Iran news: ईरान ने Yak-130 जेट को तेहरान के ऊपर हवाई गश्त में तैनात किया है. इसे R-73 मिसाइलों से लैस कर ड्रोन खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है. ये विमान MiG-29A के साथ उड़ान भर रहे हैं, जबकि भविष्य में Su-35 प्रशिक्षण की तैयारी भी मानी जा रही है.
Iran news: ईरानी वायुसेना ने सितंबर 2023 में मिले Yak-130 एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमान को तेहरान के ऊपर हवाई गश्त के लिए तैनात किया है. इन विमानों को हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस किया गया है, ताकि दुश्मन ड्रोन के खतरे का मुकाबला किया जा सके. ये विमान तेहरान की सुरक्षा में पहले से तैनात MiG-29A लड़ाकू विमानों के साथ गश्त करते देखे गए.
हालांकि Yak-130 ईरान के बेड़े में सबसे आधुनिक और उन्नत विमान है, लेकिन इसे भारी हवाई युद्ध के लिए नहीं बनाया गया. यह केवल आंखों से दिखने वाली दूरी (विजुअल रेंज) के भीतर ही लक्ष्य को मार सकता है. फिर भी, इसकी विजुअल रेंज क्षमता ईरान के अन्य विमानों और ज्यादातर इजरायली लड़ाकू विमानों से बेहतर मानी जाती है.
फाइटर जेट को किसी भी स्थिति में मार देगा याक
YAK-130 में हेलमेट-माउंटेड साइट और R-73 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल लगी हैं, जिनकी मदद से पायलट बिना विमान की नाक सीधे लक्ष्य की ओर किए भी बड़े कोण पर हमला कर सकते हैं. रिपोर्ट और वीडियो से संकेत मिलता है कि अमेरिका और इजरायल के लड़ाकू विमान सीधे ईरान के अंदर घुसकर हमले करने से बच रहे हैं. वे लंबी दूरी से क्रूज, बैलिस्टिक और एंटी-रेडिएशन मिसाइलों, जैसे Delilah, Rampage और AGM-88 HARM—का इस्तेमाल कर रहे हैं.
ईरान में नहीं घुस पाएंगे फाइटर जेट
ईरान के हवाई क्षेत्र में उड़ने वाले ड्रोन को भारी नुकसान हुआ है. माना जा रहा है कि ज्यादातर ड्रोन को जमीन से दागी जाने वाली इन्फ्रारेड गाइडेड एयर डिफेंस सिस्टम ने गिराया है. ये सिस्टम रडार सिग्नल नहीं छोड़ते, इसलिए इन्हें हवा से आसानी से खोजकर नष्ट करना मुश्किल होता है. ईरानी एयर डिफेंस फोर्स ने दुश्मन को भ्रमित करने के लिए नकली मिसाइल लॉन्चर (डिकॉय) का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है. चूंकि ईरान का हवाई क्षेत्र अभी भी मजबूत सुरक्षा में है, इसलिए Yak-130 और MiG-29 जैसे विमान ड्रोन रोधी अभियानों में अपेक्षाकृत कम जोखिम के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
35 सालों में ईरान ने सिर्फ याक खरीदा
पिछले 35 वर्षों में Yak-130 ही एकमात्र नया लड़ाकू जेट है जो ईरान को मिला है. माना जाता है कि इसे खरीदने का मकसद पायलटों को भविष्य में मिलने वाले Su-35 लड़ाकू विमानों के लिए तैयार करना है, जिनकी डिलीवरी 2026 से शुरू होने की खबर है. फरवरी की शुरुआत में रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा था कि किसी मध्य-पूर्वी देश को Su-57 पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान निर्यात करने का समझौता हुआ है. इससे अटकलें तेज हुईं कि वह देश ईरान हो सकता है, क्योंकि Yak-130 को नए विमानों के लिए पायलट प्रशिक्षण के उद्देश्य से भी डिजाइन किया गया है.
ट्रेनिंग के साथ युद्ध में भी उपयोगी
Yak-130 ट्रेनर होने के साथ-साथ लड़ाकू क्षमता भी रखता है. हालांकि इसकी चढ़ाई की गति कम है, मोड़ने की क्षमता औसत है, संचालन ऊंचाई सीमित है और इसकी अधिकतम गति सबसोनिक (ध्वनि की गति से कम) है, लेकिन इसके आधुनिक एवियोनिक्स, सेंसर और उन्नत हथियारों की उपलब्धता इन कमियों की आंशिक भरपाई करती है.
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सौरभ पाल का नाता उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की है. सौरभ को लिखने-पढ़ने का शौक है. …और पढ़ें
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