Chandra Grahan 2026: सूतक या पातक, किसका असर ज्यादा? जानें ग्रहण के अलावा कब-कब लगते हैं ये दोष – AajTak

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Sutak and Patak Kaal: 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह चंद्र ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में जब भी कोई ग्रहण दिखाई देता है तो उससे कुछ घंटे पहले सूतक काल लागू हो जाता है, जिसमें शुभ-मांगलिक कार्य और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं. सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. इस अवधि में देवी-देवताओं की पूजा भी नहीं होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूतक की तरह पातक भी होता है. पातक में भी सूतक की तरह कुछ कठोर नियम लागू होते हैं. आइए इनमें फर्क समझते हैं.
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के अलावा जन्म और मृत्यु से भी सूतक और पातक से गहरा संबंध है. माना जाता है कि ये दोनों अवस्थाएं मनुष्य के जीवन पर बड़ा प्रभाव डालती हैं.
सूतक क्या होता है?
सूतक को ग्रहण और जन्म के समय पैदा हुई अशुद्धि से जोड़ा जाता है. घर में बच्चे के जन्म के बाद परिवार पर सूतक लग जाता है, जिसके दौरान माता-पिता और परिजन धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों से दूर रहते हैं. छठी के पूजन तक नवजात की मां का रसोई में जाना भी वर्जित माना जाता है. ग्रहण के सूतक में मंदिर बंद रहते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है.
पातक क्या होता है?
गरुड़ पुराण में पातक का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि परिवार में किसी सदस्य के निधन के तुरंत बाद पातक लग जाता है. इस दौरान परिजनों को लगभग 12 या 13 दिन तक विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है. इस दौरान घर में खाना पकाने या रसोई में जाने से बचना चाहिए. साथ ही, इसमें शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है. पूजा-पाठ वर्जित होती है.
पातक क्यों लगता है?
मृत्यु के बाद उत्पन्न अशुद्धि के कारण पातक लागू हो जाता है. वैसे तो इसकी कुल अवधि लगभग डेढ़ महीने तक मानी जाती है, लेकिन शुरुआती 13 दिनों तक इसका कड़ाई से पालन किया जाता है. अंतिम संस्कार, अस्थि विसर्जन, पवित्र नदी में स्नान और ब्राह्मण भोजन के बाद ही इसे समाप्त माना जाता है.
पातक कब-कब लागू होता है?
परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के अलावा गर्भपात या घर के पालतू पशु की मृत्यु होने पर भी पातक के नियम मानने की परंपरा बताई गई है. अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार इसकी अवधि और नियम तय किए जाते हैं.
3 मार्च के चंद्र ग्रहण का समय और सूतक
भारतीय समय के अनुसार, 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर इसकी शुरुआत होगी और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा. इस वर्ष के पहले चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी. चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है. इसी आधार पर 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रभावी हो जाएगा. और ग्रहण काल के साथ ही सूतक समाप्त होगा.
 
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