ईरान का नया 'सुप्रीम लीडर': कौन हैं अली लारीजानी? जिन्होंने US-इजरायल को 'नरक' बनाने की दी धमकी, बेशुमार दौलत के मालिक! – Zee News

Iran Supreme Leader Crisis Ali Larijani: ईरान में खामेनेई के बाद अली लारीजानी का उभार देखने को मिल रहा है. 28 फरवरी के ऑपरेशन के बाद अमेरिका-इजरायल को कड़ी चेतावनी दी. ऐसे में जानना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि क्या ईरान में सत्ता का समीकरण बदल रहा है. आइए पूरा विश्लेषण जानते हैं.  
Iran Supreme Leader Crisis Ali Larijani: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जहां से वापसी मुमकिन नहीं लगती. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश की कमान एक तीन सदस्यीय परिषद के पास है, लेकिन पर्दे के पीछे सबसे बड़ा नाम ‘अली लारीजानी’ का उभरकर सामने आया है. कभी पश्चिम के साथ बातचीत की वकालत करने वाले लारीजानी अब अमेरिका को “नरक का रास्ता” दिखाने की बात कर रहे हैं.
Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, 67 वर्षीय अली लारीजानी दशकों तक ईरानी शासन के एक शांत और व्यवहारिक चेहरे के रूप में जाने जाते थे. वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो जर्मन दार्शनिक ‘इमैनुएल कांट’ पर किताबें लिखते हैं और गणित के विद्वान हैं. लेकिन 1 मार्च 2026 को सरकारी टेलीविजन पर उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला.
अमेरिका और इजरायल द्वारा खामेनेई और IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर की हत्या के ठीक 24 घंटे बाद, लारीजानी ने आग उगलते हुए कहा कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इजरायल के जाल में फंस गए हैं. वर्तमान में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव के रूप में, लारीजानी ही वह व्यक्ति हैं जो तय करेंगे कि ईरान का अगला कदम क्या होगा.
ईरान के रसूखदार खानदान से ताल्लुकात
अली लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को इराक के नजफ में हुआ था. उनका परिवार इतना प्रभावशाली है कि साल 2009 में ‘टाइम मैगजीन’ ने उनके परिवार को “ईरान का केनेडी परिवार” कहा था. उनके पिता मिर्जा हाशेम अमोली एक बहुत बड़े धार्मिक विद्वान थे. लारीजानी के भाई भी न्यायपालिका और बड़े सरकारी पदों पर रहे हैं.
लारीजानी का नाता क्रांति के नायकों से बहुत पुराना है. 20 साल की उम्र में उन्होंने फरीदेह मोताहारी से शादी की, जो ईरान के संस्थापक रूहुल्लाह खुमैनी के बेहद करीबी मोर्तजा मोताहारी की बेटी हैं. दिलचस्प बात यह है कि कट्टरपंथी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उनकी बेटी फातिमा ने अमेरिका की क्लीवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की है.
ये भी पढे़ं- ईरान जंग में दांव पर भारत का बासमती चावल, एक्सपोर्ट में ‘रिकॉर्ड’ के बावजूद फंसे करोड़ों रुपये, क्या डूब जाएगा किसानों का पैसा?
लारीजानी का अनूठा व्यक्तित्व
ईरान के अन्य नेताओं के विपरीत, लारीजानी केवल मदरसों से नहीं पढ़े हैं. उन्होंने 1979 में शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र में मास्टर्स और पीएचडी की. इसी पढ़ाई लिखाई का असर था कि वह सालों तक ईरान के परमाणु वार्ताकार रहे और पश्चिम की चालों को बखूबी समझते थे.
संस्कृति मंत्री से संसद के स्पीकर तक
1979 की क्रांति के बाद वह IRGC में शामिल हुए और फिर राजनीति में आए. वह 1994 से 1997 के बीच संस्कृति मंत्री रहे और 10 साल तक सरकारी मीडिया (IRIB) के प्रमुख रहे. लारीजानी 2008 से 2020 तक लगातार तीन बार ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर रहे. 
उन्होंने ही 2015 की ऐतिहासिक परमाणु डील (JCPOA) को संसद से मंजूरी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. हालांकि, 2021 और 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने उन्हें फिर से सुरक्षा परिषद का सचिव बनाकर मुख्यधारा में वापस लाया.
लारीजानी की खुली चेतावनी
ताजा हमलों के बाद लारीजानी का रुख पूरी तरह बदल गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“अमेरिका और जायोनी शासन (इजरायल) ने ईरानी राष्ट्र के दिल में आग लगा दी है. हम उनके दिल जला देंगे. हम इन बेशर्म अमेरिकियों को उनके किए पर पछताने पर मजबूर कर देंगे.”
उन्होंने साफ किया कि ईरान की सेना और महान जनता अंतरराष्ट्रीय अत्याचारियों को ऐसा सबक सिखाएगी जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे. लारीजानी ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करना चाहता, लेकिन अमेरिका के उन सभी ठिकानों को निशाना बनाएगा जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया है.
ये भी पढ़ें- ‘भारत कर रहा एक और जंग की तैयारी’, संसद के संयुक्त सत्र में बोले पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी; PTI ने काटा बवाल
क्या बातचीत की कोई गुंजाइश बची है?
कुछ समय पहले तक लारीजानी को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो समझौता करने को तैयार रहते थे. हमलों से कुछ हफ्ते पहले तक वह ओमान के जरिए अमेरिका से परोक्ष बातचीत कर रहे थे. उन्होंने तब अल जजीरा से कहा था कि “बातचीत ही एक तर्कसंगत रास्ता है.”
लेकिन 28 फरवरी को हुई बमबारी ने सब कुछ बदल दिया. सोमवार को उन्होंने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वह अमेरिका से दोबारा बात करना चाहते हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि अब वाशिंगटन के साथ “कोई बातचीत नहीं” होगी.
ईरान का भविष्य और लारीजानी की भूमिका
खामेनेई के जाने के बाद ईरान के भीतर नेतृत्व को लेकर जो खालीपन आया है, उसे भरने में लारीजानी की अहम भूमिका होगी. उन्होंने देश को भरोसा दिलाया है कि संविधान के मुताबिक नेतृत्व के उत्तराधिकार की योजनाएं तैयार हैं.
उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि यह उसकी गलतफहमी है कि नेताओं को मारकर वह ईरान को अस्थिर कर सकता है. लारीजानी ने कसम खाई है कि अमेरिका और इजरायल को ऐसी ताकत का सामना करना पड़ेगा जिसका अनुभव उन्होंने पहले कभी नहीं किया है.
ये भी पढ़ें- S-400 बना दुनिया का सबसे घातक एयर डिफेंस! ईरानी मिसाइलों के सामने THAAD-पैट्रियट हुए फेल, तेहरान में टूटा HQ-9 का गुरूर
Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, जियो-पॉलिटिक्स, इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी, हथियारों और डिफेंस की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप
प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
By accepting cookies, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News