भारत से दुश्मनी महंगी पड़ेगी… ट्रूडो तो चले गए क्या अब यूनुस की बारी? – Zee News Hindi

Muhammad Yunus News: बांग्लादेश में जो छात्र आंदोलन करने आगे आ रहे हैं. उनके पीछे जमात ए इस्लामी का हाथ है. बताया तो यहां तक जा रहा है कि छात्रों के इस आंदोलन को अब्दुल हन्नान नेतृत्व कर रहा है. बांग्लादेश में जब शेख हसीना के खिलाफ जब आंदोलन हुआ था उस दौरान भी अब्दुल हन्नान काफी एक्टिव था.
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Bangladesh News: क्या फिर भड़कने लगी है बांग्लादेश में विद्रोह की आग? क्या शेख हसीना के बाद अब यूनुस सरकार का तख्तापलट होने जा रहा है? सवाल तो ये भी उठ रहे हैं कि क्या हिंदू विरोधी सोच युनूस पर भारी पड़ेगी? दरअसल कई जगह कहा जा रहा है कि ‘ट्रूडो’ तो गए अब ‘यूनुस’ की बारी है. बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से वहां सत्ता की कमान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के हाथ में है. लेकिन इस सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश में कभी भी शांति नहीं रही.

बांग्लादेश में नया तख्तापलट?

छात्र आंदोलन से भड़की तख्तापलट की आग ने अल्पसंख्यक हिंदुओं की ज़िंदगी नर्क बना कर रख दी थी. ऊपर से कट्टरपंथियों की भड़काऊ बयानबाज़ी से भारत के साथ बांग्लादेश के कड़वे होते चले गए. अब बांग्लादेश में एक बार फिर स्थिति फिर से बेकाबू होते दिख रही है. युनूस सरकार के खिलाफ  छात्र सड़कों पर नजर आ रहे हैं. फिर से वैसा ही माहौल बन रहा है, जैसा हसीना के तख्तापलट के दौरान पिछले साल था. पिछले साल छात्रों ने शेख हसीना के खिलाफ भी आंदोलन की शुरुआत की थी. उस आंदोलन की वजह से बाद में उस समय की प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा था.

तीन बड़ी वजहें
अब बांग्लादेश की युनूस सरकार भी डरी हुई है और डर की पहली और बड़ी वजह है, बांग्लादेश में छात्रों का आक्रोश. दूसरी वजह है छात्रों के साथ जमात ए इस्लामी और तीसरी वजह है भारत की कूटनीतिक ताकत. मोहम्मद युनूस की घबराहट पिछले दिनों एक इंटरव्यू में भी सामने आई थी. अब एक बार फिर छात्र सड़कों पर हैं और इस बार निशाने पर है मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार. 

कहा जा रहा है कि जो छात्र अब सड़कों पर हैं वह मोहम्मद यूनुस की सरकार के कुछ फैसलों से खुश नहीं हैं. यूनुस राज के इन फैसलों में शामिल हैं- देश के नाम बदलने और संविधान को बदलने का ऐलान.
कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में जो छात्र आंदोलन करने आगे आ रहे हैं. उनके पीछे जमात ए इस्लामी का हाथ है. बताया तो यहां तक जा रहा है कि छात्रों के इस आंदोलन को अब्दुल हन्नान नेतृत्व कर रहा है. बांग्लादेश में जब शेख हसीना के खिलाफ जब आंदोलन हुआ था उस दौरान भी अब्दुल हन्नान काफी एक्टिव था.
अचानक चले गए ट्रूडो
एक तरफ बांग्लादेश में विद्रोह की आग बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ मोहम्मद यूनुस भारत के कूटनीतिक ताकत से भी डर रहे हैं. युनूस का डर और भी तब बढ़ गया है. जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपना इस्तीफा सौंप दिया.
दरअसल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को भारत से उलझना भारी पड़ा. जस्टिन ट्रूडो को लगा था कि खालिस्तानियों को पक्ष में खड़े होकर वो अपनी सरकार बचा लेंगे. उनको लगा था कि भारत पर झूठे आरोप लगाकर वो हीरो बन जाएंगे. लेकिन उनके देश के लोग जान गए है कि जस्टिन ट्रूडो झूठे थे और भारत सच्चा. और आखिरकार  जस्टिन ट्रूडो पर सत्ता से बेदखल होना पड़ा. 
ज़ाहिर है मोहम्मद यूनुस को भी पता है कि उन्होंने कट्टरपंथियों के दबाव में आकर हिंदुओं पर जो जुल्म किए हैं, उससे भारत में ज़बरदस्त गुस्सा है. इसके साथ ही खुद मोहम्मद यूनुस और उनके मंत्रियों ने भारत के खिलाफ़ जो तल्ख तेवर दिखाएं हैं, उस बड़बोलेपन का खामियाज़ा कभी ना कभी बांग्लादेश को भुगतना पड़ सकता है. जैसा एक बार मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू के मंत्री आपे से बाहर हो रहे थे, उसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि सबको सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी.
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