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कनाडा और अमेरिका के बीच फिर तनातनी दिख रही है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध, जो कभी ताकत थे, अब कमजोरी बन गए हैं. अब इन्हें सुधारने की जरूरत है. उनकी सरकार कनाडाई इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए नए निवेश आकर्षित करने और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते करने की कोशिश कर रही है.
कार्नी ने कहा, ‘दुनिया अब अधिक खतरनाक और विभाजित हो गई है. अमेरिका ने व्यापार को लेकर अपनी सोच बदल दी है और टैरिफ को उस स्तर तक बढ़ा दिया जो आखिरी बार महामंदी के दौरान देखा गया था. अमेरिका के साथ हमारे करीबी संबंध कमजोरी बन गई है और इसे हमें सुधारना होगा. अमेरिका बदल गया है और हमें इसका जवाब देना ही होगा’.
उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ का असर ऑटो और स्टील इंडस्ट्री के कामगारों पर पड़ा है. अनिश्चितता के माहौल के कारण कंपनियां निवेश करने से हिचक रही हैं.
बता दें कि कई कनाडाई नागरिक डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी से भी नाराज हैं, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनने का सुझाव दिया था. कार्नी ने भी ट्रंप के इस बयान की तीखी आलोचना की थी.
कार्नी बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं. जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में दिए गए उनके भाषण को काफी सराहना मिली थी, जहां उन्होंने बड़े देशों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव की आलोचना की थी.
कार्नी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उन्होंने हाल ही में हुए चुनाव में जीत के बाद बहुमत हासिल की. विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी उन पर अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने का दबाव बना रही है. कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के बीच मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा जुलाई में होने वाली है.
कार्नी का कहना है कि अमेरिका फिर से सामान्य हो जाएगा, कोई व्यावहारिक रणनीति नहीं है. पुरानी यादों में जीना सही नहीं है. अमेरिका बदल गया है और हमें इसका जवाब देना होगा. यह हमारी सुरक्षा, सीमाओं और भविष्य पर कंट्रोल वापस लेने के बारे में है.
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