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ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने की खबरों से वैश्विक चिंता बढ़ गई है. यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने एक बयान में कहा कि उसे ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन Aspides के एक अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में संचालित जहाजों को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से वेरी हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो संदेश (VHF Radio Message) मिल रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि कोई भी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नहीं गुजरेगा.
हालांकि अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान ने औपचारिक रूप से ऐसे किसी आदेश की पुष्टि नहीं की है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट माना जाता है. यह सऊदी अरब, ईरान, इराक और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक खाड़ी देशों को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. ईरान पहले भी चेतावनी देता रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह इस संकरे जलमार्ग को बंद कर सकता है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए.
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल हमले किए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह सैन्य अभियान अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरे को खत्म करने और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए किया गया है. ईरान ने इन हमलों को अवैध करार दिया है. ईरान के सरकारी टीवी Al-Alam के अनुसार, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं.
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वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर इब्राहिम जब्बारी ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि ईरान ने अब तक केवल अपनी ‘कबाड़ मिसाइलों’ का इस्तेमाल किया है और आगे बेहद खतरनाक मिसाइलों से कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बीच, खाड़ी के कई तेल उत्पादक देशों में भी धमाकों की खबरें आई हैं. इन देशों ने दावा किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और समुद्री व्यापार पर गहरा असर डाल सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है अहम?
यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक जलसंधियों में से एक है. यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और अरब सागर से जोड़ता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान (मुसंदम प्रायद्वीप) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पड़ते हैं. सबसे संकरे स्थान पर इस जलर्मा की चौड़ाई लगभग 33-39 किलोमीटर (करीब 21 मील) है. यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल चोक पॉइंट. हाल के वर्षों (2023-2025) में दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का 20% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है.
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सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, कतर और ईरान जैसे देशों का ज्यादातर तेल निर्यात यहीं से होता है. अगर यह जलमार्ग पूरी तरह बंद हुआ, तो वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं. ईरान के लिए यह एक बड़ा हथियार है, लेकिन खुद ईरान का तेल निर्यात भी इसी जलमार्ग से होता है, इसलिए लंबे समय तक इसे बंद रखना मुश्किल हो सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि खाड़ी देशों से तेल आयात और एक्सपोर्ट प्रभावित होंगे.
भारत पर क्या होगा इसका असर
भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. होर्मुज रूट बाधित होने पर सप्लाई घटेगी. चूंकि यह दुनिया के लिए एक अहम जलमार्ग है, इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं. ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य और उद्योग लागत बढ़ेगी. कच्चे तेल के आयात का खर्च बढ़ने से चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) पर दबाव आएगा. बढ़ते आयात खर्च से रुपये में कमजोरी आ सकती है. वैकल्पिक मार्ग अपनाने से शिपिंग महंगी होगी और व्यापार प्रभावित होगा. भारत आपात स्थिति में अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का उपयोग कर सकता है, पर लंबे समय तक इस रूट के बंद होने से जोखिम बढ़ेगा. होर्मुज का लंबा बंद रहना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है.
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