मोदी सरकार के इस बजट में छिपा है 'यूरोप' वाला प्लान! जानिए साउथ और नॉर्थ को क्या-क्या मिला – AajTak

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को करीब 53 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पेश किया. मोदी सरकार के 2026-27 के बजट में भारत को यूरोप बनाने का प्लान छिपा हुआ है. केंद्र सरकार ने चीन और यूरोप जैसे देश के तर्ज पर भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाने का ऐलान किया. सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है. ऐसे में उत्तर भारत और दक्षिण भारत को क्या मिला, यूपी और बिहार कहां खड़े हैं? 
मोदी सरकार ने 2026 के बजट में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया. ये कॉरिडोर मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरू, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरू, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच बनेगा. इस सातों प्रोजेक्ट पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए सरकार ने दक्षिण भारत के मुख्य शहरों पर जोर दिया है तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल तक को जोड़ने का प्लान है. इसके जरिए चीन और यूरोप जैसे देशों की तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस और हाई रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेन की सौगात मिलेगी?
देश के तीन मेट्रो शहर को मिला सौगात
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर काफी अहम है. इस नए आर्थिक कॉरिडोर से क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. देश के तीन मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई और चेन्नई को इस नेटवर्क से जोड़ने का प्लान है. मौजूदा वक्त में तीनों शहर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ये तेजी से प्रगति भी कर रहे हैं. ऐसे में बुलेट ट्रेन चलने से इन शहरों के बीच लोग रोज अप-डाउन कर सकेंगे. दिल्ली से यूपी के वाराणसी को जोड़ने तो वाराणसी के असम को जोड़ने का है. 
साउथ के बड़े शहरों में होगा नेटवर्क
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चेन्नई से बेंगलुरु के बीच का सफर मात्र 1 घंटे और 13 मिनट में पूरा होगा. यह दूरी करीब 350 किमी की है. बेंगलुरु-हैदराबाद के बीच का सफर करीब दो घंटे में पूरा होगा. यह दूरी करीब 575 किमी है. ऐसे ही चेन्नई से हैदराबाद के बीच की दूरी 2 घंटे 55 मिनट पर पूरा होगी. यह दूरी करीब 630 किमी की है.
मोदी सरकार दक्षिण के तमाम बड़े शहरों को हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की प्लानिंग है. तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु की राजधानी को एक-दूसरे से जोड़ने की है. इतना ही नहीं कर्नाटक को महाराष्ट्र के पुणे से जोड़ने की कवायद की गई है. रेल मंत्री श्विनी वैष्णव ने कहा कि अहमदाबाद-मुंबई के बन रहे हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट से पुणे और हैदराबाद भी जुड़ जाएंगे. कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट के जरिए पश्चिम और दक्षिण भारत के सभी बड़े शहर बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जुड़ जाएंगे.
उत्तर प्रदेश और बिहार कहां खड़े है?
मोदी सरकार ने हाईस्पीड ट्रेन की सौगात सिर्फ दक्षिण के राज्यों के ही जोड़ने पर नहीं दिया बल्कि दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी के सिलुगुड़ी इलाके में नेटवर्क स्थापित करने की है. उत्तर भारत की हिंदी पट्टी खासकर बिहार-यूपी और पूर्वोत्तर भारत की ओर ये इलाके देश के सबसे पिछड़े क्षेत्र में आते हैं, लेकिन तेजी से विकास की रफ्तार पकड़ रहे हैं. सरकार ने दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाईस्पीड कॉरिडोर की घोषणा की है. 
वाराणसी से सिलुगुड़ी के बीच चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन के जरिए बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के तमाम शहर इस नेटवर्क के जुड़ेंगे. आर्थिक दृष्टि से देखें तो बिहार-यूपी और पूर्वी भारत में कोई ऐसा उभरता शहर है. उत्तर भारत का पूरा दबाव दिल्ली-एनसीआर पर है. पूर्वी भारत में कोलकाता पुराना मेट्रो शहर है लेकिन वह भी आधुनिक विकास की रफ्तार में काफी पीछे छूट गया है. ऐसे में मोदी सरकार ने हाईस्पीड ट्रेन के जरिए फिर से उत्तर भारत को नार्थ ईस्ट से जोड़ने की कवायद है. 
चीन-यूरोप जैसी रफ्तार देने का प्लान
दुनिया का सबसे बड़ा हाई स्पीड रेल नेटवर्क वाला देश चीन है. चीन में 45,000 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड रेल नेटवर्क है जिस पर 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ती हैं. यूरोप में हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क काफी व्यापक है, जो लगभग 8,500 किलोमीटर से अधिक समर्पित लाइनों (250 किमी/ घंटा से अधिक) के साथ तेजी से बढ़ रहा है. दक्षिण कोरिया में 877 किमी का हाईस्पीड नेटवर्क है तो जापान में 3,096 किमी (शिनकानसेन नेटवर्क) है, जहां पर बुलेट ट्रेन हवा की रफ्तार से चलती है. 
यूरोप में फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, नीदरलैंड और यूके के विकास की रफ्तार हाईस्पीड ट्रेन मानी जाती है. स्पेन में 3,190 किमी, फ्रांस में 2,748 किमी, जर्मनी में 1,163 किमी और इटली में 1,097 किमी से अधिक का हाईस्पीड नेटवर्क है, जो यूरोप में सबसे लंबा और चीन के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है. इसके अलावा स्वीडन, तुर्की, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, ताइवान, इंडोनेशिया में भी 200 किमी घंटे की रफ्तार से ट्रेन चल रही. 
हाईस्पीड कॉरिडोर की सौगात अब भारत के तमाम बड़े शहरों को मिलने जा रही है. इसके बनने से शहरों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इन सभी कॉरिडोर पर एक साथ काम चलेगा. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगले पांच से 10 साल में ये प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकते हैं. 
हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट बनने से विकास की गति और तेज होगी. लोगों की आवाजाही और सुगम होगी. लोग 500-700 किमी की दूरी कुछ इस तरह पूरी करेंगे जिस तरह एनसीआर में दिल्ली-गुड़गांव के बीच लोग करते हैं. इन सभी बड़े शहरों के बीच पहले से बेहतरीन हाईवे या एक्सप्रेस-वे है. मुंबई-पुणे के बीच ही देश का पहले एक्सप्रेस वे बना था. इसी तरह चेन्नई-बेंगलुरू के बीच के भी एक्सप्रेस-वे चालू हो चुका है और अब हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से पूरी तरह यूरोप जैसी सुविधाएं होंगी. 
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