'7 साल से लड़ रहे, चंदा करके वकील की फीस देते हैं…' 69000 शिक्षक भर्ती के उम्मीदवारों ने बताई अपनी कहानी – AajTak

Feedback
उत्तर प्रदेश में उन भर्तियों की लिस्ट बहुत लंबी है, जिनका सेलेक्शन प्रोसेस कई सालों से चल रहा है. किसी का एग्जाम नहीं हुआ है तो किसी एग्जाम होने के बाद रिजल्ट नहीं आया है. कुछ भर्ती ऐसी हैं, जिनमें एग्जाम, रिजल्ट की प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन मामला कोर्ट में है. उन्हीं परीक्षाओं में से एक है 69 हजार शिक्षकों की भर्ती. साल 2018 में भर्ती का नोटिफिकेशन आया था, लेकिन चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है. इसे लेकर लखनऊ में प्रोटेस्ट किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.  तो समझते हैं अब छात्र किन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और मामला कहां अटका हुआ है…
69 हजार शिक्षकों की भर्ती परीक्षा के उम्मीदवारों ने लखनऊ में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलने को लेकर प्रदर्शन किया. उम्मीदवारों का कहना है कि बीते करीब 2 सालों से सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार भर्ती में पैरवी नहीं कर रही, जिस वजह से अदालत का फैसला नहीं हो पा रहा. बता दें कि भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट के अधीन है और अब उम्मीदवार कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान उम्मीदवारों ने कोर्ट में सुनवाई ना होने की वजह से सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की.
7 सालों से चल ही रही है प्रक्रिया
– साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. 
– भर्ती के लिए 6 जनवरी 2019 को परीक्षा का आयोजन किया गया था. 
– इसके बाद 12 मई, 2020 को सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए थे. 
– परीक्षा की कट-ऑफ भी जारी कर दी गई और चयन प्रक्रिया शुरू हो गई.
– लेकिन, सवाल उठा कि इस भर्ती में आरक्षण से जुड़े नियमों का सही से पालन नहीं हुआ.  
– फिर प्रदर्शन हुए, मामला राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग पहुंचा और फिर 2020 में ही मामला कोर्ट में चला गया. 
– इसके बाद कुछ साल कोर्ट में मामला चला और 2023 में आदेश आया कि 2020 की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी जाए. 
– सितंबर 2024 में हाई कोर्ट की डबल बेंच में नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी करने के आदेश को चुनौती देते हुए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील की.
– सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती पर फैसला आने तक रोक लगा दी.
कोर्ट में 1 साल 5 महीने पूरे हो चुके हैं. 28 बार सुनवाई की तारीख भी लग चुकी है, लेकिन उम्मीदवारों की शिकायत है कि सरकार की तरफ से कोई खड़ा नहीं होता तो सुप्रीम कोर्ट में उनकी नौकरी का फैसला नहीं हो पा रहा. 7 साल पहले जिस नौकरी के लिए फॉर्म भरा उसके लिए अब धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. 
कानपुर की अनुपमा सिंह हो ममता रानी हो या अमेठी की रमा. सबकी एक ही शिकायत है फैसला जो भी हो सुप्रीम कोर्ट देगा लेकिन कम से कम मामले का निस्तारण तो हो. सालों का इंतजार खत्म हो. नौकरी मिलनी है तो मिले, नहीं मिलनी है तो ना मिले. शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की तरह ही अपने तीन बच्चों की परवरिश के साथ-साथ सरकारी नौकरी की परीक्षा पास करने की तैयारी कर रही आयुषी पटेल संदीप श्रीवास्तव और कई उम्मीदवारों की ऐसी ही कहानियां हैं.
भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महिला उम्मीदवार ने कहा, ‘पहले मैं प्राइवेट टीचर थी और उसके बाद मैंने टीचर की नौकरी छोड़कर तैयारी की. उम्मीद थी कि सरकारी टीचर बन जाउंगी, लेकिन अब सालों से लखनऊ की सड़कों पर घूम रही हूं. हर बार लाठियां खा रहे हैं और परिवार को छोड़कर यहां आते हैं. हम हर जगह से जीते हुए हैं, लेकिन सरकार की ओर से वकील ना भेजने की वजह से ये पेंडिंग पड़ा हुआ है. अगर ये सही हो जाएगा भविष्य सुधर जाएगा.’
इसके अलावा अमेठी से आई रमा ने कहा, ‘दो साल के बेटे के साथ आई हूं. हमारे साथ ठीक व्यवहार नहीं हो रहा है. हम लेकिन अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे और आत्मदाह कर लेंगे, लेकिन अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे. हमारी कंडीशन ऐसी है कि हम रो रहे हैं और अब बात किससे कहें कुछ  समझ नहीं आता.’ एक और उम्मीदवार ने बताया कि हम चंदा पैसा देकर सुप्रीम कोर्ट में वकील खड़ा करते हैं, उनकी फीस काफी ज्यादा है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News