महिलाओं के अधिकार की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है. संसद में विधेयक गिरने के बाद अब सड़क पर उतरकर परसेप्शन बनाने की कोशिश हो रही है. परसेप्शन बनाने की एक और मुहिम देश में चल रही है, जिसके सूत्रधार वो लोग हैं जो कर्म नहीं धर्म देखते हैं. ये सूत्रधार धर्म देखकर तय करते हैं कि अच्छा क्या है और क्या बुरा. ये धर्म देखकर अपराधी को मासूम बेगुनाह और यहां तक कि पीड़ित भी बता देते हैं.
Trending Photos
भारत में परसेप्शन बनाने की एक नई मुहिम देश में चल रही है, जिसके सूत्रधार वो लोग हैं जो अपराधियों के कर्म नहीं धर्म देखते हैं. इनके पास धर्म का वो डिटर्जेंट है जो रेप धर्मांतरण और आतंकी हिंसा के आरोपियों को भी मासूम बना देता है. इसलिए अब अपराधियों से मजहबी भाईचारा निभाने वाली सोच का विश्लेषण जरूरी हो जाता है. अमेरिका के राष्ट्रपति रहे अब्राहम लिंकन ने कहा है कि कानून के सामने सब समान हैं यह लोकतंत्र की नींव है.लेकिन हमारे देश में लोकतंत्र की इसी नींव को कट्टरपंथ वाला वायरस कमजोर कर रहा है.
भाईचारा निभा रहे इम्तियाज जलील?
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता हैं इम्तियाज जलील. विधायक और सांसद रह चुके हैं. आजकल महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष हैं. पूर्व विधायक और सांसद इम्तियाज जलील साहब अच्छे से जानते हैं कि देश में कानून सबको एक नजर से देखता है. लेकिन उन्हें एक खास तरह की राजनीति करनी है. एक खास वर्ग का वोट लेना है. इसलिए जिसे कानून आरोपी बताता है, अपने राजनीतिक फायदे के लिए इम्तियाज जलील साहब उसका बचाव भी करते हैं. सुनिए, इम्तियाज जलील ने अब किसका बचाव किया है? ये निर्लज्जता की पराकाष्ठा नहीं है. ये महिलाओं के सम्मान के चीरहरण का घृणित अपराध है. यह एक दुर्दांत अपराधी को बचाने का नैतिक पाप है। ये बहुत घिनौनी सोच है. बहुत गंभीर मुद्दा है. जानते हैं क्यों. क्योंकि सिर्फ और सिर्फ धर्म देखकर एक जघन्य अपराध के आरोपी को बचाया जा रहा है. अपने आक्रोश को नियंत्रित कीजिए और उस आरोपी के बारे में सुनिए जिसे बचाने के लिए इम्तियाज जलील शब्दों का सर्कस चला रहे हैं.
दुष्कर्म के आरोपी के पाप को कम दिखाने की कोशिश
19 साल के अयान अहमद को पुलिस ने अमरावती जिले के परतवाड़ा से गिरफ्तार किया. इस अयान अहमद को बचाने के लिए इम्तियाज अली एक सौ अस्सी से आठ. फिर आठ से छह और दो की आंकड़ेबाजी कर रहे थे. अयान अहमद पर बच्चों के यौन शोषण और अपमानजनक कार्यों के तहत केस दर्ज हुआ है. आरोप है कि अयान ने एक सौ अस्सी से ज्यादा मासूम लड़कियों का यौन शोषण किया. इनमें से कुछ लड़कियां नाबालिग थीं.
तीन सौ पचास से ज्यादा अश्लील वीडियो
इतना ही नहीं इस घृणित अपराधी ने लड़कियों की तीन सौ पचास से ज्यादा अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए. पुलिस ने इसके साथी उजेर खान को भी गिरफ्तार किया है.जानते हैं जो पीड़ित लड़कियां हैं उनमें से ज्यादातर हिंदू हैं. सोचिए लड़कियों की मर्यादा को तारतार करनेवाले यौन शोषण के आरोपी का कितनी निर्लज्जता से बचाव कर रहे हैं इम्तियाज जलील. सोचिए ये विधायक सांसद रहे हैं. दुष्कर्म के आरोपी के पाप को कम दिखाने के लिए निर्लज्जता से इम्तियाज जलील कह रहे हैं कि पीड़ितों की संख्या एक सौ अस्सी नहीं आठ है और उसमें से छह तो उसकी दोस्त थीं. पीड़ित सिर्फ दो हैं.
‘जहां स्त्रियों का अपमान होता है वहां कोई भी कर्म फलदायी नहीं होता’
आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने धर्मग्रंथों का उदाहरण देते हुए कहा है कि जिस घर में स्त्रियों का सत्कार होता है वहां देवता प्रसन्न रहते हैं. जहां स्त्रियों का अपमान होता है वहां कोई भी कर्म फलदायी नहीं होता. भारतीय संस्कृति स्त्रियों के सम्मान को सर्वोच्च स्थान पर रखती है. लेकिन इसी देश में इसी जमीन पर इम्तियाज जलील और उनकी जैसी सोच वाले लोग भी रहते हैं. जो महिलाओं के सम्मान को तार-तार करने वाले आरोपी से महज भाईचारा निभाते हैं. उसके लिए शाब्दिक कवच तैयार करते हैं. ऐसी सोच पर एक आदमी क्या कहेगा. यही कहेगा कि धिक्कार है. लेकिन इम्तियाज जलील को इससे फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें अपना वोट बैंक दिखता है.
अपनी राजनीति दिखती है. जानते हैं, इम्तियाज जलील ने आरोपी का नाम अयान अहमद पढ़ा होगा. नाम पढ़ते ही उनके दिमाग में बैठा कट्टरपंथ का वायरस एक्टिव हुआ होगा और बचाव में तर्क गढ़ लिए होंगे. वैसे उन्हें तर्क गढ़ने की जरूरत भी नहीं होगी. क्योंकि ये रेडिमेड तर्क उनके और उनके मजहबी भाईचारा क्लब के सदस्यों के दिमाग में पहले से फीड है. जानते हैं आरोपी अयान अहमद का एक और कनेक्शन है इम्तियाज जलील से. शुरुआती जांच में सामने आया है कि अयान उस पार्टी से जुड़ा रहा है. जिस पार्टी की महाराष्ट्र यूनिट के अध्यक्ष इम्तियाज जलील हैं उसी पार्टी के सोशल मीडिया विभाग में 180 मासूम लड़कियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वाला अयान काम करता था.
अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अयान ने पार्टी से जुड़ी कई पोस्ट और तस्वीरें शेयर की हैं. अब समझिए एक तो आरोपी का नाम अयान अहमद दूसरे वो उस पार्टी से जुड़ा था. इसलिए इम्तियाज जलील आंकड़ों का चक्रव्यूह तैयार कर उसका बचाव कर रहे हैं. समझिए ये केस कितना गंभीर है. पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच दल बनाई है. विशेष जांच दल में दस पुलिस अधिकारी और छत्तीस पुलिसकर्मी शामिल हैं. पुलिस को आशंका है कि ये नेटवर्क बहुत बड़ा था. इसके तार प्रेम जिहाद सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं.सोचिए अपराध का ये नेटवर्क कितना बड़ा था जिसकी जांच के लिए छियालीस सदस्यों की विशेष जांच दल बनाई गई है.
उस आपराधिक नेटवर्क के सरगना के बचाव में इम्तियाज जलील शाब्दों का कवच बना रहे हैं. सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका नाम अयान अहमद है. इसके गैंग के दूसरे आरोपी भी मुसलमान हैं. इम्तियाज जलील सड़क छाप आदमी नहीं है. विधायक सांसद रहे हैं. पढ़े-लिखे हैं. ऐसे लोगों की सोच भी अगर कट्टरपंथ के वायरस से संक्रमित है तो कम पढ़े लिखे लोगों के बारे में क्या ही कहा जाए.इम्तियाज जलील सिर्फ अयान अहमद से ही मजहबी भाईचारा नहीं निभा रहे हैं.
आप अब इम्तियाज जलील की सोशल मीडिया पोस्ट देखिए-
ये पोस्ट शनिवार की दोपहर एक बजकर ग्यारह मिनट पर की गई है. इस पोस्ट में इम्तियाज जलील ने नासिक में कॉरपोरेट धर्मांतरण नेटवर्क की आरोपी निदा खान का बचाव किया है.
अपनी पोस्ट में इम्तियाज साहब कह रहे हैं कि निदा खान के परिवार को असहनीय पीड़ा व्यथा और भय का सामना करना पड़ रहा है. हर दिन उनके खिलाफ रह-तरह की कहानियां गढ़ी जा रही थीं. यह सब मीडिया ट्रायल की वजह से हुआ. मीडिया एक साधारण पृष्ठभूमि की लड़की को देश की सबसे बड़ी खलनायिका बनाने में आनंद ले रहा था.मित्रों प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक इमैनुएल काण्ट ने कहा है कि न्याय वह है जिसमें हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही व्यवहार मिले बिना किसी पक्षपात के, लेकिन इम्तियाज जलील और उनकी जैसी सोच वालों के लिए न्याय की परिभाषा बदल जाती है.
उनके लिए न्याय वही है जो धर्म देखकर मिले. सोचिए अगर ऐसा नहीं होता तो इम्तियाज जलील कहते कि रेप और ब्लैकमेलिंग के आरोपी अयान को कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त सजा मिलनी चाहिए. कहते कि धर्मांतरण के पाप में शामिल निदा खान को सजा होनी चाहिए. लेकिन वो ऐसा नहीं कहते. वो कहते हैं कि निदा का परिवार बहुत परेशान है. निदा तो साधारण परिवार की लड़की है. मजहबी भाईचारा निभाने वाले नेटवर्क में देश में लोकतांत्रिक अधिकारों के कई कथित ध्वजवाहक भी शामिल हैं. हुआ ये कि जिम्मेदार कंपनी ने साफ किया कि निदा खान एचआर विभाग में काम नहीं करती थी. वो नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार नहीं थी. ठीक है. लेकिन निदा खान पर नियुक्तियों में धांधली का आरोप नहीं है. उस पर आरोप है धर्मांतरण कराने का, धर्मांतरण के कॉरपोरेट नेटवर्क में शामिल होने का.
इसलिए अगर वो एचआर विभाग में काम नहीं भी करती थीं तो उनका अपराध कम नहीं हो जाता. हां इम्तियाज जलील और स्वयंभू फैक्ट चेकर्स ने इसी नुक्ते के बहाने जरूर मजहबी भाईचारा वाले खास नजरिए से उसे बेगुनाह बताने की कोशिश की. कॉरपोरेट धर्मांतरण का ये केस हेराफेरी या घोटाले का छोटा केस नहीं है.
कॉरपोरेट धर्मांतरण नेटवर्क के तार कहां तक हैं?
ये कितना गंभीर मुद्दा है इसे समझने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान जरूर सुनना और पढ़ना चाहिए. मुख्यमंत्री ने साफ-साफ कहा है कि कॉरपोरेट धर्मांतरण नेटवर्क गंभीर मामला है. मॉड्यूल के तहत यानी सोच समझ कर प्लानिंग कर धर्मांतरण कराया जा रहा था. कॉरपोरेट धर्मांतरण नेटवर्क के तार कहां तक हैं इसकी जांच हो रही है. और इस जांच में केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जाएगी.’
यानी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को आशंका है कि कॉरपोरेट धर्मांतरण नेटवर्क की शाखाएं दूसरे शहरों और देश के दूसरे राज्यों में भी हो सकती हैं. इसलिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेने की बात वो कह रहे हैं. सोचिए इतने गंभीर केस में अभी जब जांच चल ही रही है तो कट्टरपंथी वायरस से संक्रमित इम्तियाज जलील और स्वयंभू फैक्ट चेकर कह रहे हैं कि निदा खान एचआर नहीं थी. कुल मिलाकर वो बेकसूर है. क्यों बेकसूर है. क्योंकि उसका नाम निदा खान है.
ब्रिटेन के दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल ने कहा है कि धर्म अच्छे लोगों को अच्छा बनाता है और बुरे लोगों को बुरा. इम्तियाज जलील स्वयंभू फैक्टचेकर और उनकी मंडली के लोगों के लिए ये बात सौ प्रतिशत सही है. जो सोच मासूम लड़कियों को ब्लैकमेल करनेवालों धर्मांतरण का पाप करनेवालों को अपराधी नहीं मानती वो सोच ही नहीं व्यक्ति के तौर पर भी बुरे ही हैं. मित्रों ये पहली बार नहीं है जब धर्म देखकर किसी घृणित अपराधी का बचाव किया जा रहा है.
पहले भी ऐसा हुआ है
उन्नीस सौ तिरानवे के मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेमन को दो हजार पंद्रह में जब फांसी की सजा हुई तो असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि सरकार धर्म को आधार बनाकर मेमन को फांसी पर लटका रही है.दो हजार उन्नीस में आतंक के केस से कुछ आरोपियों के बरी होने पर ओवैसी ने कहा था कि आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यवस्थित भेदभाव है.इसी साल उत्तर प्रदेश में पुलिस ने धर्मांतरण से इनकार करने पर लड़की को ब्लैकमेल करने वाले आरोपी का एनकाउंटर किया तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता हाजी शौकत अली ने इस एनकाउंटर को धर्म से जोड़ा.
मई 2025 में जब दो हजार छह मुंबई लोकल ब्लास्ट के आरोपियों को कोर्ट से राहत मिली थी तो जमीयत उलेमा ए हिंद के नेता उनके साथ जश्न मनाते और उन्हें मिठाई खिलाते दिखे थे. 2006 मुंबई लोकल ब्लास्ट में एक सौ सत्तासी निर्दोष लोगों की जान गई थी. अपराधियों का धर्म देखकर उन्हें निर्दोष बताने की लिस्ट लंबी है. उसमें कई नाम शामिल हैं.
ऐसी सोच वालों से सावधान रहने की जरूरत
ऐसे ही लोग अंदर ही अंदर देश के ताने-बाने को कमजोर कर रहे हैं.देश को कमजोर करने की साजिश करने वाले चार ऐसे ही संदिग्धों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है. ये संदिग्ध आतंकी हिंसा की साजिश रच रहे थे. इन लोगों को महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से पकड़ा गया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि ये गजवा-ए-हिंद जैसी साजिश में शामिल थे. दो आरोपी धमाके के लिए रिमोट कंट्रोल विस्फोटक बनने की साजिश कर रहे थे. पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर साजिश नाकाम कर दी है. लेकिन हो सकता है कल फिर मजहबी भाईचारा क्लब का कोई सदस्य धर्म देखकर नाम पढ़कर इन्हें बेगुनाह बता दे और कहे कि ये गजवा ए हिंद की साजिश नहीं रच रहे थे, ये तो धर्म प्रचार का काम कर रहे थे.
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Zee News Hindi पर. Hindi News और India News in Hindi के लिए जुड़े रहें हमारे साथ.
Zee News Desk, रिपोर्टिंग और डेस्क टीम का एक मजबूत हिस्सा है, जो आपके लिए विश्वसनीय खबरें पेश करता है.
Thank you
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.