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बिहार के बगहा के एक 22 वर्षीय युवक इंद्रजीत सनातन धर्म के प्रति जागरूकता और नशा मुक्ति के लिए स्केटिंग से चारों धाम की यात्रा कर रहे हैं। 150 दिनों मे …और पढ़ें
अरेराज के सोमेश्वर धाम से यात्रा का शुभारंभ करता इंद्रजीत: सौजन्य:स्वयं
सुरेश कुमार गुप्ता, बगहा । आज के आधुनिक युग में ज्यादातर युवा पीढ़ी जहां मोबाइल व इंटरनेट नेटवर्क के साथ रियल दुनिया छोड़ रील की दुनिया में अपनी कीमती समय बर्बाद कर रहें है।
वहीं बगहा दो प्रखंड के लक्ष्मीपुर ढोलबजवा पंचायत के सौराहा गांव निवासी 22 वर्षीय युवक इंद्रजीत ने ऐसा संकल्प लिया है जो आज के युवाओं के लिए मिसाल है।
सनातन धर्म को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए जहां बड़े-बड़े विद्वान मूल ग्रंथों का ज्ञान लेते हैं। कर्मकांड के बजाय गीता, उपनिषद और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। इसके विपरीत इंद्रजीत ने आज के युवा पीढ़ी को सनातन धर्म से जोड़ने और नशा मुक्ति के लिए संकल्प लिया है।
इसके लिए वह स्केटिंग कर बीते 14 नवम्बर 2025 से चारों धाम की यात्रा पर है। 150 दिन की लगातार यात्रा में अभी तक 11 राज्यों का यात्रा कर चुका है। जिसमें भारत के पूर्व में ओडिशा के जगन्नाथ पुरी, दक्षिण में तमिलनाडु के रामेश्वरम व पश्चिम गुजरात में द्वारका धाम का दर्शन कर चुका है।
वहीं अब आगे राजस्थान से होते हुए उत्तर दिशा में उत्तराखंड बद्रीनाथ की यात्रा पर है। हालांकि, इन यात्रा के दौरान उसने लगभग 10 मुख्य ज्योतिर्लिं का भी दर्शन कर चुके हैं। जिसमें बिहार के अरेराज में सोमश्वर धाम, झारखंड के देवघर में वैद्यनाथ धाम।
तमिलनाडु के रामेश्वरम। आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर व खण्डवा में ओंकारेश्वर। महाराष्ट्र में पुणे स्थित भीमाशंकर, नासिक में त्र्यंबकेश्वर व औरंगाबाद में घृष्णेश्वर। गुजरात के द्वारका नागेश्वर व सौराष्ट्र में सोमनाथ शिव लिंग अर का दर्शन कर चुका है।
इंद्रजीत का कहना है कि वह सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए वेदों, उपनिषदों और गीता जैसे ग्रंथों का पूर्ण रूप से अध्ययन तो नहीं किया है।
लेकिन, इसके इस कदम से आज के युवकों के बीच सनातन धर्म की ज्ञान को जीवन में उतारना, बच्चों को संस्कृति सिखाना, और आपसी एकता बनाए रखने के साथ-साथ युवाओं को नशा मुक्त करना उसका मुख्य उद्देश्य है। आगे चलकर वह वृद्धा आश्रम खोलने की इच्छा प्रकट कर रहा है।
इंद्रजीत बताते हैं वह जब पीठ पर बैग के साथ तिरंगा लहराते हैं और देवे के देव महादेव की झंडी देख सनातन प्रेमी उसका परिचय पूछने लगते हैं।
जब वह अपना उद्देश्य और लक्ष्य बताता है तो सभी सराहना करते हुए मदद के लिए तैयार हो जाते हैं। उसने बताया कि पूरे भारत वर्ष की यात्रा के दौरान अपने बैकअप के लिए किसी को भी साथ में नहीं रखा है। रास्ते में आश्रम, मंदिर, धर्मशाला आदि जगहों पर विश्राम कर लेता है। सनातन प्रेमियों के मदद से वह बीते पांच महीनों से लगातार यात्रा कर रहा है।
मां चंद्रावती बताती हैं कि जब इंद्रजीत तीन माह का पेट में था, तभी उसके पिता का साया उसके सर से उठ चुका था। उस समय उनकी एक पुत्री शोभा सात वर्ष व बड़ा पुत्र सुग्रीव पांच वर्ष का था।
बच्चों पर पिता का साया उठने के बाद गृहिणी मां ने बच्चों के परवरिश में कभी पिता की कमी खलने नहीं दिया। मां के ऊंचे संस्कारों का देन है कि वह आज इस नक्शे कदम पर चल रहा है।
इंद्रजीत इतने समय में वह तीन धाम का दर्शन कर चुके हैं। जिसमें जगन्नाथ पुरी (पूर्व): ओडिशा, रामेश्वरम (दक्षिण): तमिलनाडु्, द्वारका (पश्चिम): गुजरात शामिल है। जबकि बद्रीनाथ (उत्तर) उत्तराखंड का यात्रा जारी है।
जहां वह उत्तराखंड में केदारनाथ व हिमालय का दर्शन कर सीधा उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद यात्रा समाप्त कर लेगा।
मैट्रिक पास इंद्रजीत दो साल पहले जब वह 20 वर्ष के थे। तब वे 23 जनवरी 2024 को अयोध्या से पहली यात्रा शुरू की थी। लगभग एक सप्ताह में इस यात्रा को पूरी करने के बाद उसने आत्म विश्वास मिला और उसने सनातन धर्म और युवा को नशा मुक्त करने के लिए प्रचार प्रसार शुरू कर दिया।
फिर उसने 2025 की शुरुआत मां वैष्णो देवी के दर्शन से शुरू किया। फिर मार्च 2025 में नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपति नाथ का भी दर्शन किया है।