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1954 के इलाहाबाद कुंभ मेले में हुई भीषण भगदड़ की सच्चाई सामने आई है. पत्रकार एस एन मुखर्जी के संस्मरण से पता चला कि 1000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि सरकार ने केवल 316 मौतों का दावा किया था. नेहरू और राष्ट्रपति के दौरे के दौरान हुई इस घटना को सरकार ने ‘कुछ भिखारियों की मौत’ बताकर छुपाने की कोशिश की. अधिकारी घटना के बाद भी चाय-नाश्ते में व्यस्त रहे. दूसरे दिन शवों के ढेर जलाकर सबूत मिटाए गए. इस बड़ी त्रासदी के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.
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