Feedback
UGC के नए इक्विटी रूल को लेकर पिछले कुछ दिनों से घमासान मचा हुआ है. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी. इसमें नए नियम के एक प्रावधान सेक्शन 3(C) को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई थी. अब कोर्ट ने भी नए नियम पर स्टे लगा दिया है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इस सेक्शन में ऐसा क्या है.
यूजीसी के नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तत्काल इस पर रोक लगा दिया है. कोर्ट ने 2012 के पुराने नियम को ही प्रभावी करने का निर्देश दिया है. नए नियम के खिलाफ जो याचिका दायर की गई थी, उसमें सेक्शन 3 (C) को असंवैधानिक बताया गया था.
याचिका में यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी बनाए गए नियम, इक्विटी रूल 2026 के एक प्रावधान को चुनौती दी गई थी. इस नए नियम को 13 जनवरी 2026 को लागू किया गया था. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस नए नियम का सेक्शन 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है तथा इससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. याचिका में नियम 3(C) को असंवैधानिक घोषित किए जाने की गुहार लगाई गई थी.
याचिका में कहा गया है कि यहां दिए गए प्रावधान संविधान में दिए गए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. याचिका में यह भी कहा गया था कि यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ है. इससे उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के मकसद को नुकसान पहुंचाता है.
यूजीसी के नए इक्विटी रूल के सेक्शन 3 (C) में कहा गया है – जाति-आधारित भेदभाव का मतलब है अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के साथ केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव.
यह भी पढ़ें: UGC के नए नियम को दी गई चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता की जांच की जाए और छात्रों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए नए नियम के इस प्रावधान को अस्पष्ट बताया है और इस पर रोक लगा दी है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विष्ण जैन ने भी दलील दी कि यूजीसी के नए रेगुलेशन के सेक्शन 3C में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है वो पूरी तरह से सही नहीं है. यह संविधान की समानता की भावना के विपरीत है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू