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India Nepal Border News:नेपाल सरकार की सख्त भंसार नीति के जवाब में भारत ने भी सीमा पर पहचान पत्र जांच कड़ी कर दी है। भारतीय नंबर प्लेट के वाहनों और 10 …और पढ़ें
भारतीय क्षेत्र में गंडक बराज पर जांच करते एसएसबी के जवान। फोटो : जागरण
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, बगहा (पश्चिम चंपारण)। ID Verification Rule: बालेन शाह की सरकार बनने के बाद नेपाल ने अपनी भंसार नीति (Nepal Custom Duty) के अनुपालन को सख्त किया है।
विशेषकर भारतीय नंबर प्लेट के वाहन और भारतीय बाजार से 100 रुपये से अधिक के सामान की खरीद को लेकर।
इन फैसलों की वजह से अब सीमा के दोनों (India Nepal Border) ओर असंतोष देखा जा रहा है। खासकर शादी-विवाह के इस सीजन में इन नियमों की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है।
शादी का लेन-देन प्रभावित हो रहा है। जटही बॉर्डर पर एक परिवार को अपनी बेटी के लिए 20 हजार का पलंग खरीदने पर उससे 20 हजार का ही भंसार मांगा जा रहा है।
इस बीच अब भारत में भी जैसे को तैसा वाले नियम से सख्ती बढ़ा दी गई है। नेपाल जाने वालों और नेपाल से भारत आने वालों के पहचान पत्र की सख्ती से जांच की जा रही है। यहां तक की पैदल व साइकिल वालों की जानकारी भी दर्ज की जा रही है।
अब भारतीय क्षेत्र के साथ-साथ नेपाल सीमा पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। दोनों देशों के सुरक्षा बलों ने सीमा पार आवाजाही करने वाले लोगों की जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब पैदल यात्रियों तक को जांच की इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया है।
इस कदम के बाद सीमा पर गतिविधियों में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। अब भारत से नेपाल और नेपाल से भारत आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले पैदल या साइकिल से आने-जाने वालों की एंट्री नहीं होती थी। नई व्यवस्था में हर व्यक्ति के लिए इस प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस संबंध में एसएसबी के उप निरीक्षक केशवानंद शर्मा ने बताया कि सीमा पर आने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान पत्र के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। चाहे वह पैदल हो या वाहन से, सभी के सामान की जांच की जा रही है।
इस सख्ती का असर यह है कि भारतीय सीमा के गंडक बराज एक नंबर फाटक पर एंट्री और बैग जांच के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। दूसरी ओर, नेपाल सरकार के हालिया फैसले ने नेपाली नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार द्वारा 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) अनिवार्य करने के आदेश के बाद लोगों में आर्थिक बोझ बढ़ने का डर सताने लगा है। यहां बता दे कि सीमावर्ती नेपाली नागरिक भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते हैं, जहां उन्हें अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिल जाती हैं।
यदि भंसार वाली व्यवस्था इसी रूप में चलते रहती है तो उन्हें महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, नेपाल जाने वाले भारतीय वाहनों के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं।
नेपाल एपीएफ के इंस्पेक्टर तेज बहादुर मगर के अनुसार छह किलोमीटर तक की यात्रा के लिए गंडक बराज पर ही अस्थायी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इससे अधिक दूरी तय करने के लिए भंसार कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियम का उल्लंघन करने पर दूरी के अनुसार जुर्माना भी लगाया जाएगा। सीमा पर बढ़ी यह सख्ती सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से अहम मानी जा रही है, हालांकि इसका सीधा असर आम लोगों की दैनिक आवाजाही पर भी पड़ रहा है।
सीमा पर बने गेट से आने-जाने वालों की संख्या काफी कम हो गई है। उसी तरह से सीमावर्ती भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं हैं। यहां ग्राहकों की संख्या में कमी देखी जा रही है। व्यापरियों की चिंता बढ़ गई है।