बनाया है.1 SDR की कीमत 109 रुपये होती है.
मुआवजा क्लेम करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 
इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.
Source: IOCL
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