Hardoi News: हरदोई जिले से आई यह खबर कानून के रखवालों पर ऐसा सवाल खड़ा करती है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में ला खड़ा किया है. कछौना थाना क्षेत्र में खाकी की आड़ में दबंगई का जो खेल चल रहा था, वह आखिरकार बेनकाब हो गया.
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Hardoi News/आशीष द्विवेदी: उत्तर प्रदेश के हरदोई के कछौना थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधा और शर्मनाक प्रहार है. यहां कानून की रखवाली करने वाले ही कानून को कुचलते नजर आए. पीड़ित की फरियाद को कूड़ेदान में डालकर दबंग ग्राम प्रधान को बचाने का खेल आखिरकार थानाध्यक्ष को भारी पड़ गया. पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए थानाध्यक्ष कछौना निर्भय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.
क्या है पूरा घटना?
घटना 25 जनवरी की है. आरोप है कि कछौना देहात गांव में दबंग ग्राम प्रधान नसीम ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर महिला अधिवक्ता फिरदौस जहां के पति सलीम को घर के बाहर खड़ी कार से जबरन खींचा और उस पर जानलेवा हमला कर दिया. लाठी-डंडों से की गई इस बर्बर मारपीट में महिला अधिवक्ता के पति समेत करीब आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. हालात इतने गंभीर थे कि सभी को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा. लेकिन सबसे चौंकाने और शर्मनाक पहलू तब सामने आया, जब पीड़ित महिला अधिवक्ता घायल पति और परिजनों के साथ न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची तो यहां न्याय नहीं, खुली नाइंसाफी मिली.
थानाध्यक्ष ने वर्दी की मर्यादा को ताक पर रखकर पीड़ितों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया, बल्कि उल्टा आरोपी ग्राम प्रधान की तरफ से मुकदमा दर्ज कर पीड़ितों को ही आरोपी बना दिया. यानी लाठियां चलाने वाले खुले घूमते रहे और लहूलुहान लोग कटघरे में खड़े कर दिए गए.
मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया
यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ, जब मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. वीडियो में दबंगई की बर्बर तस्वीरें भी दिखीं और पुलिस की पक्षपाती भूमिका भी पूरी तरह बेनकाब हो गई. वीडियो सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामला सीधे उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया. सबूतों के दबाव में आखिरकार पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा. एसपी अशोक कुमार मीणा ने थानाध्यक्ष को निलंबित कर यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि वर्दी पहनकर दबंगों की ढाल बनना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पीड़ित को न्याय से वंचित करने और अपराधियों को संरक्षण देने की कीमत चुकानी ही पड़ेगी.
फिलहाल पुलिस ने दबंग ग्राम प्रधान नसीम और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सिस्टम के सामने एक तीखा और असहज सवाल खड़ा कर दिया है अगर वीडियो वायरल न होते, तो क्या यह थानाध्यक्ष आज भी दबंगों की ढाल बना बैठा रहता और पीड़ित इंसाफ के लिए भटकते रहते?
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